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RU : जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभागाध्यक्ष पर भेदभाव करने का आरोप, पीएचडी से जुड़े कार्यों में करते हैं अनदेखी

Ranchi : जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा खोरठा के शिक्षक सह झारखंड असिस्टेंट प्रोफेसर अनुबंध संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निरंजन कुमार महतो और शिक्षिका डॉ. अर्चना कुमारी ने संयुक्त रूप से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. हरि उरांव पर भेदभाव का आरोप लगाया है. इस विषय की जानकारी शिक्षकों ने कुलपति डॉ कामिनी कुमार को आवेदन देकर दी है.

आरोप लगानेवाले शिक्षकों के मुताबिक जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. हरि उरांव ने जब से पदभार ग्रहण किया है तब से खोरठा भाषा के शिक्षकों को दरकिनार करके पीएचडी से संबंधित कार्यों को संपादित कर रहे हैं. इससे खोरठा भाषा एवं साहित्य से जुड़े पीएचडी शोध कार्यों की गुणवत्ता में गिरावट की संभावना बढ़ जाती है.

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खोरठा भाषा एवं साहित्य से जुड़े पीएचडी कार्य जैसे पीएचडी डीआरसी सेमिनार, पीएचडी प्री-रेजिस्ट्रेशन सेमिनार, पीएचडी सब्मिशन सेमिनार, पीएचडी मौखिकी इत्यादि में खोरठा भाषा के शिक्षकों से न तो सहमति ली जाती है और न ही शामिल किया जाता है. दूसरी भाषाओं के शोधकर्ताओं और शिक्षकों से इन सभी कार्यों को संपादित करवाने के कारण खोरठा भाषा के शिक्षकों में काफी नराजगी है. खोरठा भाषा के शिक्षकों को नहीं शामिल करने के पीछे गिरी हुई मानसिकता को दर्शाता है.

जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में संचालित पीएचडी कोर्स वर्क में खोरठा भाषा के शिक्षकों को एक भी क्लास नहीं दिया गया और रिजल्ट भी प्रकाशित हो गया. जबकि पीएचडी कोर्स वर्क के सिलेबस दो पत्रों में विभाजित है और द्वितीय पत्र खोरठा भाषा एवं साहित्य से संबंधित है. प्रभारी विभागाध्यक्ष और कोर्स कोऑर्डिनेटर मिलकर इन सभी कार्यों को अंजाम दे रहे हैं.

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