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RPCL ने ठोका 80 करोड़ का दावा, सुप्रीम कोर्ट ने माना कंपनी की थी निगम के साथ मिलीभगत

तत्कालीन बिजली बोर्ड ने दिया था ग्रामीण विद्युतीकरण का काम.

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Ranchi : RPCL ने बिजली निगम पर 80 करोड़ का दावा ठोका है. तत्कालीन बिजली बोर्ड के बीच काफी पुराने विवाद को लेकर सुप्रीम कोट ने यह फैसला सुनाया है. बताते चलें की राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना से पहले झारखंड में ग्रामीण विद्युतीकरण की जिम्मेवारी RPCL को मिली थी. तकनीकी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने slp (C) no. 1005-1006/12 में RPCLके पक्ष में तो फैसला दिया है. लेकिन साथ ही हाईकोर्ट के उस observation को सही ठहराया है कि बिजली बोर्ड के पदाधिकारी RPCL के साथ मिले हुए थे. इस मिलीभगत के कारण अध्यक्ष के आदेश के बाद भी RPCL को Blacklist नहीं किया गया, बल्कि Arbitration में जाने के आवेदन को त्वरित गति से स्वीकार कर लिया गया.

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भ्रष्ट पदाधिकारियों की संलिप्तता

यह स्पष्ट हो चुका है कि टेंडर प्राइस फर्म था, जिसमें price variation की गुंजाइश नहीं थी. मगर Arbitrator price variation का अवार्ड देते रहे और संलिप्त भ्रष्ट पदाधिकारी आश्चर्यजनक गति से उसका भुगतान करते रहे. जब महालेखाकार ने इस बिन्दु को उजागर किया तो तत्कालीन अध्यक्ष श्री शिव बसंत ने Arbitration Award के विरुद्ध अपील दायर कराया. RPCL ने Llimitation Act की धारा 34 के अन्तर्गत उक्त अपील के विरुद्ध Limitation का केस किया, जिसे Lower Court, High Court के Single फिर Double Bench ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हालांकि यह अपील Limitation Period के बाद दर्ज कराई गई है, पर ऐसा इसलिए हुआ कि संलिप्त पदाधिकारियों द्वारा जानबूझकर अपील नहीं किया गया. चूंकि यह Public Money का मामला है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

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भ्रष्ट पदाधिकारी हो रहे आरोपमुक्त

संलिप्त पदाधिकारियों के रसूख का आलम यह है कि निगम उन्हें एक-एक कर आरोप मुक्त करती जा रही है. देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले में पदाधिकारियों की संलिप्तता प्रमाणित करने के बाद अब निगम क्या करती है? क्या निगम इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करेगा या RPCL को 80 करोड़ का भुगतान कर संलिप्त पदाधिकारियों को Public Money के शानदार लूट पर जश्न मनाने का अवसर देगा?

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