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सांसद आदर्श ग्राम योजना: हर फेज में घटती गयी झारखंडी सांसदों की रुचि, 7 ने ही तीसरे चरण तक चुने गांव

तीन सांसदों के विकास की रिपोर्ट मंत्रालय के पास नहीं

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Chhaya

Ranchi: 2014 में केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गयी सांसद आदर्श ग्राम योजना के तीन फेज बीत चुके हैं. लेकिन झारखंड के लोकसभा सांसदों के पिछले तीन साल का परफॉर्मेंस देखें तो पता चलता है कि हर फेज के साथ सांसदों की रुचि इस योजना में घटती गयी.

यहां उन सांसदों की बात की जा रही है जिनका कार्यकाल साल 2014 -19 के बीच रहा. ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से अक्टूबर 2019 में सांसदों के क्रियाकलाप से संबधित जो रिपोर्ट साइट पर जारी की गयी उससे जानकारी होती है कि 14 लोकसभा सांसदों ने योजना के पहले चरण में गांव गोद लिये और कार्य भी किये.

लेकिन दूसरे फेज में 13 सांसदों ने ही इस पर काम किया. वहीं तीसरे चरण में मात्र सात सांसदों ने गांव गोद लिये और विकास कार्य किये.

बता दें कि योजना के तहत सांसदों को गांव गोद लेकर अलग-अलग विकास प्लान पर कार्य करना है. मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार कुछ सांसद 2019 तक पहले चरण में ही काम करते रहे.

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मात्र दो विकास प्लान ही पूरा कर पाये सांसद विद्युत वरन

जमशेदपुर लोकसभा सीट से सांसद विद्युत बरण महतो ने बाराजूरी गांव को गोद लिया. यह गांव दूसरे चरण के तहत गोद लिया गया था.

साल 2019 में मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक इस गांव में 196 विलेज डेवलपमेंट प्लान बनाये गये. लेकिन मात्र दो प्लान ही पूरे हो सके.

जबकि रिपोर्ट आने तक 29 प्लान पर काम जारी था. प्लान के तहत हेल्थ कैंप लगाना, मवेशियों का टीकाकरण, स्वयं सहायता समूह निर्माण आदि करने हैं.

सांसद ने पहले चरण में पूर्वी सिंहभूम स्थित बनगुरदा गांव को गोद लिया था.

बता दें कि मंत्रालय की रिपोर्ट में सांसदों की ओर से चलाये जा रहे आखिरी चरण की ही पूरी जानकारी दी गयी है. ऐसे में पहले चरण के तहत कितना काम हुआ इसकी जानकारी नहीं है.

पहले चरण में 66 प्लान किया पूरा

लोहरदगा से लोकसभा सांसद रहे सुर्दशन भगत ने 2014 में पहले चरण में बिशुनपुर गांव को गोद लिया. हालांकि इसके बाद सांसद की ने अरअरिया गांव को दूसरे चरण में गोद लिया गया.

लेकिन मंत्रालय की ओर से 2019 की रिपोर्ट में पहले चरण की ही जानकारी दी गयी है. पहले चरण के अनुसार 105 विलेज डेवलपमेंट प्लान तय किया. इसके बाद 66 प्लान पर काम पूरा कर लिया गया. जिसमें से 17 पर काम जारी रहा.

गांव में इस दौरान सड़क निर्माण, चेक डैम निर्माण, ट्रांसफर्मर लगाना, 12 मिनी वाटर टैंक, 82 पॉल्यूटरी शेल्टर समेत अन्य कार्य किये गये. तीसरे चरण के तहत गांव गोद लिया ही नहीं.

दूसरे चरण में चार प्लान पूरे किये निशिकांत दूबे ने

गोड्डा के लोकसभा सांसद रहे निशिकांत दूबे ने पहले चरण के दौरान बोहा गांव को गोद लिया. इसके लिए 41 विलेज डेवलपमेंट प्लान बनाये गये. इनमें से 31 पर काम पूरा किया गया.

मंत्रालय को रिपोर्ट दिये जाने तक 7 योजनाओं पर काम जारी रहा. दूसरे चरण में सांसद निशिकांत दूबे ने देवघर के डिंडाकोली गांव को गोद लिया. 134 विलेज डेवलपमेंट प्लान में से चार ही पूरा किया गया जिसमें 10 पर कार्य जारी है.

