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नियम की धज्जियां उड़ा रही साईनाथ यूनिवर्सिटी, बिना कुलपति के बांटती है डिग्रियां

यूनिवर्सिटी की स्थापना के वक्त से ही नहीं है कोई कुलपति

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Satyaprakash Prasad

Ranchi : झारखंड साईनाथ यूनिवर्सिटी वर्ष 2013 में अस्तित्व में आयी. ओरमांझी के चंदवे-कुचू रोड में इसका कैंपस है. स्थापना होने के बाद से अब तक साईनाथ यूनिवर्सिटी में कुलपति के पद पर किसी को भी नियुक्त नहीं किया गया. इसके बावजूद यूनिवर्सिटी द्वारा वर्ष 2014 से डिग्रियां बांटने का कार्य किया जा रहा है. ज्ञात हो कि किसी भी यूनिवर्सिटी की डिग्री तभी अवार्डेड होती है, जब उस पर उस यूनिवर्सिटी के कुलपति के हस्ताक्षर हों. कुलपति के नहीं रहने पर कुलाधिपति से सहमति लेने के बाद ही यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स के बीच डिग्रियों का वितरण कर सकती है. ऐसे में झारखंड साईनाथ यूनिवर्सिटी शिक्षा के क्षेत्र में अपने आपमें एक मिसाल है, जिसने अब तक जितनी भी डिग्रियां बांटी हैं, उनमें कुलपति या कुलाधिपति के हस्ताक्षर या सहमति नहीं हैं. यही नहीं, स्थापनाकाल से ही बिना कुलपति वाली इस यूनिवर्सिटी में कुलपति का सारा काम और दायित्व प्रतिकुलपति (प्रोवीसी) एसपी अग्रवाल संभाले हुए हैं, जो यूनिवर्सिटी के प्रोपराइटर भी हैं.

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क्या है नियम

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यूजीसी के नियमों के अनुसार, कोई भी यूनिवर्सिटी अपनी स्थापना के बाद अपनी डिग्रियों और एकेडमिक्स के लिए सरकार से ऑर्डिनेंस पास कराती है. इस ऑर्डिनेंस के माध्यम से वह सरकार से अपने एकेडमिक विषयों की मान्यता और डिग्रियों के वितरण हेतु विधानसभा में अध्यादेश पास कराती है. इसके माध्यम से यूनिवर्सिटी डिग्री प्रदान करने के लिए सरकार एवं यूजीसी से सहमति प्राप्त करती है. सहमति मिलने के बाद इस पर कुलपति या कुलाधिपति के हस्ताक्षर होने के बाद सभी डिग्रियां कॉन्वोकेशन के माध्यम से स्टूडेंट्स के बीच बांटी जाती हैं. तभी इन डिग्रियों को अवार्डेड माना जाता है.

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रांची यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति सह शिक्षाविद डॉ एए खान का कहना है कि किसी भी यूनिवर्सिटी की डिग्रियां तभी मान्य होती हैं, जब उस पर कुलपति या कुलाधिपति की सहमति एवं हस्ताक्षर हों. बिना कुलपति या कुलाधिपति की सहमति के डिग्रियां मान्य नहीं हो सकती हैं.

-डॉ एए खान, शिक्षाविद सह पूर्व कुलपति, रांची यूनिवर्सिटी

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