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#Ranchi: सस्ती दर पर मिनरल वाटर पिलाने की निगम की योजना अधर में, मात्र पांच प्लांट बने जिसमें दो पर लटका ताला

Ranchi : राजधानीवासियों को सस्ती दर पर शुद्ध पानी पिलाने के लिए वर्ष 2016 में निगम क्षेत्र के कुल 120 जगहों पर मिनरल वाटर प्लांट लगाने की योजना निगम ने बनायी थी.

पीपीपी के तहत इस प्लांट के लिए निगम ने मुंबई की कंपनी वाटरलाइफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक करार किया था. करार के तहत ही कई इलाकों में यह प्लांट लगाना था.

इन प्लांटो से लोगों को एक रुपये में एक लीटर मिनरल वाटर और 7 रुपये में एक जार (20 लीटर) पानी देने की योजना थी.

लेकिन निगम के ढीले-ढाले रवैये के कारण शहर में मात्र पांच जगहों अपर बाजार, एजी ऑफिस के सामने, मधुकम, कांटाटोली चौक व चुटिया में ये प्लांट लग पाये.

वहीं इन पांच प्लांटों में भी 2 प्लांट (एजी ऑफिस व मधुकम का प्लांट) कई दिनों से बंद पड़े हैं. वहीं अपर बाजार प्लांट पिछले कुछ दिनों से खराब है. इन्हें चालू कराने को लेकर भी नगर निगम गंभीर नहीं है.

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गंभीरता दिखाने से निजी कंपनियों पर लगता लगाम

1 रुपये में जहां एक लीटर बोतल में पानी देने की योजना थी. वहीं आम लोग जो जार में पानी भरने आने वाले थे उन्हें मात्र 7 रुपये में 20 लीटर पानी देने की योजना थी.

अगर ये प्लांट लग जाते तो राजधानी के कई इलाकों में निजी कंपनियों द्वारा मिनरल वाटर के नाम पर जिस प्रकार से लूट मचायी जा रही है, उस पर लगाम लग जाता. लेकिन निगम अधिकारियों ने इस पर गंभीरता नहीं दिखायी.

शुरू होते ही बंद हुआ मधुकम प्लांट

निगम के जल बोर्ड से जुडे कर्मियों की मानें, तो निगम की यह योजना गर्मी, समारोह को देखते हुए आम लोगों को राहत देने वाली थी. लेकिन कंपनी की ढूल-मूल रवैये के कारण यह प्लांट 120 की जगह केवल 5 इलाकों में ही लग सका.

इसमें भी मधुकम प्लांट तो शुरू होने के साथ ही बंद हो गया. वहीं एजी ऑफिस का प्लांट इसलिए बंद है, क्योंकि कंपनी द्वारा यहां के बिजली बिल का भुगतान नहीं किया गया है.

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30-40 रुपये  प्रति जार वसूलते हैं निजी कंपनी

अगर यह योजना पूरी तरह से सफल हो पाती, तो राजधानीवासियों को साफ पानी पिलाने में निगम काफी हद तक सफल हो पाता. बता दें कि निगम के इन प्लांटों में जहां 7 रुपये में 20 लीटर पानी देने की योजना थी. वहीं निजी कंपनियों द्वारा 30-40 रुपये में 20 लीटर का एक जार आम लोगों को दिया जाता है.

निगम कर्मियों का कहना है कि निगम की इस योजना को धरातल पर उतरने से रोकने के लिए निजी कंपनियों ने भी जी जान लगा दिया था. इसके लिए निगम के अधिकारियों से भी संपर्क साधा गया था. इसके बाद निजी कंपनियों के फायदे को देखते हुए निगम ने खुद के इस योजना को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया.

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