न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

Ranchi Nomination: उम्मीदवारी में सेठ पर भारी सहाय, लेकिन मोरहाबादी ने हरमू मैदान को दी है मात

3,611

Akshay Kumar Jha

mi banner add

Ranchi: ऐसा राजनीतिक अखाड़ा कम ही देखने को मिलता है. जैसा आज रांची के दो बड़े मैदानों में देखने को मिला. मौरहाबादी और हरमू मैदान आज यह तय करने में जुटा था कि आखिर रांची लोकसभा सीट से लोकतंत्र के मंदिर यानि संसद में कौन जायेगा.

आज से पहले वन साइडेड होता गेम अब कांटे की टक्कर वाला लग रहा है. दोनों पार्टियों ने मिलकर पूरी ताकत झोंक दी है.

बीजेपी ने अपना दमखम मोरहाबादी में दिखाया तो महागठबंधन ने अपना जोर हरमू मैदान में आजमाया. खूब ढोल बजे. लाउंड स्पीकर फाड़-फाड़ कर जयकारे लगा रहा था.

कहीं मोदी तो कहीं राहुल गांधी पर रचे गये चुनावी गाने बज रहे थे. सुबह 11 बजे तक मोरहाबादी में कुर्सियां लग चुकी थीं, तो हरमू मैदान भी 12 बजे तक सज चुका था.

इसे भी पढ़ेंः शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सपा में शामिल, राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने की संभावना

भगवा हो गया मोरहाबादी मैदान

खाली पड़ीं कुर्सियां जब धीरे-धीरे भरने लगीं तो कुछ पत्रकारों को खबर का एंगल बदलना पड़ गया. बीजेपी के उम्मीदवार संजय सेठ की तस्वीर वाली तख्ती बांटने में पार्टी की तरफ से कोई कंजूसी नहीं की जा रही थी.

बाइक में लगने वाले स्टीकर, शर्ट में लगने वाला कमल फूल. बीजेपी का भगवा रंग वाला पट्टा और तमाम चीजों पर कोई रोक नहीं थी. हजारों रुपये की चुनावी सामग्री कार्यकर्ताओं के बीच जरूर बंटी.

हद तो तब हो गयी जब एक काउंटर पर पहुंचा. उस काउंटर पर हर कार्यकर्ता को एक पानी की बोतल दी जा रही थी. कहा जा रहा था कि लाइन से आयें, सबको पानी की बोतल मिलेगी.

पानी इतना था कि मारा-मारी भी नहीं हुई. धूप ना लगे इसलिए शामियाने के अंदर सारी कुर्सी सजी थी. गला तर करने के लिए पानी और छांव में कुर्सी में बैठने का आनंद खास तरीके के ढोल पार्टी को सुनने के क्या खूब आ रहा था. बड़ा सा मंच और करीब 2500 से ज्यादा कुर्सियां मोरहाबादी की शोभा क्या खूब बढ़ा रही थीं.

ऐसा लगा रहा था कि जैसे कोई राष्ट्रीय स्तर का दिग्गज मोरहाबादी मैदान आने वाला है. खास अंदाज में जत्थे के जत्था बाइक सवार हॉर्न बजा-बजा कर दाखिल हो रहे थे. पूरा मोरहाबादी मैदान दो पहिया और फोर व्हीलर से भरा नजर आ रहा था. मंच पर अनुशासित ढंग से बड़े नेता विराजमान थे.

मंच का संचालन भी तरीके से हुआ. आखिर में जब मौजूद सभी लोगों को खाना खाने का पता बताया गया. चेहरे पर कार्यकर्ताओं की खुशी साफ झलकी.

इसे भी पढ़ेंः रांची लोकसभा सीटः संजय सेठ, सुबोधकांत और रामटहल ने भरा नामांकन

हरमू में रंग तो था लेकिन थोड़ा फीका

हरमू मैदान में कई तरह के झंडे लगे थे. जेएमएम, जेवीएम और कांग्रेस के झंड़े प्रमुखता से देखे जा रहे थे. मंच पर तमाम पार्टियों के नेता भी मौजूद थे. हालांकि हेमंत सोरेन किसी कानूनी कार्यवाही की वजह से दुमका में थे और बाबूलाल अपने लोकसभा में व्यस्त थे.

इनके अलावा राजेंद्र सिंह, मन्नान मल्लिक सरीखे सभी नेता मौजूद थे. कुर्सियों की बात की जाये, तो उम्मीदवार के आने से पहले तक सारी भरी हुईं थीं. लेकिन मंच पर अनुशासन मोरहाबादी तरीके का नहीं दिखा. पानी की बोतल बड़े नेताओं के हाथ में तो थी.

लेकिन सभी कार्यकर्ताओं के हाथ में नहीं. हां लड्डु जरूर बंटे. लेकिन जैसे ही सुबोधकांत सहाय मैदान में अपने लाव-लश्कर के साथ दाखिल हुए. पता नहीं किसके आदेश से कार्यकर्ताओं को खाना परोसा जाने लगा.

श्री सहाय के आते ही मंच की व्यवस्था इतनी खराब हो गयी कि खुद उम्मीदवार को मंच के संचालन का जिम्मा लेना पड़ा.

श्री सहाय ने खाना खाने गये कार्यकार्यताओं को समझाने की कोशिश की कि खाना खाकर वापस कुर्सी पर लौट आना है. लेकिन पेट भरने के बाद फिर से सारी कुर्सी भर जाए ऐसा थोड़ी न होता है.

कुर्सियों की संख्या की बात करें तो निश्चित तौर पर महागठबंधन इस रेस में एनडीए से पीछे था. मोरहाबादी से भीड़ भी कम थी. लेकिन इन बातों को जीत या हार का तकाजा नहीं माना जा सकता. असली फाइट छह मई को होनी है.

सीपी सिंह ने पूछा “गरमाइल हैं कि ठंडा”

मोरहाबादी मैदान में सबसे आखिरी में मंत्री सीपी सिंह ने माइक थामा. उन्होंने माइक थामते ही कहा कि आप लोग गरमाइल हैं कि ठंडा. अगर गरमाइल हैं तो ही भाषण दूंगा वो भी सिर्फ 12 मिनट. और अगर ठंडाइल हैं तो कुछ नहीं बोलूंगा.

शायरी भरी अंदाज में उन्होंने किसी समुदाय का नाम ना लेते हुए कहा कि “कहीं नीला, कहीं पीला तो कहीं लाल दिखता है. लेकिन इस भगवा को रोक ले कौन माई का लाल है”. कहा कि भगवा रंग हजारों साल से हमारी विरासत है. भगवा वीरता का प्रतीक है.

बस देश भर में दो ही विचारधारा हैं. राष्ट्रवाद और राष्ट्रविरोधी. किसे चुनना है, यह आपको तय करना है. कहा कि जब-जब पाकिस्तान पर हमला होता है वो वाले रोते हैं. कहा जाता है कि मैडम रात भर सो नहीं पायीं.

आखिर में उन्होंने तीन तरह के नारे लगवाये. उनमें से चौंकाने वाला नारा था “मसखरा चोर है”. कहा कि मतलब बताने की जरूरत नहीं, लोग समझ जायेंगे.

इसे भी पढ़ेंः गिरिडीह लोकसभा चुनाव : पहले दिन एक भी नामांंकन नहीं, छह प्रत्याशियों ने खरीदा पर्चा

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: