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दो साल से MTech-BTech के छात्रों का रिजल्ट जारी नहीं कर पा रही RU, खराब सॉफ्टवेयर बनी वजह

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  • सीआइटी, आरटीसी और निलय के लगभग आठ सौ छात्र प्रभावित.
  • रोज चक्कर लगा रहे परेशान छात्र, सीजीपीए मैनुअली नहीं दे पा रही यूनिवर्सिटी.

Ranchi: तकनीकि संस्थानों और छात्रों की स्थिति दिनों दिन बदतर होते जा रही है. रांची यूनिवर्सिटी अंतर्गत एफिलिएटेड टेक्निकल संस्थानों में पिछले दो साल से छात्रों को रिजल्ट जारी नहीं किया गया है.

रांची यूनिवर्सिटी से तीन टेक्निकल संस्थान एफिलिएटेड हैं. इसमें सीआइटी, आरटीसी और निलय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी शामिल हैं. नियम के अनुसार एमटेक या बीटेक का मार्कसीट जारी करने के साथ यूनिवर्सिटी को छात्रों को सीजीपीए देना होता है.

यूनिवर्सिटी को परेशानी छात्रों को सीजीपीए देने में हो रही है. क्योंकि पिछले दो साल से यूनिवर्सिटी का सॉफ्टवेयर खराब है. जिससे छात्रों को सीजीपीए अंक नहीं दिये जा रहे हैं. ऐसे में यूनिवर्सिटी की ओर से एक दो छात्रों को मैनुअली रिजल्ट दिया जा रहा है.

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वहीं मैनुअली रिजल्ट देने में भी यूनिवर्सिटी को परेशानी है. क्योंकि दशमलव के बाद के अंक मैनुअली देना मुश्किल है. जबकि सॉफ्टवेयर से ये काम आसान भी है और दशमलव के बाद के अंक देने में कोई परेशानी भी नहीं है.

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लगभग आठ सौ छात्र हैं प्रभावित

रांची यूनिवर्सिटी की इस लचर व्यवस्था से लगभग आठ सौ छात्र प्रभावित हैं. यूनिवर्सिटी में आये दिन इन छात्रों की ओर से शिकायत की जाती है. साॅफ्टवेयर खराब होने के कारण रिजल्ट बनाने वाले कर्मचारियों को भी परेशानी हो रही है.

साल 2018 से यूनिवर्सिटी का साॅफ्टवेयर खराब होने के कारण बीटेक के लगभग छह सौ और एमटेक के लगभग दो सौ छात्र प्रभावित हैं. जबकि यूनिवर्सिटी इन छात्रों को सेमेस्टर के अनुसार रिजल्ट देती है. इन छात्रों से बात करने से जानकारी हुई कि साॅफ्टवेयर खराब होने के कारण पिछले दो साल से सेमेस्टरवार रिजल्ट मैनुअली दिया जा रहा है. जिसमें समय लग रहा है. साथ ही इस मैनुअल रिजल्ट में सीजीएपी सही है कि नहीं इस पर भी संदेह है.

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कुछ ऐसे भी छात्र हैं जिनका रिजल्ट पिछले दो साल से आया ही नहीं है. यूनिवर्सिटी की लचर व्यवस्था से सबसे अधिक 2014-18 और 2015-19 के बीटेक और 2016-18 और 2017-19 के एमटेक के छात्र प्रभावित हैं.

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फाॅर्म भरवाने के लिये एक संस्था से 16 लाख रुपये लेती है यूनिवसिर्टी

सीआइटी, आरटीसी और एनआइटी रांची यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड है. ऐसे में इन सभी यूनिवर्सिटी से बीटेक और एमटेक के छात्रों से प्रति सेमेस्टर आवेदन भरवाने के लिए यूनिवसिर्टी कम से कम 16 लाख रुपये लेती है.

इसके बाद भी यूनिवर्सिटी इन छात्रों को रिजल्ट नहीं दे पा रही है. छात्रों से जानकारी मिली कि पिछले दो साल से रांची यूनिवर्सिटी ने इन संस्थानों के छात्रों को न तो रिजल्ट दिया और न ही प्रोविजनल समेत अन्य सर्टिफिकेट दिये.

हालांकि छात्रों की ओर से यूनिवर्सिटी में शिकायत करने पर कई बार यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने सॉफ्टवेयर बनाने की बात कहीं लेकिन इसके बावजूद दो साल बाद भी सॉफ्टवेयर नहीं बनाया गया. इस मामले में यूनिवर्सिटी के वीसी और परीक्षा नियंत्रक से बात करने की कोशिश की गयी लेकिन उनसे बात नहीं हो पायी.

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