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RU में कांट्रेक्ट टीचर नियुक्ति में गुम हुए स्थानीय अभ्यर्थी, जेएनयू और डीयू के अभ्यर्थी की भीड़

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Ranchi, 12 October : रांची विश्वविद्यालय में 22 सितंबर से संविदा (कांट्रेक्ट पर) के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है. कुल 22 विभागों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति की जानी है. हर विभाग के लिए 150 से अधिक अभ्यर्थियों ने अावेदन दिया है. इस तरह करीब 3500 अभ्यर्थियों के अावेदन रांची विश्वविद्यालय को मिले हैं. 18 अक्टूबर को नियुक्ति प्रक्रिया समाप्त होगी. अभी अभ्यर्थियों के साक्षात्कार चल रहा है. 11 व 12 अक्टूबर को हिंदी एवं राजनैतिक विज्ञान के शिक्षकों का साक्षात्कार हुअा. अभी तक जो अभ्यर्थी साक्षात्कार में शामिल हुए हैं, उनमें अधिकांश जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) और दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के हैं. अभी तक लगभग दो हजार अभ्यथियों का साक्षात्कार पुरा हो चुका है.  इसमें 60 फीसदी अभ्यर्थी जेएनयू और डीयू के ही थे. 
पीएचडी और एमफील में स्थानिय विश्वविद्यालय के अभ्यर्थी नहीं 
साक्षात्कार प्रक्रिया के दौरान सबसे अाश्चर्यजनक बात यह देखने को मिल रही है कि अस्थायी बहाली प्रक्रिया में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से अभ्यर्थी पहुंच रहे है. पीएचडी और एमफील की डिग्रीयों के साथ बाहर के छात्र बड़ी-बड़ी जर्लन के साथ साक्षात्कार स्थल तक पहुंच रहे हैं. इनमें कई अभ्यर्थी ऐसे भी आए जो जाने-माने विश्वविद्यालय से सेवानिवृत हैं. इन सबमें कहीं न कहीं रांची विश्वविद्यालय के छात्र असहज महसूस कर रहे हैं. रांची विश्वविद्यालय के अभ्यर्थियों ने newswing.com को बाताया कि पीएचडी और एमफील में वे किसी से कम नहीं हैं. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में माध्यम शिक्षा प्राप्त करने के कारण उनके दसवीं और बारहवीं में अंक कम हैं, इसके भी प्वाइंट विश्वविद्यालय की ओर से दिया जा रहा है. प्रकाशकों की कमी होने के कारण यहां के बहुत से अभ्यर्थियों के पास कम ही जर्नल उपलब्ध है, जबकि दिल्ली से आये अभ्यर्थियों के पास बहुत जर्नल  हैं. 
बेरोजगार युवाओं के आंख में धुल झोंक रही है सरकार: तनुज खत्री 
रांची विश्वविद्यालय पीजी छात्रसंघ के अध्यक्ष तनुज खत्री ने बाताया कि जब सरकार द्वारा पदों का सृजन कर जेपीएससी के माध्यम सभी विश्वविद्यालयों के लिए शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ कर दी गयी है. इस स्थिति में सरकार और विश्वविद्यालय के अधिकारी बेरोजगार युवकों के आंखों में धुल झोंकने का काम क्यों कर रहे हैं. संविदा के आधार पर जो नियुक्ति की प्रक्रिया आरंभ की गयी है, उसका उदेश्य स्थानिय शिक्षित युवाओं को शैक्षिणिक कार्य में अवसर  प्रदान करना होना चाहिए. इस तरह से पूरे देश के अभ्यर्थी बहाली प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं, उस स्पष्ट होता है कि कही न कही दाल में कुछ कला है.

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