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सरदार सिंह ने हॉकी को कहा ‘गुड बाय’, अधूरा छोड़ा ‘2020 टोक्‍यो ओलंपिक’ का सपना

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New Delhi: भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान सरदार सिंह हॉकी को गुड बाय कह दिया है. उन्‍होंने 12 साल पहले इंटरनेशनल कॅरियर की शुरूआत की थी. वह जिस खामोशी के साथ अपने हॉकी को कॅरियर बनाकर एंट्री की थी, उसी अंदाज में चुपचाप से उन्‍होंने विदाई ले ली.

सरदार सिंह की 12 साल के इंटरनेशनल हॉकी कॅरियर की बात करें, तो उन्‍होंने इस अवधि में हॉकी के लिए एक ब्रांड की तरह ‘स्‍टार प्‍लेयर’ बन कर उभरे. इंडियन हाकी का चेहरा होने के साथ-साथ यह करिश्माई मिडफील्डर वैश्विक स्टार भी था.

सरदार का सपना 2020 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने का था. लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था. एशियाई खेलों में टीम के खराब प्रदर्शन के बाद 12 साल के इस हॉकी खिलाड़ी ने अलविदा कहने का मन बना दिया.

हॉकी जानकारों का मानना है सरदार को इन खेलों में खराब प्रदर्शन के बाद बलि का बकरा बनाया गया और उन्हें संन्यास लेने पर मजबूर किया गया. लेकिन इस खिलाड़ी ने माना कि सेमीफाइनल में मलेशिया से मिली हार ने उन्हें संन्यास के बारे में सोचने पर मजबूर किया.

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सरदार सिंह ने कहा ‘अभी कुछ साल और खेल सकता था’

सरदार सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि ‘‘ मैं खेलना जारी रखना चाहता था और मुझे लगता है कि मैं अभी कुछ साल और खेल सकता था. लेकिन, मैं मलेशिया से मिली हार को पचा नहीं पा रहा हूं. उस हार के बाद मैं कई दिनों तक सो नहीं पाया. इसके बाद ही मैंने संन्यास के बारे में सोचना शुरू किया.’’

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सरदार ने हॉकी में इंडिया को दिलाए कई मेडल

सरदार ने इस खेल को किसी मंझे हुए खिलाड़ी की तरह खेला और अपनी कॅरियर में कई खिताब जीते. उनकी मौजूदगी में टीम ने इंचियोन एशियाई खेलों (2014) में गोल्‍ड के अलावा 2010 और 2018 में कांस्य पदक हासिल किया. उन्होंने दो बार राष्ट्रमंडल खेलों का रजत पदक हासिल किया. इस साल ब्रेडा में चैम्पियंस ट्रॉफी में टीम ने ऐतिहासिक रजत पदक हासिल किया. इसके अलावा टीम ने उनकी मौजूदगी में एशिया कप का खिताब भी दो बार अपने नाम किया.

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8 सालों तक टीम इंडिया के कप्‍तान रहे

वह 2008 में टीम के कप्तान बने और 8 सालों तक टीम की बागडोर संभालने के बाद 2016 में उन्होंने कप्तानी की जिम्मेदारी पीआर श्रीजेश को सौंपी. सबसे कम उम्र में टीम की कमान संभालने वाले सरदार सिंह ने 350 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैचों में देश का प्रतिनिधित्व किया.

फिटनेस के मामले में भी उनका कोई जवाब नहीं था और वह टीम के सबसे फिट खिलाड़ियों में एक थे. एशियाई खेलों से पहले यो यो टेस्ट में उन्होंने अपने पिछले रिकार्ड में सुधार करते हुए 21.4 अंक हासिल किये थे जो क्रिकेट कप्तान विराट कोहली से भी बेहतर था

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