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साड्डा हक मोरहाबादी तक!

Ranchi: साड्डा हक. यानी, हमारा हक. हक आसानी से न तो मिलता है, न मिलेगा. हक के लिए अड़ना पड़ता है. हक के लिए लड़ना पड़ता है. हक की लड़ाई अगर झारखंड में लड़नी हो तो आपको मोरहाबादी मैदान आना पड़ेगा.

रांची का यह मैदान इन दिनों हक की लड़ाई का मरकज बन गया है. यहां अलग-अलग समूहों में इकठ्ठा हुए लोग अपने-अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं. जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारों से गूंजता मैदान कभी युद्धस्थल में तब्दील हो जाता है, तो कभी छावनी बन जाता है. हर किसी को यकीन है कि अगर मोरहाबादी की लड़ाई में फतह हासिल हो गयी तो हक मिलकर रहेगा. हर किसी को उम्मीद है कि यहां से लगायी गयी हक की हर आवाज सरकार के कानों तक पहुंचेगी.

इसीलिए तो अपना-अपना हक मांग रहे युवाओं के चार अलग-अलग समूहों का यहां जमघट लगा हुआ है. ये सभी यहां आमरण अनशन पर बैठे हैं. एक समूह के कुछ लोगों को जहां अनशन के कारण स्लाइन चढ़ने लगी है तो दूसरी ओर एक समूह आत्मदाह करने की बात कर रहा है. पर सबको उम्मीद है कि ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान से उनके अच्छे भविष्य का भी रास्ता बनेगा.

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धरना, अनशन, प्रदर्शन…

साड्डा हक मोरहाबादी तक!यहां एक तरफ पंचायत सचिव के सफल अभ्यर्थी अपनी मेधा सूची जारी कराने की मांग को लेकर धरने पर हैं. दूसरी तरफ 2016 में जेटेट पास अभ्यर्थी भी प्राथमिक, उच्च शिक्षक बहाली प्रकिया जल्द से जल्द चालू करने की मांग सरकार से कर रहे हैं. वहीं, होम गार्ड के नवचयनित युवा बुनियादी प्रशिक्षण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर हैं. इधर झारखंड सशस्त्र पुलिस के जैप 2 से 9 तक के लिए 1020 शेष रिक्त पदों के लिये दूसरी मेधा सुची तैयार करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर हैं.

इन सभी का कहना है कि इनकी मांगें जबतक पूरी नहीं होगी वे धरना पर ही बैठे रहेंगे. अब देखना होगा कि यह मोरहाबादी मैदान उनकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है.

बापू वाटिका के सामने अनोखा नजारा

साड्डा हक मोरहाबादी तक!बापू वाटिका के ठीक सामने दो टेंट लगे हैं. बीच में बापू की लंबी और बड़ी सी प्रतिमा है. दोनों टेंटों में सैंकड़ों अभ्यर्थी हैं. हजार के आसपास भी हो सकते हैं. सभी लोग आमरण अनशन पर हैं. ये सरकार से अपना हक मांग कर रहे हैं. मांगें भी क्यों नहीं, उन्होंने सरकार द्वारा आयोजित करायी गयी परीक्षा पास की है.

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पहले टेंट में जेटेट पास अभ्यर्थी हैं. ये 8 अक्टूबर से अनशन पर हैं. इस टेंट में पांच ऐसे लोग हैं जिन्हें स्लाइन चढ़ रहा है. ये सभी शुरुआत के दिनों से भूखे हैं. साथी पैसे मिलाकर इनका इलाज करा रहे हैं.

इनकी मांग है कि 2016 में सफल जेटेट अभ्यर्थियों की प्राथमिक, उच्च शिक्षक बहाली प्रकिया जल्द से जल्द चालू की जाये. इनलोगों का कहना है कि चार साल इनके पास किये हुए हो गये. एक और साल इनके सर्टिफिकेट की वैलिडिटी है.

इनका कहना है कि जब तक सरकार इनकी मांगों पर विचार नहीं करती है ये अनशन पर बैठे रहेंगे. इनके अध्यक्ष का कहना है, “सरकार की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला है. प्रशासन हमें बुधवार को बलपूर्वक हटाना चाह रहा था. हमने अपील की है कि जितनी भी मेडिकल फैसिलिटी मुहैया करानी है हमें यहीं करायें. अगर सरकार बलपूर्वक हटायेंगे तो मैं सुसाइड कर लूंगा और इसके लिए सरकार जिम्मेवार होगी.

वहीं गांधी प्रतिमा के दूसरे तरफ पंचायत सचिव परीक्षा के सफल अभ्यर्थी हैं. वे 11 अक्टूबर से आमरण अनशन पर बैठे हैं. युवाओं के हाथ में पोस्टर बैनर है जिसमें लिखा है- ‘हम किसी से भीख नहीं मांगते, मांगते हैं अपना अधिकार, पंचायत सचिव की बहाली जल्द करे सरकार’, ‘पंचायत सचिव बहाली पर परेशानी कब तक चलेगी, अधिकारियों की मनमानी कब तक चलेगी’. ऐस ही अन्य स्लोगन हैं.

साड्डा हक मोरहाबादी तक!इन युवाओं का कहना है कि वे यहां अनशन पर इसलिए हैं कि उनकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचे और बात मानी जाये. इनका कहना है कि 4919 सफल अभ्यर्थी हैं और सरकार से मांग करते हैं कि उनकी मेधा सूची जारी कर दी जाये और उन्हें नियुक्ति मिल जाये. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की त्रुटियों का खामियाजा वे भुगत रहे हैं.

मोरहाबादी मैदान के दूसरे छोर पर स्टेज के नीचे होम गार्ड के नवचयनित युवा बुनियादी प्रशिक्षण की मांग कर रहे हैं. वे भी अनिश्चितकालीन धरना पर हैं.

वहीं दूसरी तरफ झारखंड सशस्त्र पुलिस के जैप 2से 9 तक के लिये 1020 के शेष रिक्त पदों के लिए दूसरी मेधा सूची तैयार करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर हैं. इन अभ्यर्थियों का कहना है कि पुलिस मुख्यालय में रिजल्ट बनकर तैयार है. पर रिजल्ट जारी नहीं किया जा रहा है. उनका कहना है कि वे बेरोजगार  हैं और उनकी उम्रसीमा समाप्त हो चुकी है. उन्होंने पोस्टर के जरिये स्पष्ट कर दिया है कि उनका रिजल्ट अगर 10 दिनों के अंदर जारी नहीं किया जायेगा तो वे सामूहिक तौर पर आत्मदाह करेंगे और इसके लिए जिम्मेवार झारखंड सरकार होगी.

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हाल ही में हुए हैं कई आंदोलन

साड्डा हक मोरहाबादी तक!इससे पहले झारखंड के सहायक पुलिसकर्मी भारी संख्या में मैदान के बीचोबीच करीब 10 दिनों तक आंधी, वर्षा, धूप झेलते हुए अपनी मांगों के साथ धरना पर थे. इन वर्दीधारियों पर वर्दीधारियों ने ही लाठी भांजी थी. देशभर में चर्चा होने के बाद सरकार के आश्वासन पर वे अपने काम पर लौट गये.

अब देखना होगा कि वर्तमान में धरना पर बैठै अभ्यर्थियों को सरकार कैसे मनाती है. रघुवर दास की सरकार में भी पारा शिक्षक रांची के मोरहाबादी मैदान में ही धरने पर थे, सहिया, सेविका सहायिका सहित कई अनुबंधकर्मियों के लिए भी अपनी बात मनवाने का सबसे बड़ा केंद्र रहा है मोरहाबादी मैदान.

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