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मजदूर मसीहा कहे जानेवाले सूर्यदेव सिंह की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने उमड़ी भीड़

Dhanbad:  झरिया के चार बार विधायक रह चुके  स्व सूर्यदेव सिंह की शनिवार को 28वीं पुण्यतिथि मनायी गयी. इस मौके पर उनको श्रद्धांजलि देने के लिए भीड़ उमड़ी. मौके पर झरिया के कतरास मोड़ पर श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया.

धनबाद जेल में बंद होने के कारण सूर्यदेव सिंह के पुत्र, विधायक संजीव सिंह समारोह में उपस्थित नहीं थे. संजीव की तरफ से उनकी पत्नी रागिनी सिंह ने श्रद्धांजलि समारोह को सफल बनाने की जिम्मेवारी संभाली.

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इन लोगों ने दी मजदूर नेता को श्रद्धांजलि

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झरिया की पूर्व विधायक व जमसं की महामंत्री कुंती देवी ने सबसे पहले दिवंगत  सूर्यदेव सिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी. इसके बाद धनबाद के सांसद पशुपतिनाथ सिंह, विधायक राज सिन्हा, पूर्व सांसद रविंद्र पांडेय, पूर्व मंत्री अपर्णा सेनगुप्ता, पुत्र सिद्धार्थ गौतम, पुत्री किरण सिंह, बहु रागिनी सिंह आदि ने स्व.  सूर्यदेव सिंह को श्रद्धांजलि दी.

इस दौरान सूर्यदेव सिंह अमर रहे के नारे लगे. जमसं  कार्यालय में 24 घंटे से चला आ रहा अखंड हरि कीर्तन का समापन पुत्र सिद्धार्थ गौतम ने पूजा कर किया.

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 मजदूरों के मसीहा कहलाते रहे सूर्यदेव

यहां बता दें कि बहुचर्चित सूर्यदेव सिंह, एक पहलवान के रूप में बलिया यूपी से झरिया आये. और 16 वर्ष के बाद झरिया के विधायक बने. सूर्यदेव सिंह यूपी बलिया के गोन्हिया छपरा गांव के एक किसान परिवार में 1939 में जन्मे थे. प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई थी. 1961 में वे झरिया आए. उस समय उनकी ख्याति पहलवान के रूप में थी. उन्होंने 1964 से 1974 तक विभिन्न मजदूर संगठनों में रहकर श्रमिकों की सेवा की राह पकड़ी. जेपी आंदोलन में  सूर्यदेव सिंह ने खुलकर भागीदारी निभाई. वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर उन्होंने झरिया विधानसभा से चुनाव लड़ा और पहली बार विधायक बने. उसी वर्ष जनता मजदूर संघ मजदूर संगठन बनाया. मजदूरों के हितों के लिए इसी संगठन के माध्यम से वे अंत तक लड़ाई लड़ते रहे. 1977 से लेकर 1991 तक वह झरिया क्षेत्र के विधायक रहे. 15 जून 1991 को दिल का दौरा पडऩे से आरा में उनका निधन हो गया.

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