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#Collegium_System पर राजद को संदेह, कहा, यह भी वही करता है, जो RSS करना चाहता है

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NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम सिस्टम फिर से चर्चा में है. बिहार में प्रमुख विपक्षी दल राजद ने जजों की नियुक्ति वाले कॉलेजियम सिस्टम पर हमला बोला है. जान लें कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा हाल ही में आरक्षण के दावे को मौलिक अधिकार नहीं बताये जाने के बाद राजद इस मुद्दे पर लगातार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलावर है.

इसी क्रम में राजद ने भाजपा सरकार के साथ-साथ जजों की नियुक्ति वाले कॉलेजियम सिस्टम पर हमला बोला है. राजद द्वारा ट्वीट कर आरोप लगाया गया है कि कॉलेजियम सिस्टम के तहत बहुजनों को दरकिनार किया जाता है.

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संघी ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति हुई!

ट्वीट में कहा गया है कि पीएम मोदी ने कॉलेजियम का दबे सुर से यह सोच कर विरोध किया था कि न्यायपालिका में चुन चुनकर संघियों को लायेंगे. राजद ने तंज कसा कि फिर उन्हें संघी ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति हुई! सोचा कॉलेजियम हटा तो आरक्षण लागू करना पड़ जायेगा. कहा कि कॉलेजियम भी तो वही करता है जो संघी करना चाहते हैं. यानी बहुजनों को दरकिनार करता है. यह सोच का मोदी शांत हो गये.

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आरक्षण के मुद्दे पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर हमला  

राजद नेता तेजस्वी यादव ने आरक्षण के मुद्दे पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोला था. उन्होंने नीतीश कुमार पर RSS के सामने आत्मसमर्पण करने का आरोप लगाते हुए नीतीश कुमार को नीति, सिद्धांत विहीन बताया था. सोशल नेटवर्किग साइट फेसबुक पर राजद नेता ने लिखा था, नीतीश कुमार जी ने पूरी तरह से आरएसएस-भाजपा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. उन्होंने तब CAA,NPR,NRC पर केंद्र को समर्थन देने के बावजूद बात भी नहीं की थी और अब आरक्षण नीति के ख़त्म करने पर भी घातक रूप से चुप है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने पर विचार 

राजग की सहयोगी लोजपा के नेता केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने शुक्रवार को कहा था कि एससी/एसटी समुदायों के लिए नौकरियों में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले में सुधार’ के लिए सरकार को एक अध्यादेश लाना चाहिए.

पासवान ने यह भी कहा था कि इस तरह के सभी मुद्दों को संविधान की ‘नौवीं अनुसूची” में डाल देना चाहिए ताकि उन्हें न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर रखा जा सके. कहा था कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने और इस विषय पर कानूनी राय लेने की सोच रही है.

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