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झारखंड में वेंटिलेटर पर है RTI

  • मई 2020 से बिना कमिश्नर के है सूचना आयोग
  • पारदर्शिता की मुहिम पर पड़ा है पर्दा
  • अब हाइकोर्ट की शरण में जायेंगे आरटीआइ एक्टिविस्ट
Sanjeevani

Ranchi: केस-(1). गिरिडीह के आरटीआइ एक्टिविस्ट हैं सुनील खंडेलवाल. सोशल इंटरेस्ट के कई मुद्दों पर सूचना कानून का इस्तेमाल करते रहते हैं. शहर में आवारा कुत्तों से निजात दिलाने की सरकारी मुहिम, लोगों की जमीनों को गलत ढंग से प्रतिबंधित भूमि की श्रेणी में डाला जाना, नदियों-तालाबों का अतिक्रमण जैसे कई विषयों को आरटीआइ के जरिये सामने लाने में जुटे हैं.

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पर सुनेगा कौन? राज्य सूचना आयोग में मई, 2020 से वीरानी छायी है. ऐसे में केवल उनके लगभग 100 मामले आयोग में सुनवाई के लिये पडे हैं. इनमें 2014 से लेकर इस साल रिकॉर्ड हुए केस भी हैं. इन पर अगली सुनवाई की तारीख 1 फरवरी 2021 से 9 जून 2021 तक की दी गयी है.

केस-(2). गुमला के आनंद किशोर पंडा का 90 केस सूचना आयोग में सुनवाई को पड़ा हुआ है. 2007 से वे लगातार आरटीआइ का उपयोग करते आये हैं. अब तक आयोग की पहल से  25 से 30 मामलों में सूचनाएँ मिलीं. हालांकि इनमें से 5-7 केस में ही सही सूचना मिली. बाकी सब अधूरी पड़ी हैं. आयोग में जो केस दर्ज हैं, उन पर अगली सुनवाई का डेट नवम्बर 2020 से लेकर  सितम्बर 2021 तक का पड़ा है. ऐसे में उन्हें अगले दो तीन सालों में भी सूचना मिल पाने की उम्मीद नहीं है.

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आयोग में लंबित हैं 7600 से अधिक मामले

राज्य सूचना आयोग में 7640 मामले (अपीलवाद के) सुनवाई के लिए लंबित पड़े हुए हैं. शिकायतवाद के तहत 70 मामले आयोग में दर्ज हैं. हर माह तक़रीबन 500 मामले आयोग में दूसरे अपील के तहत दर्ज होते हैं. दूसरे अपील के तहत आयोग में सुनवाई को 870 ऑनलाइन आवेदन पड़े हुए हैं.

हाईकोर्ट की शरण

12 अक्टूबर, 2005 को देशभर में सूचना अधिकार कानून लागू हुआ. 15 साल पूरे होने पर झारखंड में सोमवार को आरटीआइ एक्टिविस्टों ने ऑनलाइन मीटिंग की. एक्टिविस्ट सुनील महतो सहित दूसरे लोगों ने चिंता जतायी कि झारखण्ड में राज्य सूचना आयोग को जान बूझकर पंगु बनाकर रखा गया है. चीफ इंफॉर्मेशन कमिश्नर और सूचना आयुक्तों की बहाली मामले में टालमटोल का रवैया है. ऐसे में आऱटीआइ एक्ट का मजाक बन रहा है. सूचना आवेदनों के मामले में गंभीरता नहीं दिखाने वालों को प्रमोशन का लाभ भी मिल रहा है. ऐसे में अब हाइकोर्ट की शरण ली जायेगी.

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पारदर्शिता के लिये प्रभावी औजार

पूर्व प्रभारी चीफ इंफॉर्मेशन कमिश्नर हिमांशु शेखर चौधरी के अनुसार उन्होंने अपने कार्यकाल में 29832 मामलों पर सुनवाई की. इनमें से 4414 को निष्पादित किया गया. 198 मामलों में पीआइओ (जन सूचना पदाधिकारी) को दण्डित किया गया. किसी विभाग में जन सूचना पदाधिकारी तो चाहते हैं कि वे सूचना ना दें. इसके चलते आयोग में जाना विवशता है. बेहतर होगा कि जल्दी से जल्दी आयोग को सशक्त किया जाये.

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