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RMC ने 10 हजार से अधिक की आबादी को मच्छरदानी में कर रखा है कैद

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Nitesh Ojha

Ranchi : लोग अपने घरों की और अपनी सुरक्षा के लिए मकान में मजबूत दरवाजे लगाते हैं. खिड़कियों को लोहे, लकड़ी, शीशे या लोहे की जाली के पल्ले से सुरक्षित बनाते हैं. मगर, रांची से 10 किलोमीटर दूर स्थित रातू के झीरी इलाके में घरों के एंट्रेंस को मच्छरदानी से ढंककर रखा जाता है. हर वक्त. दिन हो या रात. दरवाजों की बजाय मच्छरदानी ही इन घरों और इनमें रहनेवाले लोगों को सुरक्षा देती है. सामान्यतः शहर के लोग अपने घरों में मच्छरदानी का उपयोग रात में सोने करते हैं. इसके उलट झीरी में 10 हजार से अधिक लोगों का जीवन मच्छरदानी में कैद हो गया है. यहां के लोगों को रात-दिन मच्छरदानी में ही रहना पड़ता है. इस इलाके में अधिकतर घरों के दरवाजे और खिड़कियों पर मच्छरदानी लगी हुई रहती है. इसका कारण झीरी स्थित डंपिंग यार्ड में रांची नगर निगम (RMC) द्वारा लंबे समय से पूरे शहर का कचरा डंप किया जाना है. कचरा डंपिंग की वजह से वर्तमान में पूरे क्षेत्र की स्थिति नारकीय होती जा रही है. डंपिंग यार्ड के यहां शुरू होने के दौरान ही आस-पास के मुहल्लेवासियों ने इसका विरोध किया था. इसके बावजूद नगर विकास मंत्री, निगम के अधिकारी या स्थानीय विधायक को इनलोगों की तकलीफ का कोई अहसास नहीं है. डंपिंग यार्ड का विरोध करते-करते लोग थक गये, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. इलाके में फैली गंदगी एवं महामारी फैलने के डर की वजह से लोग अपने घरों में मच्छरदारी का इस्तेमाल दिन में भी करते हैं. इन लोगों का कहना है कि नगर निगम की ओर से कीटनाशक दवाओं का नियमित छिड़काव भी नहीं होता है. वहीं, यार्ड के बाहर भी सड़क पर कचरा फैला है. इसके कारण यहां के लोग काफी परेशान हैं.

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RMC ने 10 हजार से अधिक की आबादी को मच्छरदानी में कर रखा है कैद
झीरी में डंपिंग से लगा कचरे का अंबार.

मच्छरदानी ही एक सहारा

डंपिंग यार्ड के पास स्थित आनंद नगर मुहल्ले में रहनेवाले रणधीर चौधरी का कहना है कि कचरे की वजह से सभी जगह मक्खी-मच्छर का आतंक है. खाने-पीने के सामन में भी मक्खी बैठ जाती है. ऐसे में अब मच्छरदानी ही सहारा बनी हुई है. मुहल्ले के बच्चे सुबह में स्कूल जाते हैं. फिर स्कूल से आने के बाद मच्छरदानी में घुस जाते हैं. उनके खाने-पीने से लेकर सोने और पढ़ने का सारा काम मच्छरदानी के अंदर ही होता है. नगर निगम की ओर से कीटनाशक दवाओं का नियमित छिड़काव के सवाल पर उनका कहना था कि करीब साल भर से सभी काम बंद हैं. न ही निगम की कोई फॉगिंग मशीन यहां आती है, न ही कोई छिड़काव किया जा रहा है. समस्या को लेकर मुहल्लेवासी संध्या देवी का कहना है कि निगम ने जब से यहां डंपिंग यार्ड बनाया है, तब से इलाके के लोगों का जीवन बेहाल हो गया है. कचरे के कारण मच्छर और मक्खी इतने पनप गये हैं, कि वे अब घर के दरवाजे को ही मच्छरदानी से ढंकने को विवश हैं.

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बरसात के कारण रोकी गयी थी फॉगिंग, जल्द होगी शुरू : किरण कुमारी

इलाके में छिड़काव करीब साल भर से नहीं होने की बात को नकारते हुए निगम की स्वास्थ्य पदाधिकारी किरण कुमारी का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से स्प्रे मशीन खराब थी, इस कारण छिड़काव नहीं हो सका. जल्द ही काम शुरू हो जायेगा. वहीं, फॉगिंग नहीं होने की बात को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि बरसात के कारण इसे रोका गया था. फिर भी लोगों की परेशानी को देखते हुए जिस दिन बारिश नहीं होगी, उसके एक दिन छोड़ अगले दिन इलाके में फॉगिंग करवायी जायेगी.

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लाखों टन कचरा गिरता है झीरी में

मालूम हो कि शहर से रोज करीब 500 टन कचरा निकलता है, जिसे रांची नगर निगम झीरी में डंप करता है. अगर इसका महीनेवार आकलन किया जाये, तो झीरी में करीब 15,000 टन कूड़ा जमा हो रहा है. यह आंकड़ा एक साल में करीब 1.80 लाख टन हो जाता है. इसी कचरे के कारण आज यहां के लोगों का जीवन नारकीय बनता जा रहा है.

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दो करोड़ खर्च करने के बाद भी नहीं लगा प्लांट

कूड़ा निष्पादन करने के लिए रांची नगर निगम ने यहां प्लांट लगाने की वर्ष 2011 में एक पहल भी की थी. उस दौरान शहर की साफ-सफाई का जिम्मा निगम ने एटूजेड कंपनी को दिया था. निगम के ही एक अधिकारी के मुताबिक, इस काम के लिए अनुमानतः 2.25 करोड़ से अधिक की राशि उपलब्ध करायी गयी थी, लेकिन काम नहीं हो पाया. उसके बाद एस्सेल इन्फ्रा कंपनी ने इस काम का जिम्मा लिया, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि आज भी प्लांट का काम पूरा नहीं हो पाया है.

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पहले प्लांट लगता, तब होती कचरे की डंपिंग : आशा लकड़ा

झीरी में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं लगने के सवाल पर सोमवार को ही न्यूज विंग संवाददाता ने रांची की मेयर आशा लकड़ा से बातचीत की थी. उनका कहना था कि शहर में कचरे का उठाव तो सही तरीके से किया जा रहा है, लेकिन अभी भी झीरी में प्लांट नहीं लग पाया है. हालांकि, मेयर ने यह भी कहा कि इसपर अभी काम चल रहा है. संबंधित कंसल्टेंसी यहां कचरे का निष्पादन करने का प्रयास कर रही है. वहीं, 2011 में प्लांट लगने की बनी योजना के सवाल पर मेयर आशा लकड़ा का कहना था कि 2016 में निगम की बोर्ड बैठक में इस विषय पर एक प्रस्ताव लाया गया था. उस वक्त उन्होंने यही कहा था कि झीरी में पहले प्लांट लगाया जाये, उसके बाद कचरे की डंपिंग हो. इसके बावजूद प्लांट तो नहीं लगा, लेकिन कचरे की डंपिंग होती रही. नतीजा यह हुआ कि यहां लाखों टन कूड़े का पहाड़ खड़ा हो गया.

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