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बिना VC के ही चलायी जा रही सरला बिरला और YBN यूनिवर्सिटी

नहीं है विभाग में फैकल्टी फिर विश्वविद्यालय ले रहा नामांकन

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Ranchi : झारखंड में निजी विश्वविद्यालयों को मनमाने तरीके से शिक्षण संस्थान चलाने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा मामला सरला बिरला यूनिवर्सिटी और वाईबीएन यूनिवर्सिटी का है. जहां बिना कुलपति और फैकल्टी के ही बच्चों की नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.

सरला बिरला यूनिवर्सिटी की स्थापना के दो साल बाद भी नहीं है कुलपति

सरला बिरला यूनिवर्सिटी की स्थापना को लगभग दो साल होने जा रहे हैं लेकिन इस यूनिवर्सिटी में अबतक कोई भी कुलपति या वरीय अधिकारी की बहाली नहीं की गयी है. वहीं इस यूनिवर्सिटी द्वारा बिना एकेडमिक काउंसिल की बैठक के ही कई कोर्स का संचलान आरंभ कर दिया गया है. कुलपति या कुलपति के समक्ष किसी भी अधिकारी को यूनिवर्सिटी ने अबतक बहाल नहीं किया है.

वाईबीएन यूनिवर्सिटी के पास नहीं है एकेडमिक भवन

बात वाईबीएन यूनिवर्सिटी की करें तो इसका अभीतक एकेडमिक भवन नहीं बना है. इस विश्वविद्यालय द्वारा कई कैंपसों में नर्सिंग और पारा मेडिकल जैसे कोर्स चालये जा रहे हैं. लेकिन अबतक इस विश्वविद्यालय की ओर से ना ही विभागों की सूची जारी की गयी है और ना ही फैकल्टी की बहाली की गयी है.

उच्च शिक्षा एवं तकनीक विभाग भी लगा चुके हैं फटकार

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झारखंड उच्च शिक्षा एवं तकनीक विभाग ने सरला बिरला यूनिवर्सिटी को 58 एकड़ भूमि में जल्द से जल्द निमार्ण कार्य आरंभ करने को कहा. साथ ही यह भी कहा कि विश्वविद्यालय जल्द ही यूजीसी के अनुरूप कोर्स को आरंभ करे. और यूनिवर्सिटी में कुलपति एवं अन्य अधिकारियों बहाली की जाए.
वाईबीएन यूनिवर्सिटी को विभाग ने फटकार लगाते हुये कहा कि विश्वविद्यालय को ऑफ कैंपस में ना चलाया जाए. सारे कोर्स को एक ही कैंपस में चलाएं. कुलपति के साथ ही अन्य विभागों में फैकल्टी की बहाली शीध्र करें उसके बाद ही कोर्स में नामांकन लें.

यूजीसी से अनुरूप नहीं चल रहे निजी विश्वविद्यालय

वाईबीएन और सरला बिरला यूनिवर्सिटी ने कहा कहा कि यूसीजी के अनुसार प्राइवेट यूनिवर्सिटी को किसी भी विभाग में नामांकन लेने का अधिकार है उसके लिए किसी से मान्यता लेने की आवश्यता नहीं है. प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिना कुलपति एवं रजिस्ट्रार के चल सकता है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि यूसीजी के नियमों का हवाला देने वाली प्राइवेट यूनिवर्सिटी, यूजीसी के नियमों को दरकिनार कर झारखंड में सुचारू रूप से कैसे चल रहे हैं. सरकार एवं विभाग की ओर से कार्यवाही के नाम पर केवल चेतावनी देकर इन्हें छोड़ दियाा जाता है. प्राइवेट यूनिवर्सिटी यूजीसी के नियमों का हवाला तो दे रही हैं लेकिन ये यूजीसी के नियमों का पालन सुचारु रूप से नहीं कर रही हैं.

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