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सदर अस्पताल में मरीज के परिजनों ने किया हंगामा, डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप

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Ranchi : सदर अस्पताल में शनिवार को एक मरीज के परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया. परिजनों का आरोप था कि डॉक्टर ने लापरवाही करते हुए बिना फ्रैक्चर के ही 14 वर्षीय रोहित चौधरी के पैर में प्लास्टर कर दिया, जिसके कारण पैर में इन्फेक्शन हो गया. अगर समय पर पता नहीं चलता, तो बच्चे का पैर खराब हो सकता था. इसको लेकर परिजनों ने जमकर हंगामा किया. डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफिस में परिजन जमे रहे. डॉक्टर पर कार्रवाई और बच्चे का निजी अस्पताल में इलाज कराने की मांग करते रहे. इसके बाद बच्चे को घर से लाया गया. डीएस और डॉक्टरों की टीम ने बच्चे के पैर में लगी पट्टी खोलकर जांच की. इसके बाद उसे वार्ड में भेज दिया गया. इसके बाद भी परिजन शांत नहीं हुए.

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सदर अस्पताल में मरीज के परिजनों ने किया हंगामा, डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप
मरीज रोहित.

बच्चे के इलाज में मदद करेगा अस्पताल प्रबंधन : एके झा

मौके पर लोअर बाजार थाना की पुलिस भी पहुंची और परिजनों को शांत करने की कोशिश की. लेकिन, कोई फायदा नहीं हुआ. इसके बाद डीएस एके झा ने परिजनों से कहा कि बच्चे के इलाज में हर प्रकार से मदद की जायेगी. इलाज के लिए किसी भी चीज की जरूरत पड़ेगी, उसकी व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन करेगा. इसके बाद परिजन शांत हुए. इस दौरान बच्चे की मां रोते-रोते कई बार बेहोश हो जा रही थी.

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क्या है मामला

लाइन टैंक निवासी पिंकी देवी ने बताया कि उनके 14 वर्षीय बेटे रोहित चौधरी के पैर में चोट आयी थी. 30 जून को सदर अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया, जिसे डॉ जेई तिग्गा ने देखा और प्लास्टर करने की बात कही. प्लास्टर होने के 10 दिन के बाद बच्चे के पैर से लाल और पीले रंग का पीब जैसा द्रव निकलने लगा. इसके बाद फिर से बच्चे को इमरजेंसी में लेकर गये, लेकिन वहां यह कहकर भगा दिया गया कि डॉक्टर नहीं हैं, अगले दिन आइये. बच्चे को दर्द ज्यादा होने लगा, तो सेवा सदन ले जाया गया. वहां से बच्चे को सृजन सर्जरी सेंटर ले जाया गया. डॉक्टर ने बताया कि पैर तो ठीक है, टूटा नहीं है. इसके बाद बच्चे का प्लास्टर काटा गया और दवा देकर पट्टी की गयी.

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इलाज में नहीं की लापरवाही : डॉ जेई तिग्गा

इधर, सदर अस्पताल के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ जेई तिग्गा ने कहा कि जब बच्चे को लाया गया था, उसके एंकल ज्वॉइंट में दर्द था. क्लिनिकल एग्जामिन करने पर पता चला लिगमेंट टीयर हुआ है. जोड़ को स्थिर करने के लिए घुटना के नीचे प्लास्टर किया गया और दवा दी गयी. इसके बाद मैं बाहर चला गया. उसके बाद परिजन फिर से आये, लेकिन उनके साथ कैसा व्यवहार किया गया, यह नहीं कह सकते. परिजन जैसा बता रहे हैं, उसके मुताबिक बच्चे को दर्द हो रहा था. ऐसे में प्लास्टर निकाल देना चाहिए था. आने के बाद आज देखा, तो पता चला कि कंपार्टमेंटल सिंड्रोम हो गया है. प्लास्टर को हटाकर पैर की ड्रेसिंग की गयी है.

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