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10 करोड़ से बना सदर अस्पताल पुराने खंडहर पीएमसीएच की राह चला

अस्‍पताल परिसर बना मवेशियों का चारागाह

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Vikash Pandey

Dhanbad: 10 करोड़ रुपये की लागत से बना सदर अस्पताल भी अब पीएमसीएच की तरह खंडहर बनने की राह पर है. पीएमसीएच की तरह ही यहां भी कोई आता जाता नहीं है. अस्पताल के मुख्य गेट पर ताले लटके रहते हैं. यहां सिर्फ मवेशियों का आना जाना लगा रहता है. ये भी गोबर करते हैं और गंदगी फैलाकर चले जाते हैं. जिसकी वजह से अस्पताल के बाहर मुख्य गेट पर सूखे गोबर बिखरे पड़े हैं. आसपास में गंदगी भी फैली हुई है. रास्ते के दोनों ओर बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई हैं. हद तो है कि यहां मरीजों का इलाज होना तो दूर अस्पताल प्रबंधन का कोई आदमी झांकने तक नहीं आता.

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2 नवंबर को सीएम ने किया था ऑनलाइन उद्घाटन

2 नवंबर को सांसद पीएन सिंह ने टुंडी में एक भव्य समारोह में इस अस्पताल का ऑनलाइन उद्घाटन किया था. समारोह में मुख्यमंत्री रघुवर दास आनेवाले थे. मगर, ऐन वक्त पर उनका आगमन रद्द हो गया. वजह, बतायी गयी हेलिकाप्टर में खराबी. हालांकि, कुछ लोगों ने उनके कार्यक्रम रद्द होने के मामले को गिरिडीह के भाजपा सांसद रवींद्र पांडेय से भी जोड़ा. टुंडी उन्‍ही के संसदीय क्षेत्र में है. इसके बावजूद उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया था. जबकि, सांसद पांडेय रेल संबंधी संसदीय समिति की बैठक में भाग लेने गये थे. टुंडी में हुए इस कार्यक्रम में कई करोड़ की योजनाओं का ऑनलाइन उद्घाटन किया गया. इनमें से एक धनबाद का सदर अस्पताल भी था. न्यूज विंग ने उद्घाटन से पहले खबर दी थी कि अस्पताल की बिल्डिंग के अलावे यहां कोई व्यवस्था ही नहीं है. न डाक्टर, न पारा मेडिकल स्टाफ. सिविल सर्जन ने भी इस बात की पुष्टि की थी. उन्होंने कहा था कि सारी व्यवस्था धीरे-धीरे कर ली जाएगी.

नये सदर अस्‍पताल के मुख्‍य द्वार पर गंदगी का अंबार

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उद्घाटन का श्रेय तो सबने लिया, संचालन की फिक्र नहीं

न्यूज विंग ने कहा था कि ऐसे में अस्पताल का उद्घाटन महज खानापूर्ति है. बता दें कि पिछले दो साल से अस्पताल के उद्घाटन की कई तारीख तय की गयी और टाल दी गयी. कितने ही नेता उद्घाटन का श्रेय लेने की होड़ में बड़ी-बड़ी बातें करते रहे और उद्घाटन करने के लिए दबाव बनाते रहे. लेकिन, किसी ने भी इसकी व्यवस्था और चिकित्सकों की जरूरत के बारे में नहीं सोचा. नतीजा है कि आज उद्घाटन के सप्ताह भर बाद भी अस्पताल अपनी बदहाली पर रो रहा है. इसकी इमारत ही सिर्फ लोगों के भरोसे के लिए खड़ा है. सुविधा नदारद है.

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अस्‍पताल भवन निर्माण में प्राक्‍कलन से दोगुनी राशि खर्च

सदर अस्पताल के सामने ही बंद पड़ा खंडहरनुमा पुराना पीएमसीएच भी है. जिसे प्रबंधन की लापरवाही से बंद करना पड़ा और नयी अस्पताल कोयला नगरी में बनायी गयी. सदर अस्पताल भी उसी तरह कुव्यवस्था की शिकार होकर शिलान्यास के 10 सालों के बाद दोगुनी राशि से बनकर तैयार हुआ. अब उद्घाटन के बाद यह लोगों की सेवा के लिए उपलब्ध होगा या नहीं, सेवा होगी कि नहीं, इन सवालों के साथ सरकारी धन के दुरुपयोग के बड़े उदाहरण के रूप में सुनसान पड़ा है.

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