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पेयजल और स्वच्छता विभाग : कार्यपालक अभियंता की लापरवाही से सरकार के 2.02 करोड़ रुपये बेकार

कैग ने उठाये सवाल, डेढ़ वर्ष में भी विभाग से नहीं मिला जवाब

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Ranchi : पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा वाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर 2.02 करोड़ रुपये खर्च कर दिये. अतिक्रमित भूमि पर खर्च की गयी राशि बेकार हो गयी. नियंत्रक सह महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में खर्च की गयी राशि में संबंधित कार्यपालक अभियंता के फैसले को गलत बताया गया. कैग ने विभाग से जून 2017 में खर्च की गयी राशि का ब्योरा भी मांगा. लेकिन डेढ़ वर्ष बाद भी कैग को रिपोर्ट नहीं भेजी गयी.

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क्या है मामला

विभाग के गोंदा प्रमंडल में बने विश्वेसरैया संस्थान में 2013 में 11.90 करोड़ की वाटर हार्वेस्टिंग योजना स्वीकृत की गयी. इसमें लाइव मॉडल बनाने की सहमति भी विभाग की तरफ से दी गयी. जून 2014 को विभाग की तरफ से योजना की तकनीकी स्वीकृति भी दी गयी. विभाग ने 2.02 करोड़ रुपये खर्च करने की भी अनुमति प्रदान की. यहां झारखंड हाइकोर्ट में विचाराधीन एक मामला, जिसमें अतिक्रमित भूमि पर निर्माण कार्य नहीं करने की बात कही गयी. इसकी अनदेखी करते हुए योजना का क्रियान्वयन करा दिया गया.

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हाइकोर्ट की तरफ से अतिक्रमित भूमि को खाली करा कर वहां रह रहे लोगों के लिए व्यवस्थित व्यवस्था कराने का आदेश भी दिया गया. इसकी अनदेखी करते हुए गोंदा प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने मई 2013 में लोक निर्माण संहिता (पीडब्ल्यूडी कोड) का उल्लंघन करते हुए संवेदक कंपनी से समझौता कर लिया. मुख्य अभियंता सह कार्यकारी निदेश्क की ओर से 15 जुलाई 2013 को योजना शुरू करने का निर्देश भी दिया गया. इन सभी पहलुओं का खुलासा ऑडिट के दौरान हुआ. जब अंकेक्षण पदाधिकारी ने सवाल उठाना शुरू किया, तो सबकी बोलती बंद हो गयी. अब सरकार भी इसका जवाब नहीं दे पा रही है.

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