न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

झारखंड में लोकसभा चुनावः महागठबंधन में सामाजिक संगठन और जनांदोलनों की भूमिका

1,343

Laxmi Purty, Sunil Hembram, Anup Mahto 

आगामी लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर अन्य राज्यों के तरह झारखंड में भी राजनीतिक माहौल में गरम है. मुख्य विपक्षी राजनीतिक पार्टियां (कांग्रेस, जेएमएम, जेवीएम, आरजेडी) भजपा को हराने के नाम पर महागठबंधन बनाने और बिगाड़ने का खेल आपस में खेल रहे हैं.

वर्तमान में विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के नेता सामाजिक संगठनों एवं जनांदोलनों के साझा मंच पर मंचासीन हो रहे हैं. सभी विपक्षी पार्टी झारखंड के जनसवालों से किनारा करते हुए तथा झारखंडी जनता को विश्वास में लिये बिना संयुक्त रूप से भाजपा को हराने के लिए प्रतिबद्धता दिखा रही हैं. जो पहले नहीं देखने को मिलता था.

साथ ही साथ सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों के साझा मंच से ये विपक्षी पार्टियां ऐसा माहौल और दबाव बना रही हैं, जैसा कि मानो सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों के लोगों के ऊपर ही भाजपा को हराने की पूरी जिम्मेदारी हो. वो भी बिना किसी सवाल-जवाब के या दूसरी तरह से कहें के इन्हीं जनसंगठनों की गलतियों के वजह से केंद्र और राज्य में भाजपा अपने विकराल रूप में आयी है. इसलिए इन जनसंगठनों को ही भाजपा को हराने और विपक्षी पार्टियों को जिताने का काम बिना जनमुद्दों को उठाये मजदूर की तरह करना है.

दूसरी तरफ ये विपक्षी पार्टी तथा नेता अपने-अपने निजी स्वार्थ को प्राथमिकता देते हुए एक-एक सीट के लिए आपस में छीना-झपटी करते दिखायी दे रहे हैं. और इन सबसे अलग, इधर सामाजिक संगठनों और जनांदोलन वाले लोग विपक्ष के द्वारा महागठबंधन के अंदर सीट की इस बंदरबांट का खेल देखने के लिए मजबूर हैं.

हमलोगों ने झारखंड भ्रमण के दौरान तथा तथ्यपरक राजनीतिक विशलेषण के बाद यह पाया कि लोकसभा चुनाव में RSS-BJP जैसी फासीवादी, पूंजीवादी, जनविरोधी, सामाजिक न्याय विरोधी ताकत को हराने के लिए या यूं कहें कि समाज से RSS और सत्ता से भाजपा को बेदखल करने के लिए झारखंड में सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों के लोगों को भी महागठबंधन में शामिल करना चाहिये. आगामी लोकसभा चुनाव में इनको भी प्रत्याशी बनाना चाहिये. सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों को शामिल किये बिना तथा इनको चुनाव में प्रतिनिधित्व दिए बिना भाजपा को हराने के नाम पर विपक्षी पार्टियों द्वारा बनाया जाने वाला महागठबंधन महज एक दिखावा साबित होगा. साथ ही यह, झारखंडी जनता, जनसवालों, झारखंडी स्वाभिमान तथा जनता की  लड़ाकू परंपरा के साथ बेईमानी होगी. इन चार-पांच सालों में भाजपा के द्वारा दमन और लूट झारखंड में दो जगहों पर सबसे ज्यादा हुए हैं. पहला खूंटी और दूसरा गोड्डा.

और इसलिए हमलोगों का मानना है कि सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों के लोगों को मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिये, बल्कि तमाम ज्वलंत जनसवालों को चुनाव का एजेंडा बनाने और आगामी लोकसभा चुनाव में खूंटी और गोड्डा लोकसभा सीट पर अपनी बात मुखर और निर्भीक होकर कहनी चाहिये. अपने लक्ष्य को महागठबंधन के सामने रखना चाहिये. साथ ही साथ विपक्षी पार्टियों को भी ये दो सीट (खूंटी और गोड्डा) पर सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों के लोगों को स्वतंत्र रूप से प्रत्याशी बनाकर अपने जनपक्षधर होने की  मिशाल पेश करनी चाहिये. खूंटी और गोड्डा लोकसभा सीट सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों को देना झारखंड में RSS-BJP के खिलाफ सड़कों पर लड़ रही जनता को सम्मान देने जैसा होगा.

दूसरी बात गोड्डा लोकसभा सीट सामाजिक संगठनों तथा जनांदोलनों को देने से महागठबंधन के अंदर कांग्रेस और जेएमएम के बीच चल रहे नूराकुश्ती, रस्साकसी को भी विराम मिलेगा. इससे महागठबंधन की सेहत पर भी अच्छा असर पड़ेगा. जनता के बीच भाजपा के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने का एक मजबूत संदेश भी जायेगा और इस लड़ाई में झारखंडी जनता भाजपा के खिलाफ अपने आप को मजबूत और ताकतवर भी महसूस कर पायेगी.

इसे भी पढ़ेंः फिर फंसे राज्य प्रशासनिक सेवा के चार अफसर, मनरेगा कानून के उल्लंघन का आरोप

 

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: