Education & CareerTOP SLIDER

RTE: रांची के स्कूलों ने रिजेक्ट कर दिये 89 % आवेदन

प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले का कानून फेल है झारखंड में

Ranchi: राइट टू एडुकेशन के तहत प्राइवेट स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की पढ़ाई का सपना झारखंड में ध्वस्त हो रहा है. राज्य के प्राइवेट स्कूलों के मैनेजमेंट इस कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं. इस मामले में सबसे बुरा हाल राजधानी रांची का है. यहां के प्राइवेट स्कूलों ने वर्ष 2019-20 में राइट टू एडुकेशन के तहत एडमिशन के लिए प्राप्त आवेदनों में से 89 प्रतिशत आवेदन रिजेक्ट कर दिये, जबकि इस सत्र में प्राइवेट स्कूलों में 74 प्रतिशत सीटें खाली रहीं.

इसे भी पढ़ें :टाइम के कवर पेज पर भारतीय मूल की 15 वर्षीय गीतांजलि राव, किड ऑफ द ईयर चुनी गयीं

आरटीई एक ऐसा कानून है, जिसके तहत प्रत्येक प्राइवेट स्कूल को एक निश्चित संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर तबके के बच्चों का एडमिशन लेना है. ‘अपना संगठन’ नामक संस्था ने सूचना अधिकार के विभाग से जो जानकारियां मांगी थीं, उससे ये तथ्य सामने आये हैं. इस संस्था के अल हसन ने विभाग से मिली सूचनाओं और आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि रांची जिले में सत्र 2019-20 में आरटीई के तहत कुल 1679 आवेदन मिले. इनमें से मात्र 188 छात्रों को ही एडमिशन मिला. जिले में आरटीई के तहत 713 सीटें में 525 सीटें खाली रह गयीं. कुल आवेदनों में 89 प्रतिशत आवेदन रिजेक्ट कर दिये गये. जबकि इस सत्र में निजी स्कूलों में खाली सीटों की संख्या लगभग 74 प्रतिशत रही.

इसे भी पढ़ें :पंजाब औऱ हरियाणा में अफीम भेजने की फिराक में लगे चार तस्कर गिरफ्तार

‘अपना संगठन’ ने आरटीआई के जरिए कुछ अन्य जिलों से भी जानकारियां जुटाईं. इसके अनुसार, विभिन्न जिलों में आरटीई के तहत एडमिशन के लिए 3578 आवेदन आये, जिसमें से मात्र 1471 छात्रों को ही एडमिशन दिया गया. लगभग 62 प्रतिशत आवेदन राज्य भर में रिजेक्ट कर दिये और इस तरह लगभग 60 प्रतिशत सीटें खाली रह गयीं. हसन ने बताया कि अब तक कई जिलों से पूरी जानकारी नहीं मिली है, लेकिन जो आंकड़े मिले है, उनके अध्ययन से साफ जाहिर है कि राज्य में राइट टू एडुकेशन लगभग फेल है. ‘अपना संगठ’न की ओर से आरटीई के तहत कमजोर वर्ग के बच्चों के लिये पिछले दो साल से मुहिम चलायी जा रही है.

सरकार के पास सही-सही जानकारी नहीं

हसन ने बताया कि सरकार को इसकी सही जानकारी तक नही है कि राज्य में आरटीई के तहत कितने एडमिशन हुए है. कई ऐसे परिवार योग्य होते हुए भी निजी स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन नहीं करा पा रहे हैं. रांची जिले में निजी स्कूलों की संख्या मात्र 59 बतायी गयी है, जबकि हकीकत में इससे कई गुणा ज्यादा प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं. जाहिर है, ऐसे कई स्कूल हैं जो बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं.

दूसरे शहरों में एडमिशन दर अधिक

संस्था से जुड़ी स्वाति नारायण ने बताया कि दिल्ली-मुंबई जैसे राज्यों में आरटीई से मिलने वाले एडमिशन की संख्या काफी अधिक है, जबकि झारखंड में इसके आंकड़े जुटाने में छह-सात महीने लग जा रहे हैं. आरटीई के तहत आवेदन करने वाले परिवारों से बात करने से जानकारी मिलती है कि वे एडमिशन के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन किस स्तर से नाम रिजेक्ट हो जाते हैं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिल पाती. उन्होंने कहा कि इसमें कोई बड़े करप्शन की भी आशंका है. आशंका है कि आरटीई के तहत सुरक्षित सीटों को बेचा जा रहा है.

इसे भी पढ़ें :नहीं रहे वरीय अधिवक्ता और बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष प्रेमचंद त्रिपाठी

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: