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रिम्स के जिस कैंसर विंग पर सरकार 82 करोड़ से अधिक कर चुकी है खर्च, वहां हैं सिर्फ दो डॉक्टर

कैंसर के इलाज के लिए राज्य सरकार दूसरे अस्पतालों को देती है 25 करोड़

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Ranchi : रांची के कांके में टाटा द्वारा संचालित होनेवाले कैंसर अस्पताल का शनिवार को शिलान्यास होना है. यह राज्य के कैंसर पीड़ित मरीजों के लिए अच्छी खबर है, पर इससे पहले भी राज्य के पास मरीजों के लिए सरकारी कैंसर विंग है, जहां मरीज मुफ्त में इलाज करा सकते हैं. यह राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में कैंसर के रोगियों के लिए अलग से कैंसर विंग है. इस पर सरकार अब तक 82 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, पर इसका दुखद पहलू यह है कि इसके निर्माण के चार साल बाद भी यहां कैंसर रोग के स्पेशलिस्ट के नाम पर मात्र दो डॉक्टर हैं. डॉक्टर की कमी के बावजूद यहां महीने में करीब 600 नये मरीज आते हैं, पर स्पेशलिस्ट डॉक्टर के आभाव के कारण सभी को दूसरे शहरों में इलाज के लिए रेफर कर दिया जाता है. टाटा कैंसर अस्पताल की स्थापना सराहनीय कदम है, पर राज्य का स्वास्थ्य विभाग रिम्स के कैंसर विभाग और राज्य के कैंसर मरीजों के प्रति कितना बेपरवाह है, यह स्थापना के चार साल के बाद भी डॉक्टरों का न होना सत्यापित करता है. वह भी उस स्थिति में, जब यहां हर महीने करीब 600 नये मरीज इलाज के लिए आते हैं.

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अत्याधुनिक उपकरण खरीदने के लिए अप्रैल में मिले थे 38.50 करोड़

रिम्स प्रबंधन को इसी साल अप्रैल में कैंसर विंग को रिजनल कैंसर इंस्टीच्यूट के रूप में विकसित करने के लिए 38.50 करोड़ रुपये मिले थे. इसमें केंद्र सरकार ने 23.10 करोड़ और राज्य सरकार ने अपने मद से 15.40 करोड़ रुपये दिये हैं. इससे कैंसर अस्पताल के लिए आधुनिक उपकरण खरीदने की योजना थी. लेकिन, अगर डॉक्टर ही नहीं होंगे, तो अस्पताल में आधुनिक उपकरण का इस्तेमाल कितना हो पायेगा, यह समझ से परे है. रिम्स के डेंटल कॉलेज के सामने कैंसर विभाग को देखकर मरीजों को राहत तो मिलती है, पर अधिकतर मामलों में डॉक्टर खुद ही दूसरे अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दे देते हैं.

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सिर्फ दो डॉक्टर और तीन नर्स के भरोसे है विभाग

रिम्स का कैंसर विभाग सिर्फ दो डॉक्टर डॉ. अनूप और डॉ. रश्मि के भरोसे है. इसके अलावा इस विभाग में सिर्फ तीन नर्सें ही कार्यरत हैं. नर्सों के आभाव के कारण महिलाओं के कीमो के दौरान महिला प्यून से काम चलाना पड़ता है. डॉक्टरों का अभाव और रिम्स प्रशासन के इसके प्रति उदासीन रवैये के कारण प्रति वर्ष राज्य सरकार कैंसर मरीजों के इलाज के लिए अन्य अस्पतालों को करीब 25 करोड़ रुपये देती है.

रिम्स में फ्री में होता इलाज, टाटा कैंसर अस्पताल में देने होंगे पैसे

सरकार अगर रिम्स स्थित अपने कैंसर विंग पर ध्यान देकर सही पैमाने पर डॉक्टर और नर्स की नियुक्ति करती, तो उन मरीजों का इलाज बिना पैसे के हो पाता या बहुत कम खर्च में इलाज होता. रिम्स के सुपरस्पेशियलिटी परिसर में मौजूद कैंसर डिपार्टमेंट में अत्याधुनिक उपकरण लगाने के लिए अलग से 38 करोड़ रुपये केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से दिये गये हैं. वहीं, मरीज अगर टाटा कैंसर अस्पताल में इलाज कराने जायेंगे, तो उन्हें सीजीएचएस की दर से पैसे देने होंगे.

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एक रुपये टोकन मनी पर सरकार ने 23.5 एकड़ जमीन लीज पर दी है टाटा ट्रस्ट को

राज्य सरकार ने टाटा ट्रस्ट को एक रुपये की टोकन मनी पर रिनपास में 23.5 एकड़ जमीन 30 साल के लिए लीज पर दी है. टाटा ट्रस्ट द्वारा खोले जानेवाले इस अस्पताल में इलाज सीजीएचएस की दर से होगा और झारखंड के मरीजों के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी. हालांकि, टाटा ट्रस्ट का मुंबई स्थित कैंसर अस्पताल मात्र 4.5 एकड़ में ही स्थापित है.

मैं छुट्टी पर घर आ चुका हूं, अस्पताल जाकर ही बता पाऊंगा कि कितने डॉक्टर हैं और नियुक्ति प्रक्रिया का क्या हुआ.

-डॉ आरके श्रीवास्तव, निदेशक, रिम्स

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