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बैन के बावजूद रांची में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा पॉलिथीन, जमशेदपुर और बेंगलुरु में रिसाइकिल कर बनायी जा रहीं सड़कें

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  • बेंगलुरु के एनजीओ स्वच्छा ने की बड़ी पहल, पॉलिथीन रिसाइकिल कर टाइल्स और सिंचाई पाइप बनाने में हो रहा उपयोग
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Ranchi : राज्य सरकार के प्लास्टिक पर रोक लगाये जाने के बावजूद इसका उपयोग रांची शहर में धड़ल्ले से किया जा रहा है. तमाम प्रयासों के बावजूद रांची नगर निगम की एन्फोर्समेंट टीम प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाने में असफल रही है. वहीं, दूसरी तरफ राज्य के एक शहर जमशेदपुर और स्मार्ट सिटी में गिने जानेवाले बेंगलुरु शहर में इसी प्लास्टिक को रिसाइकिल कर इसका उपयोग सड़कों पर लगनेवाले टाइल्स और सिंचाई पाइप बनाने में हो रहा है. राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने इस संदर्भ में एक ट्वीट कर बताया है कि इन शहरों में ऐसी सड़कों का निर्माण एक बड़ी उपलब्धि है. वहीं, रांची शहर आज भी प्लास्टिक के कचरे से परेशान है. सरकार केवल पॉलिथीन बैन करने को ही एक समाधान मान बैठी है. दूसरी तरफ बैन होने के बाद भी पॉलिथीन के उपयोग पर अपर नगर आयुक्त गिरिजा शंकर प्रसाद का मानना है कि इस पर तभी काबू पाया जा सकेगा, जब लोग स्मार्ट बनेंगे. केवल कानून के डर से किसी नियम का पालन संभव नहीं है.

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15 नवंबर 2017 को लगा था बैन, अभी भी दिखता है असफल

मालूम हो कि रांची सहित राज्यभर में 15 नवंबर 2017 से सभी तरह के पॉलिथीन के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था. तत्कालीन नगर विकास सचिव अरुण कुमार सिंह ने सभी नगर निकायों सहित सभी जिलों के डीसी और एसएसपी को निर्देश दिया था कि वे जिले में पॉलिथीन के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने की दिशा में काम करें. वहीं, हर नगर निकाय में एक टास्क फोर्स का गठन कर मार्केट में सघन जांच अभियान चलाने की बात उन्होंने कही थी. रांची नगर निगम की बात करें, तो एन्फोर्समेंट टीम ने गत वर्ष अक्टूबर तक प्लास्टिक उपयोग करनेवालों पर जुर्माना राशि के रूप में करीब 7.87 लाख रुपये वसूला थे. इसके विपरीत आज भी राजधानी के कई ऐसे बाजार हैं, जहां विक्रेता प्लास्टिक का उपयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं. दूसरी तरफ जमशेदपुर और बेंगलुरु शहर में इसी पॉलिथीन को रिसाइकिल कर इसका उपयोग सड़कें बनाने में किया जा रहा है.

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बेंगलुरु के एनजीओ स्वच्छा ने की है बड़ी पहल

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झारखंड से पहले कर्नाटक सरकार ने वर्ष 2016 में ही पॉलिथीन के उपयोग पर बैन लगाने की दिशा में एक बड़ी पहल की थी. बैन के बाद भी बेंगलुरु शहर में निरंतर उपयोग से परेशान कई एनजीओ इस दिशा में आगे आये. इसके समाधान के लिए स्थानीय गैर सरकारी सगंठन ‘स्वच्छा’ ने एक बड़ी पहल की. इको सॉल्यूशंस के तहत ‘स्वच्छा’ ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के साथ एक एग्रीमेंट किया. एग्रीमेंट के तहत एनजीओ ने पॉलिथीन को रिसाइकिल कर सड़क पर लगनेवाले टाइल्स और सिंचाई पाइप बनाने का काम शुरू किया. इस टाइल्स को नाम दिया गया ‘स्वच्छा रि-टाइल्स’. इसके बाद बेंगलुरु शहर में पॉलिथीन से हो रहे प्रदूषण पर काफी हद काबू पा लिया गया.

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मानसिकता तो बदलें लोग, पार्षद करेंगे पहल : एएमसी

निगम के अपर नगर आयुक्त (एएमसी) से जब शहर में निरंतर हो रहे पॉलिथीन के उपयोग और बेंगलुरु शहर में इसके समाधान की पहल पर जब सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस पर सहमति जतायी. उन्होंने कहा कि ऐसी पहल होना सराहनीय है. भविष्य में भी इस दिशा में निगम पार्षदों को पहल करनी चाहिए. लेकिन, जहां तक रिसाइकिल करने की बात है, तो पहले लोगों को आगे आकर अपनी सोच और मानसिकता में बड़ा बदलाव करना होगा. केवल कानून के डर से कोई कदम उठाना संभव नहीं है. ऐसा होता है, तो पॉलिथीन के उपयोग पर अपनेआप काबू पाया जा सकता है.

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