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सचिन पायलट : जिन्होंने जमीनी स्तर पर कांग्रेस को मजबूत कर राजस्थान में दिलाई जीत

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New Delhi/ Jaipur : राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत का श्रेय काफी हद तक पार्टी की नयी पीढ़ी के नेता सचिन पायलट को जाता है. जिन्होंने अपना ध्यान राष्ट्रीय राजनीति से हटा कर राज्य की चुनौतियों पर लगाया और जमीनी स्तर पर पार्टी को सींच कर उसकी जीत सुनश्चित की.

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2013 में कांग्रेस को मिली थी करारी शिकस्त

पिछले लोकसभा चुनाव (2014) में कांग्रेस की हार होने पर उन्होंने यह संकल्प लिया था, कि जब तक पार्टी सत्ता में नहीं लौटती वह साफा नहीं बांधेंगे. अब ऐसा लगता है कि वह साफा बांध सकते हैं. राजस्थान में 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त (भाजपा की 163 सीटों के मुकाबले महज 21 सीट) के बाद राहुल गांधी (वर्तमान पार्टी अध्यक्ष) ने राज्य की बागडोर पार्टी के दिवंगत नेता राजेश पायलट के बेटे सचिन को सौंपी थी. राजेश पायलट की 2000 में दौसा में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी थी.

2014 में प्रदेश (राजस्थान) कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया

संप्रग सरकार में विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके सचिन ने यह चुनौती स्वीकार कर ली और अपना ध्यान राष्ट्रीय राजनीति से हटा कर राजस्थान की चुनौतियों पर केंद्रित किया. इसके बाद सचिन ने जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने और राज्य की सत्ता में उसकी वापसी सुनिश्चित करने के लिए राज्य में पांच लाख किमी से अधिक की यात्रा की. उन्हें जनवरी 2014 में प्रदेश (राजस्थान) कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया.

दौसा से 26 वर्ष की आयु में सांसद चुने गए

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अधीर रंजन चौधरी के साथ-साथ केरल के नेता के सुरेश, पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर इस पद के लिए दौड़ में शामिल थे.

वर्ष 2004 में अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र दौसा से 26 वर्ष की आयु में सांसद चुने गए सचिन संसद के सबसे युवा सदस्य बने थे. दूसरी बार वह 2009 में अजमेर सीट से लोकसभा के लिए चुने गए थे. दो बार सांसद रहे सचिन पायलट ने अपना पहला विधानसभा चुनाव दिसंबर में टोंक सीट से लड़ा और जीत हासिल की. पायलट ने इस चर्चित सीट पर भाजपा प्रत्याशी और वसुंधरा राजे सरकार में कदृावर मंत्री रहे युनुस खान को हराया.  सचिन संप्रग सरकार में मंत्री और विभिन्न संसदीय समितियों के सदस्य रह चुके हैं.

उन्हें 2008 में विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) ने यंग ग्लोबल लीडरों में भी चुना था. उनका जन्म सात सितंबर 1977 को हुआ था. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रख्यात सेंट स्टीफेंस कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की उपाधि हासिल की. उन्होंने बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो में और फिर जनरल मोटर्स कॉरपोरेशन में काम किया.

व्हार्टन बिजनेस स्कूल से ‘बहुराष्ट्रीय प्रबंध एवं वित्त’ में एमबीए किया

उन्होंने व्हार्टन बिजनेस स्कूल (पेनसिलवेनिया विश्वविद्यालय) से ‘बहुराष्ट्रीय प्रबंध एवं वित्त’ में एमबीए किया है. सचिन की शादी नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला की बेटी सारा से हुयी थी,उनके दो बेटे भी हैं. सचिन ने विमान उड़ाने के लिए ‘‘पायलट’’ का अपना निजी लाइसेंस 1995 में अमेरिका से हासिल किया था. उनकी खेलों में भी रूचि रही है और कई राष्ट्रीय शूटिंग प्रतिस्पर्धाओं में उन्होंने दिल्ली का प्रतिनिधित्व भी किया है. अब, पूरे राज्य की नजरें बुधवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक पर है.

 

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