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हाल-ए-रिम्स : एक सप्ताह में लापरवाही ने ली दो जिंदगियां, बड़ा सवाल कौन जिम्मेदार ?

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-मामूली ऑपरेशन के लिए आया था युवक लेकिन फिर भी नहीं बची जान.
-दूसरे मामले में हाईकोर्ट के निर्देश को भी डाॅक्टरों ने किया था नजरअंदाज.

Ranchi : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में राज्य भर के मरीज धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर के पास स्वास्थ्य ठीक करने की आस से आते हैं. पर रिम्स परिसर में मिलने वाले धरती के भगवान लापरवाह हो गये हैं. लापरवाही का आलम ये कि एक सप्ताह के अंदर दो मरीजों की जान चली गयी है.

एक मामले में तो रिम्स के डाॅक्टरों ने हाईकोर्ट के निर्देश तक को अनसुना कर दिया. दूसरे मामले में एक मामूली ऑपरेशन के लिए खुद से चलकर आये युवा की जान चली गयी. सिर्फ ये दो मामले ही नहीं हैं, प्रत्येक दिन मरीज डाॅक्टरों की लापरवाही की शिकायत एक दूसरे से करते वार्डों में आसानी से दिख जाते हैं, पर वो मीडिया में आकर बोलने से डरते हैं.

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यही वजह है कि रोज दिन होने वाली लापरवाही के कारण मौत सामने नहीं आ पाते हैं. एक सप्ताह में सिर्फ लापरवाही से दो मौत बड़ी बात है. जबकि सरकार गरीबों के हर संभव ईलाज के लिए अरबों खर्च कर रही है.

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खुद चलकर पहुंचा था रिम्स, डाॅक्टरों की लापरवाही से चली गयी जान

15 साल का मंगल मुंडा रिम्स कें ट्रामा सेंटर के बेड नंबर 9 में एडमिट था. परिजन रायमुनी ने बताया कि जब एडमिट करने के लिए उसे लेकर आए थे तो उसने खुद से पर्ची कटायी थी. साथ ही खुद ही अपना सारा जांच कराया था, ट्राॅली का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया था. सीढ़ी भी खुद से ही चढ़ा था. उन्होंने बताया कि बच्चा बिल्कुल स्वस्थ था खुद से खाना सब खा रहा था.

रायमुनि कहतीं हैं कि इलाज के दौरान डाॅक्टर बुलाने पर भी समय पर नहीं आते थे. सिर्फ जूनियर डाॅक्टर और नर्स ही रहती थी. रायमुनि का कहना है कि मंगल की जान डाॅक्टरों की लापरवाही से चली गयी. बार बार बुलाने के बाद भी डाॅक्टर नहीं आते थे. जिसकी वजह से इलाज सही से नहीं हो सका और उसकी मौत हो गयी.

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हमने सभी दवाईयां दी, पर डाॅक्टर सिर्फ नींद की दवा देते रहे

रायमुनि ने बताया कि हमने डाॅक्टरों के लिखे मुताबिक सभी दवाईयां खरीदी और दी भी. लेकिन डॉक्टर सिर्फ नींद की दवा देते रहे. जिसकी वजह से वह पूरे वक्त सोता रहता था. लिखी हुई दवाई भी नहीं खा पता था क्योंकि वह हर समय नींद में रहता था.

साथ ही रायमुनि ने यह भी बताया कि डॉक्टरों ने इलाज से पहले एक बांड भी मरीज और उसकी मां से साइन करा लिया था, जिसमें यह लिखा हुआ था कि मरीज बेहोश भी हो सकता है. लेकिन डॉक्टरों ने जान जाने के खतरे के बारे में बताया तक नहीं था.

वहीं ऑपरेशन के वक्त मंगल बेहोश था लेकिन उसके बाद वह जैसे ही होश में आया तड़पने लगा. यह देख हमने कई बार डॉक्टर को बुलाया पर ना तो कोई डॉक्टर आए और न ही कोई नर्स आयी.

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हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं रखा ख्याल

वहीं एक और मौत का मामला भी रिम्स में सामने आया है. लातेहार की लूटी गांव की सुनिता देवी (बदला हुआ नाम) की जान भी रिम्स के डाॅक्टरों के लापरवाही से ही चली गयी. इस मामले में तो हाईकोर्ट तक ने सही इलाज के सख्त आदेश दिये थे.

स्वास्थ्य सचिव और रिम्स निदेशक को कोर्ट बुलाकर आदेश दिया था. बावजूद लापरवाही बरती गयी. अत्यधिक खून निकल जाने से जान चली गयी. सुनिता के पति ने बताया कि डाॅक्टर अनिल कुमार की देखरेख में सुनिता का इलाज चल रहा था. पर ऑपरेशन के दौरान अनिल कुमार थे ही नहीं.

खून लगातार निकलता ही जा रहा था किसी ने रोकने का कोई उपाय नहीं किया. जिसकी वजह से सुनिता की मौत हो गयी. इस मामले में भी बांड जबरजस्ती भरने को कहा गया था. उल्लेखनीय है कि सुनीता देवी रेप पीड़िता थी. और इसी वजह से कोर्ट ने इलाज में कोई भी लापरवाही नहीं बरतने को कहा था.

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