Jamshedpur

सरना धर्म कोड के न्याय और अधिकार के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खट-खटाएंगे : सालखन

दिल्ली में 6-7 दिसंबर को आहूत धरना-प्रदर्शन का किया समर्थन, धर्म गुरू बंधन तिग्गा से सालखन मुर्मू ने मोबाइल पर की बात

Jamshedpur : पूर्व सांसद सह आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू का कहना है कि सरना धर्म कोड के न्याय और अधिकार के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खट-खटाएंगे. आदिवासी सेंगेल अभियान, धर्मगुरु बंधन तिग्गा  और डॉ करमा उरांव के नेतृत्व में सरना धर्म कोड की मान्यता के लिए दिल्ली में आहूत 6-7 दिसंबर के धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम का समर्थन करती है. आज बंधन तिग्गा से सालखन मुर्मू की रांची से फोन में बातचीत हुई.

केंद्र की चुप्पी आदिवासी विरोधी

सेंगेल, सरना धर्म कोड की मान्यता के मामले पर नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार की चुप्पी को आदिवासी विरोधी एक षड्यंत्र और संविधान विरोधी कदम मानती है. उसी प्रकार आदिवासी बहुल झारखंड प्रदेश की हेमंत सोरेन की जेएमएम सरकार भी वोट के लिए ईसाइयों को खुश करने के लिए सरना धर्म  कोड के मामले पर टाल-मटोल का रवैया अपनाकर आदिवासियों के साथ धोखेबाजी कर रही है.

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22 दिसंबर से जागरूकता कार्यक्रम

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सेंगेल की ओर से 22 दिसंबर 2021 से 5 प्रदेशों के लगभग 50 जिलों में एक सप्ताह तक सरना धर्म सगड़ या रथ चलाकर सरना धर्म मानने वालों को फिर से जागृत कर एकजुट करने का प्रयास करेगी. ज्ञातव्य है कि 22 दिसंबर 2003 में संताली भाषा को राष्ट्रीय मान्यता अर्थात आठवीं अनुसूची में शामिल होने का सम्मान मिला था. झारखंड प्रदेश में हिंदी के साथ संताली को अनुच्छेद 345 के तहत प्रथम राजभाषा का दर्जा और अन्य संताली भाषा-भाषी राज्यों में द्वितीय राजभाषा का दर्जा के लिए एक साथ 22 दिसंबर 2021 से सरना धर्म कोड और संताली राजभाषा सगड़ या रथ निकाला जाएगा.

जनगणना में लिखेंगे सरना धर्म

यदि भारत सरकार 2021 की जनगणना में सरना धर्म कोड को  शामिल नहीं करेगी तो सेंगेल का संकल्प है कि हम 2011 की जनगणना में  जिस प्रकार लगभग 50 लाख आदिवासियों ने any other या अन्य अन्य कॉलम में सरना धर्म लिखा था. 2021 में हम लोग एक करोड़ से ज्यादा लोगों को सरना धर्म लिखने के लिए तैयार करेंगे. सेंगेल जनगणना का बहिष्कार नहीं करेगी.

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