सांसद की ओर से दूसरे चरण में 2016 में गांव गोद लिया गया, जबकि मंत्रालय को रिपोर्ट 2019 में दी गयी. बता दें कि दोनों फेज के दौरान सांसद द्वारा गांवों में 170 ग्रामीणों को तकनीकी जानकारी दी गयी.

बोहा गांव को सौ प्रतिशत डिजीटल ग्राम का दर्जा भी हासिल है. तीसरे चरण में सांसद ने राजासिमरिया गांव को गोद लिया.

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चार प्लान ही पूरा कर पाये रामटहल चौधरी

तत्कालीन रांची सांसद रामटहल चौधरी ने पहले चरण में नामकुम के हाहाप गांव को गोद लिया. दूसरे चरण में सरायंकेला-खरसावां में चलियामा गांव को गोद लिया.

132 विलेज डेवलपमेंट प्लान में से चार में ही सांसद ने काम किया. मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 10 प्लान में काम जारी है.

दूसरे चरण के तहत चलियामा गांव में एसबीएम के तहत शौचालय निर्माण, 28 एसएचजी का निर्माण, जिन्हें एक लाख का लोन भी दिलाया गयी, स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति हुई.

तीसरे चरण में सांसद ने कांके के मनातू गांव को गोद लिया जिसकी जानकारी मंत्रालय की रिपोर्ट में नहीं है.

तीसरे चरण में चार प्लान पूरे किये रविंद्र राय ने

तत्कालीन कोडरमा सांसद रविंद्र राय ने तीसरे चरण में धाब गांव को गोद लिया. विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत चार प्लान पर काम किया गया. इसमें कुल 54 प्लान थे. 50 पर कार्य जारी है.

वहीं पहले चरण में सांसद ने धनवार के गादी और दूसरा चरण में ईचाक के परासी गांव को गोद लिया. दूसरे चरण की रिपोर्ट मंत्रालय ने नहीं जारी की है.

जबकि पहले चरण में गादी गांव में 136 विलेज डेवलपमेंट प्लान में से 58 पूरे किये गये. विकास कार्यों में सामुदायिक भवन निर्माण, हैंड पंप लगाने, 45 एसएचजी का निर्माण आदि किया गया.

तीसरे चरण में गांव ही गोद नहीं लिया जयंत सिन्हा ने

हजारीबाग सांसद रहे जयंत सिन्हा ने पहले और दूसरे चरण में गांव गोद लिये. पहले चरण में हजारीबाग के जरबा गांव को गोद लिया. जिसमें 63 प्लान में से 37 पूरे किये गये. और 13 शेष रहे.

इस गांव में सांसद की ओर से पीसीसी सड़क निर्माण, सोलर वाटर पंप, 622 शौचालय आदि का निर्माण किया गया. वहीं दूसरे चरण में पेटो गांव को गोद लिया. जिसमें 31 प्लान में से दो पर ही काम किया गया. बाकी शेष रहे.

इस गांव में सांसद ने तालाब निर्माण, 22 एसएचजी बनाये व कई अन्य विकास कार्य किये. तीसरे चरण में सांसद ने गांव गोद लिया ही नहीं.

मात्र दो ही प्लान पूरे किये लक्ष्मण गिलुआ ने

सिंहभूम के सांसद रहे लक्ष्मण गिलुआ ने पहले चरण में 2015 में बिला गांव को गांव लिया. दूसरे चरण में केरा गांव को गोद लिया गया.

इस गांव के लिये 114 विलेज डेवलपमेंट प्लान बनाये गये. जिसमें से मात्र ही दो ही पूरे किये गये. इसमें से मात्र 12 ही चालू हैं. दूसरे चरण में सांसद की ओर से साल 2016 में गांव गोद लिया गया.

इसके बाद भी मात्र दो प्लान पर ही काम किया गया. इसमें सड़क किनारों पर पौधरोपण ही किया गया. तीसरे चरण के तहत सांसद ने गांव गोद नहीं लिया.

