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बोर्ड की बैठक में होनेवाले हंगामे की बदनामी से बचने के लिए RMC ने मीडिया को किया बैन

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Ranchi : नौ अक्टूबर (मंगलवार) को भी हर माह की तरह रांची नगर निगम बोर्ड की बैठक प्रस्तावित थी. मेयर आशा लकड़ा, डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय, नगर आयुक्त मनोज कुमार, उपनगर आयुक्त संजय कुमार, इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी, निगम के सभी पार्षद सहित पत्रकारों का समूह उक्त बैठक में उपस्थित थे. इसी बीच नगर आयुक्त का निर्देश सामने आया. उन्होंने कहा कि सभी मीडिया बंधुओं से अनुरोध है कि वे बोर्ड बैठक से बाहर चले जायें. यह निगम बोर्ड की बैठक है. इस पर कुछ पार्षदों ने ताली बजाकर उनके निर्देश का समर्थन भी किया. हालांकि इस आदेश के बाद निगम की खबरों के लिए बने “rmc whatsapp group” में सभी पत्रकारों ने अपना विरोध भी जताया. कुछ माह पूर्व पदभार संभालनेवाले नगर आयुक्त मनोज कुमार इसकी अनदेखी की कि पहले की सभी बोर्ड बैठक में मीडिया को कवरेज करने दिया जाता था. उनका यह आदेश बताता है कि उन्हें शायद पता था कि कई मुद्दों पर इस बैठक में पार्षदों और अधिकारियों के बीच हंगामे की स्थिति बननेवाली थी. इसी को छिपाने के लिए उन्होंने शायद मीडिया को बैन कर दिया. उनका यह निर्देश खुद मोदी सरकार के पारदर्शिता के दावे पर सवाल खड़ा करता है. सवाल उठ रहा है कि जब पहले से ही यह निर्धारित था कि मीडिया को बैठक में नहीं आने देना है, तो उन्होंने “rmc whatsapp group” में क्यों नहीं यह बात कहने का आदेश अपने पीआरओ को दिया. जबकि, वह खुद इस ग्रुप के एडमिन हैं. उन्हें यह मालूम होना चाहिए था कि निगम के ही पीआरओ ने मीडिया से जुड़े लोगों को बैठक में आने का निमंत्रण दिया था.

वाट्सऐप ग्रुप में पत्रकारों को बैठक के कवरेज के लिए दिया गया निमंत्रण.

संविधान में नहीं है मीडिया पर्सन का जिक्र : नगर आयुक्त

मंगलवार को होनेवाली बोर्ड बैठक में कई मुद्दों पर संघर्ष की स्थिति होनेवाली थी. इसमें सबसे प्रमुख क्षेत्र सभा के प्रतिनिधियों के मनोनयन हेतु समिति गठित करना प्रमुख था. शायद इसी को देख नगर आयुक्त ने पुराने नियमों को दरकिनार कर सभी पत्रकारों को बैठक से बाहर जाने का निर्देश दिया. कुछ पत्रकारों ने इस पर अपनी आपत्ति भी जतायी, लेकिन नगर आयुक्त ने कहा कि यह बोर्ड की बैठक है. बैठक का जो संविधान है, उसमें मीडिया पर्सन का जिक्र नहीं है.

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पत्रकारों ने कहा- अंदर कोई बड़ी सेटिंग चल रही है

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नगर आयुक्त के निर्देश के बाद “rmc whatsapp group” से जुड़े कई पत्रकारों ने अपना रोष भी जताया. उन्होंने लिखा कि यह तो पत्रकारों के अधिकार का हनन करना हुआ. बोर्ड बैठक में सफाई संबंधी विषय पर भी प्रमुखता से चर्चा होनी थी, जिसमें एस्सेल इन्फ्रा के पदाधिकारी भी शामिल हुए थे. मीडिया को बाहर करने का मतलब है कि निगम के अंदर कोई बड़ी सेटिंग चल रही है. मीडिया के कुछ लोगों ने उन्हें बोर्ड बैठक को लेकर दिये निमंत्रण पर भी सवाल खड़ा किया.

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कुछ पार्षदों ने कहा- नगर आयुक्त के निर्देश ने बोर्ड बैठक की पारदर्शिता पर रोक लगायी

पूरे मामले पर जहां कुछ पार्षदों ने नगर आयुक्त के दिये आदेश का समर्थन किया, वहीं कुछ ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा कि यह तो नगर आयुक्त का गलत आदेश है. निगम की कई घटनाओं के सच को जनता के समक्ष लाने का काम इन्हीं मीडियावालों ने किया है. इसमें वर्तमान मेयर और डिप्टी मेयर के बीच के पूर्व में हो चुके संघर्ष, ध्वस्त हो चुकी शहर की सफाई व्यवस्था, पार्षदों के अधिकारों का हनन, निगम में बढ़ते भ्रष्टाचार सहित कई मुद्दे शामिल हैं. लेकिन, अचानक नगर आयुक्त के निर्देश ने एक तरह से बोर्ड बैठक की पारदर्शिता पर रोक लगाने का काम किया है.

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