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साहेबगंजः सरकार मुआवजा दे, नहीं तो इच्छामृत्यु की इजाजत दे

ख़ासमहाल ज़मीन के लीजधारियों के वंशजों ने की सरकार से मांग

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  • इंजीयरिंग कॉलेज के लिए 36 ख़ासमहाल लीजधारियों को जिला प्रशासन ने भेजा है जमीन अधिग्रहण का नोटिस
  • जिला मुख्यालय की 60 प्रतिशत आबादी खासमहाल जमीन पर बसी है

Nirbhay Ojha

Sahebganj: सरकार हमारी जमीन को खासमहाल का नाम देकर अधिग्रहण करेगी तो हम भुखमरी के कगार पर आ जायेंगे, हम सभी रैयतों के वंशजों को सरकार जमीन के बदले मुआवजा दे नहीं तो हम सभी को सपरिवार इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दे. यह कहना है साहेबगंज के उन रैयतों के वंशजों का, जिनकी जमीन सरकार इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए अधिग्रहित कर रही है. खासमहाल उन्मूलन समिति के बैनर तले लीजधारियों ने तालबन्ना घोरमारा पुल पर प्रेस कॉन्फ्रेस किया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित ख़ासमहल जमीन के लीजधारियों के वंशज किसान भोला यादव, जितेंद्र यादव, गौरव यादव, उमेश चंद्र लाल, बिनेश्वरी लाल, वीरबहादुर सिंह, संग्राम सिंह, राजेंद्र प्रसाद, उदय कुमार साह, बिजय साह, पवन कुमार साह, लाल बाबू मोदी, बिनोद मंडल, रामभवन यादव, भिखारी यादव, लालमोहन तिवारी आदि ने सरकार से कहा है कि यदि मुआवजा नहीं मिला तो सामूहिक इच्छामृत्यु की इजाजत दे दे.

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कमीशन का है खेल

प्रेस को संबोधित करते हुए नगर पर्षद के पूर्व टेक्सा दरोगा (इन्हें भी नोटिस भेजा ग्या है) संग्राम सिंह ने कहा कि खासमहाल ज़मीन क़ो सरकार बड़ी-बड़ी कम्पनी क़ो कमीशन के चक्कर में देना चाह रही है. सरकार मुआवजा देने से भी बचना चाहती है. उन्होंने कहा कि विकास योजना से परहेज नहीं हैं, सरकार इंजीनियरिंग कॉलेज बनाये, इ़सके लिए हम सब साथ हैं पर बसोडी ज़मीन व कृषि योग्य भूमी क़ो उजाड़ कर नहीं. उन्होंने बताया की 1961 तक जिले की खासमहाल की जमीन रजिस्ट्री होती थी, मगर अब वर्तमान सरकार लीज भी नहीं कर रही है, हमें नोटिस भेज दिया.

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खासमहाल कानून से मुक्त कराया जाये

समाज सेवी श्याम सुंदर पोद्दार ने बताया की मीडिया व पत्राचार के द्वारा जिला प्रशासन और राज्य सरकार को किसानों का निर्णय बताया जायेगा. अगली बैठक में समिति के द्वारा निर्णय लिया जायेगा. सरकार के वरीय अधिकारियों को भी पत्र भेजा जायेगा. समिति सरकार से मांग करती है कि जल्द से जल्द साहेबगंज को खासमहाल के कानून से मुक्त किया जाये.समिति के एम तिवारी ने कहा कि लीजधारियों के दस्तावेज के आधार पर यह प्रतीत होता है कि साहेबगंज शहर खासमहाल नहीं है इसलिए सरकार अविलम्ब नोटिस वापस ले, नहीं तो किसान और रैयत के हित में आंदोलन तेज किया जायेगा.

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बड़ा राजनितक मुद्दा है

ज़िले की 60% अबादी ख़ासमहाल ज़मीन पर बसी है. साहेबगंज ज़िले में खासमहल एक जबरदस्त रजनीतिक मुद्दा रहा है. इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं की जिले में तीन खासमहाल उन्मूलन समिति कार्यरत हैं लेकिन खासमहाल मुद्दा जस का तस बना हुआ है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि जब चुनाव होता है, राजनीति पार्टियों के चुनावी घोषणा पत्र में ज़िले को खासमहाल से मुक्त कराने का वायदा किया जाता है.

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