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Saraikela Alert : इन सड़कों पर गुजरें जरा संभलकर, मंजि‍ल से पहले खींच ले जाती है मौत, भरोसा नहीं हो तो ये आंकड़े देख लें

Raj kishor, Jamshedpur : टाटा-कांड्रा रोड समेत सरायकेला की तमाम मुख्य सड़कें खूनी साबित हो रही हैं. इसमें चौका-कांड्रा और राजनगर मेन रोड भी शामिल है. आंकड़ों पर गौर करें तो सरायकेला में जनवरी 2021 से 2022 तक जिले में 215 सड़क हादसे हुये. इसमें 168 लोगों की जान चली गयी थी. उसके बाद भी मई महीने तक आये दिन सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा रही है. ताजा घटना बुधवार की तड़के ही घटी. टाटा-कांड्रा मार्ग पर गम्हरिया थाना क्षेत्र में टायो गेट स्थित एसबीआई बैंक के पास बाइक संख्या जेएच 10 सीजी 2845 पर सवार युवक डिवाइडर से जा टकराया. इससे युवक की घटना स्थल पर ही मौत हो गई. फिलहाल युवक की शिनाख्त नहीं हो पायी है, हालांकि बाइक विशाल कुमार मिश्रा के नाम से रजिस्टर्ड बताया जा रहा है.

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आगे पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है. इससे पहले भी खासकर, टाटा-कांड्रा-सरायकेला और चौका-कांड्रा-सरायकेला रोड पर हाल के महीनों में कई हादसों में लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. इस लिहाज से 15 महीने में जिले में मरनेवालों की संख्या दो सौ छूने के करीब आ पहुंचा है. बावजूद इसके सड़क पर बेतरतीब ढ़ंग से चलती छोटी-बड़ी गाड़ियों की संख्या और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार नहीं होने की वजह से आगे भी हादसों का खतरा बना हुआ है.
सड़क बनने के बाद भी कम नहीं हुये हादसे
एक समय ऐसा था जब टाटा-कांड्रा-सरायकेला रोड की जर्जर हालत थी. उस दौरान भी आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती थी, जिसमें कइयों की जान जाती थी तो कई लोग गंभीर रुप से घायल हो जाते थे. उस दौरान सारी दुर्घटनाओं के लिए जर्जर सड़क को ही जिम्मेदार ठहाराया जाता था. फिर हालत यह हुई कि आदित्यपुर की सामाजिक संस्था जनकल्याण मोर्चा के बैनर तले स्थानीय लोगों ने लंबे समय तक आंदोलन किया. यहां तक कि कानूनी लड़ाई भी लड़ी गई. नतीजन आदित्यपुर-टाटा-कांड्रा फोरलेन सड़क का निर्माण हुआ. बावजूद इसके जिले में सड़क दुर्घटनाओं में कमी नहीं आई है.
सड़क पर बेतरतीब ढ़ंग से वाहन खड़ा करना भी है बड़ी परेशानी
इस बीच जिले भर में मेन रोड पर बेतरतीब ढ़ंग से वाहन खड़ा करना भी भारी परेशानी का कारण बना हुआ है. खासकर, सड़क किनारे बने होटलों और ढ़ाबों के सामने लाइन से भारी वाहन खड़े कर दिये जाते हैं. इसके अलावा आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में भी कुछ इसी तरह सड़क किनारे जहां-तहां बड़े वाहनों का लगा रहना भी आम बात है. यह कितना दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए बेहद घातक साबित होते आया है. आंकड़ों की ही बात करें तो जिले की सड़कों पर खड़े वाहनों में ठोकर मारने से बीते 14 महीने में 95 लोगों की मौत हो चुकी है. इस तरह की अधिकांश दुर्घटनाएं टाटा-कांड्रा के अलावा सरायकेला-कांड्रा, चौका-कांड्रा और राजनगर-हाता रोड पर हुई है.
जिला प्रशासन का प्रयास साबित हो रहा है नाकाफी
ऐसा भी नहीं है कि इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कुछ उपाय नहीं किये हैं. यहां तक कि ट्रैफिक पुलिस और सड़क सुरक्षा समिति भी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रयासरत है. इसे लेकर जिलेभर में 32 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किये हैं. ताकि लोग वाहन चलाते वक्त सतर्क रहें. फिर भी सड़क हादसों पर अंकुश नहीं लगना कहीं न कहीं साबित करता है कि जिला प्रशासन के अब तक के सारे उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं.
वाहन चालकों को भी जागरुक होने की जरूरत
हालांकि, इसमें भी शक नहीं है कि कई दुर्घटनाओं के लिए वाहन चालकों की लापरवाही भी जिम्मेदार है. वहीं, ड्रंक एंड ड्राइव भी कई हादसों का मुख्य कारण साबित होता है. ऐसे में यातायात व्यवस्था को बनाये रखने के प्रति वाहन चालकों में भी जागरुकता जरूरी है. प्रशासन को भी जिले भर में बड़े पैमाने पर इस तरह का जागरुकता अभियान चलाने की जरूरत है. तब जाकर ही जिले में आये दिन हो रहे सड़क हादसों पर अंकुश लगाया जा सकता है.

MDLM

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