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कागजों में ही सिमटा संजय सेठ का निर्देश, नाराज हेमंत ने कहा- और छोटा न हो बड़ा तालाब

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विवेकानंद की जंयती पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने ली तालाब की वास्तविक जानकारी

तत्कालीन  नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने  किया था शिलान्यास, सौंदर्यीकरण योजना का काम अधूरा होने से तालाब की स्थिति हो रही खराब

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Ranchi :  राजधानी के बीचो बीच बड़ा तालाब की सिकुड़ती स्थिति और गंदे पानी को देख मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने काफी नाराजगी जतायी है. स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर प्रतिमा का माल्यापर्ण करने रविवार को यहां पहुंचे हेमंत ने देखा कि तालाब काफी सिकुड़ता जा रहा है. उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि आखिर तालाब में दिख रहा गंदा पानी कहां से आ रहा है.

वहीं तालाब के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था पर मिली शिकायत पर उन्होंने चिंता जतायी. इसपर नगर आयुक्त मनोज कुमार ने तालाब की वास्तविक स्थिति और यहां बनने वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की जानकारी मुख्यमंत्री को दी. साथ ही रांची एसडीओ लोकेश मिश्रा ने भी मुख्यमंत्री को सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने का आश्वासन भी दिया.

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दो बार निरीक्षण को पहुंचे थे सांसद

ऐसा नहीं है कि तालाब के गंदे पानी को पहली बार नये मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ही नाराजगी जतायी है. पहली बार रांची के सांसद बने संजय सेठ पिछले वर्ष दो बार (7 जून और 28 अगस्त को ) तालाब का निरीक्षण किया था. दोनों ही निरीक्षण में उन्होंने सिकुड़ते तालाब और तालाब में आ रहे गंदे पानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा किया था.

कागजों में ही सिमटा संजय सेठ का निर्देश, नाराज हेमंत ने कहा - और छोटा न हो बड़ा तालाब
7 जून को तालाब पहुंचे थे संजय सेठ

7 जून को किये गये निरीक्षण में सांसद के साथ मेयर आशा लकड़ा और 28 जून के निरीक्षण के दौरान डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय भी थे. पहले के निरीक्षण में भी सांसद ने तालाब में गिर रहे गंदे पानी को लेकर चिंता जतायी थी.

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कागजों पर ही सिमटा रह गया सांसद संजय सेठ का निर्देश

वास्तविक हकीकत यह है कि सांसद के दिये निर्देश केवल कागजों पर ही सिमट कर रह गया. न तो उन्होंने इसपर कोई पहल ही की और न ही कोई जानकारी लेनी चाही. पहले निरीक्षण में सांसद ने रात्रि बाजार लगाकर सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने और दूसरे निरीक्षण में अप्रत्यक्ष रूप से तत्कालीन नगर विकास मंत्री सीपी सिंह पर ही सवाल खड़ा किया था.

28 अगस्त को तालाब के निरीक्षण को पहुंचे थे संजय सेठ
28 अगस्त को तालाब के निरीक्षण को पहुंचे थे बीजेपी से रांची सांसद संजय सेठ

विभाग की एजेंसी जुडको की कार्यशैली को लेकर संजय सेठ ने कहा था कि जुडको की सौंदर्यीकरण योजना से रांची की जनता परेशान है. ऊपर से निगम के ठेकेदार बड़ा तालाब को बर्बाद कर रहे हैं. लेकिन फिर भी सांसद ने इसे रोकने की कोई पहल तक नहीं की.

दूसरे फेज में बनने वाले एसटीपी से तालाब की स्थिति सुधारने का दावा

तालाब में दिख रहे गंदे पानी से नाराज होकर मुख्यमंत्री ने नगर आयुक्त को कहा कि जब पानी ही साफ नहीं रहेगा, तो तालाब का कोई मतलब रहेगा ही नहीं. मुख्यमंत्री ने पूछा कि आखिर यह गंदा पानी कहां से आ रहा है, तो नगर आयुक्त ने बताया कि अपर बाजार और सेवा सदन हॉस्पिटल का पूरा पानी एक बड़े नाले से तालाब में गिरता है.

इसपर भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन काफी नाराज दिखे. उन्होंने नगर आयुक्त से पानी साफ करने की निगम के तरफ से जानकारी ली, तो उन्हें बताया गया कि सेवा सदन के पास एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जाएगा.

कागजों में ही सिमटा संजय सेठ का निर्देश, नाराज हेमंत ने कहा - और छोटा न हो बड़ा तालाब
जांच में पता चला, चारों और बने पाथे का काम अधूरा, तालाब सिकुड़ने का एक कारण यह भी

इसके लिए हॉस्पिटल के पास की पार्किंग जमीन को चिंह्रित किया गया है. सौंदर्यीकरण योजना के फेज टू के तहत प्लांट बनने की बात नगर आयुक्त ने की. गौरतलब है कि सौंदर्यीकरण योजना की दूसरे फेज के लिए 7.46 करोड़ रूपये की प्रशासनिक स्वीकृत विभाग के तरफ से मिल चुकी है. राशि से एसटीपी, तालाब के चारों ओर पाथवे, ग्रिल लगाने, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे कामों को किया जाना है.

जांच में पता चला, “सिकुड़ता जा रहा है तालाब, पाथवे ने छोटा किया तालाब”

तालाब के निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने पूछा कि पहले तालाब काफी बड़ा था, लेकिन यह अब सिकुड़ता जा रहा है. इसपर नगर आयुक्त ने बताया कि रोड बनने के क्रम में यहां कई मैटेरियल को रखा गया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इससे भी नाराज दिखे.

कागजों में ही सिमटा संजय सेठ का निर्देश, नाराज हेमंत ने कहा - और छोटा न हो बड़ा तालाब
बड़ा तालाब के चारों ओर फैला कचरा और वाहन को धोते लोग

उन्होंने कहा कि मतबल साफ है कि सारा कचरा तालाब में ही डंप किया जा रहा है. जब न्यूजविंग ने तालाब के पास जाकर स्थिति का निरीक्षण किया, तो तालाब के सौंदर्यीकरण के काम को लेकर पूर्ववर्ती सरकार में नगर विकास विभाग के तरफ से पाथ वे बनाया गया है. काम अभी तक काफी अधूरा है. कचरे का अंबार लगा है. आसपास के लोग अपने वाहनों को धोने के साथ कचरा फेंककर तालाब को छोटा कर दिया गया.

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