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बेरमो के रोड सेल में हर महीने हो रही है औसतन 2.5 करोड़ की अवैध वसूली, प्रेस से लेकर पुलिस तक मैनेज

Akshay Kumar Jha

Ranchi: आम्रपाली, बाघमारा और झरिया में ही कोयले के कारोबारियों से वसूली का खेल नहीं चल रहा है. बल्कि बोकारो जिले के बेरमो अनुमंडल में भी कई सालों से अवैध वसूली की जा रही है. अवैध वसूली की जानकारी राजनेता, जिला प्रशासन से लेकर पुलिस व प्रेस तक को है. लेकिन कोई कुछ नहीं करता. तमाशबीन बनने की वजह सभी के बीच बंटने वाला कमीशन है.

कमीशन की इस राशि को रोड सेल में कमेटी के नाम पर उठाया जाता है. कमेटी के सिरमौर क्षेत्र के दबंग लोग होते हैं. जिनका काम राशि वसूलने से लेकर पैसा सही जगह पहुंचाने तक का होता है. हालांकि यह बात जरूर है कि कमेटी के इस अवैध वसूली के खेल से कुछ युवाओं को रोजगार मिलता है.

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बेरमो के रोड सेल में हर महीने हो रही है औसतन 2.5 करोड़ की वसूली, प्रेस से लेकर पुलिस सब सेट
बेरमो में कोयले का उठाव करती महिला श्रमिक

इसलिए गंदा होने के बावजूद यह धंधा बेरमो में जोर-शोर से चल रहा है. किसी भी हाल में ट्रक मालिक इस अवैध वसूली का विरोध नहीं कर पाते हैं. ट्रक मालिक ने अगर विरोध किया, तो उनके ट्रक को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाता है. जिसके बाद उस रोड सेल से ट्रक पर कोयला लोड ही नहीं किया जाता है.

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बेरमो में हैं 10 रोड सेल, हर कमेटी उठाती है 3000 रुपए

बेरमो में कल्याणी, अमलो, तारमी, कारीमाटी, कारो, खासमहल, जारंडीह, गोविंदपुर और स्वांग दस रोड सेल प्वाइंट हैं. एक आंकलन के मुताबिक, इन दसों रोड सेल में हर महीने औसतन दो लाख टन कोयले का उठाव रोड सेल के जरिए होता है. सीसीएल की तरफ से ऑफर के मुताबिक, कोयले का उठाव होता है. सीसीएल की तरफ से इसे कम या ज्यादा किया जाता रहता है.

बेरमो के रोड सेल में हर महीने हो रही है औसतन 2.5 करोड़ की वसूली, प्रेस से लेकर पुलिस सब सेट
बेरमो में ट्रक पर कोयला लोड करते मजदूर

कोयले का उठाव ज्यादातर 12 चक्का वाले ट्रक से होता है. एक 12 चक्का ट्रक में 25 टन कोयला लोड होता है. इस हिसाब से दो लाख टन कोयले के उठाव में 8000 ट्रकों की जरूरत पड़ेगी. हर ट्रक से 3000 रुपए कमेटी की तरफ से वसूले जाने पर पैसे का आंकड़ा 2.5 करोड़ तक पहुंचा जाता है.

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यह राशि विस्थापित, आंदोलनकारी, ऑफिस स्टाफ, पुलिस, प्रशासन और प्रेस प्रतिनिधियों के बीच बांटी जाती है. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात है कि राशि का एक हिस्सा सीसीएल प्रबंधन के लोगों के बीच बंटता है. प्रबंधन को पैसा सही तरीके से कोयला उठाने और कांटा करने के लिए दिया जाता है. जबकि इसके लिए सीसीएल प्रबंधन की तरफ से कर्मियों को एक मोटी सैलेरी भी दी जाती है.

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