243 प्लान बनाये विष्णु दयाल ने

पहले फेज में पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने किशुनपुर गांव को गोद लिया. इसके लिए 243 डेवलपमेंट प्लान बनाये गये. इसमें से 99 प्लान को सांसद ने पूरा किया. जबकि 25 पर रिपोर्ट बनने तक कार्य जारी था.

सांसद की ओर से इस क्षेत्र में बाल टीकाकरण, आइसीडीएस समेत अन्य प्लान पर कार्य किये गये. वहीं दूसरे फेज में माढ़ेया गांव को सांसद ने गोद लिया. इसके लिए 123 डेवलपमेंट प्लान बनाये गये. इसमें से 37 पूरा हुए और 48 पर काम चालू रहा.

इस गांव में सांसद ने आरओ वाटर प्यूरीफायर, मिनी सोलर पावर, तालाब निर्माण, 85 प्रतिशत बिजली उपलब्ध करायी गयी. तीसरे फेज की रिपोर्ट मंत्रालय ने जारी नहीं की है. तीसरा चरण में उलदाना गांव को गोद लिया.

36 प्लान पर पूरा काम किया रविंद्र पांडेय ने

गिरिडीह के लोकसभा सांसद रविंद्र कुमार पांडेय ने मीरनवाटाड़ गांव को गोद लिया. यह पहले चरण के दौरान गोद लिया गया. इसमें 65 प्लान बनाये गये. जिसमें से 36 पर काम पूरा हुआ और छह पर काम जारी रहा.

तीसरे चरण में सांसद ने रौशनटूंडा गांव को गोद लिया. वहीं दूसरे चरण में पेटरवार के गांव को गोद लिया. लेकिन इसकी रिपोर्ट मंत्रालय ने नहीं दी है.

बता दें कि पहले चरण की जानकारी मंत्रालय को दी गयी है. विकास कार्य में पंचायत कार्यालयों में बिजली, 200 केबी के ट्रांसफॉरर्मर, स्ट्रीट लाइट, रात्रि चौपाल लगाने समेत अन्य कार्य किये गये.

धनबाद में दूसरे चरण मे एक भी प्लान पूरा नहीं

धनबाद के सांसद पशुपतिनाथ सिंह ने पहले चरण में रतनपुर गांव को गोद लिया और दूसरे चरण में पोलकिरि गांव को गोद लिया. जिसके लिये 204 प्लान तय किया गया.

इसमें से एक पर भी सांसद की ओर से गांव में काम नहीं किया गया. मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक मात्र 55 कार्य जारी हैं. जबकि दूसरे चरण में 2016 में ही गांव को गोद लिया गया.

सांसद ने तीसरे चरण में सोनबाद गांव को गोद लिया. लेकिन मंत्रालय की रिपोर्ट में पहले और दूसरे चरण के विकास कार्य का विवरण नहीं है.

पहले चरण में ही लगे रहे शिबू सोरेन

दुमका सांसद शिबू सोरेन ने पहले चरण के तहत रंगा गांव को गोद लिया जिसके लिए 67 विलेज डेवलपमेंट प्लान बनाये गये. जिसमें से 27 पर काम पूरा हुआ और 26 शेष रहे.

लेकिन केंद्र सरकार की ओर से चलाये गये दूसरे और तीसरे चरण में सांसद ने रुचि नहीं दिखायी और न ही गांव गोद लिया.

पहले चरण की बात करें तो आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण, पेयजल व्यवस्था, लाइब्रेरी आदि का निर्माण किया गया.

रिपोर्ट में इन सांसदों का नहीं है जिक्र

खूंटी सांसद कड़िया मुंडा ने पहले फेज में तमाड़ के परासी गांव को गोद लिया. दूसरे चरण में तिलमा गांव को गोद लिया. तीसरे चरण में गांव गोद लिया ही नहीं.

चतरा सांसद सुनील कुमार सिंह ने पहले चरण में साल 2015 में केईदीनागर गांव को गोद लिया. दूसरे चरण में कामता गांव को साल 2017 में गोद लिया. तीसरे चरण में कोई गांव गोद नहीं लिया.

राजमहल से विजय कुमार हांसदा ने तलझारी गांव को 2015 में गोद लिया. दूसरे चरण में उत्तरी पियरपुर गांव को गोद लिया. इन सांसदों की रिपोर्ट मंत्रालय की ओर से जारी नहीं की गयी है.

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