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रिम्सः जिस पद पर अधिकतम तीन वर्षों तक लेनी थी सेवा, वहां वर्षों से जमे हैं डॉक्टर

एनाटॉमी विभाग में दो महिला डॉक्टर शिक्षक भी हैं और स्टूडेंट भी

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Ranchi: रिम्स में नियमों की अवहेलना करने का एक और मामला सामने आया है. रिम्स के एनाटॉमी विभाग में जिस पद पर अधिकतम तीन सालों तक सेवा ली जानी थी, वहां 8-9 वर्षों से चिकित्सक जमे हैं. रिम्स के एनाटॉमी विभाग में ट्यूटर के पदों पर नियम के मुताबिक कोई भी चिकित्सक तीन वर्षों तक ही सेवा दे सकता है. पर इस पद पर लोग 8-9 सालों से जमे हुए हैं. जिससे कई मेधावी चिकित्सकों को मौका नहीं मिल पा रहा है. रिम्स प्रबंधन से मांगी गयी सूचना में यह जवाब दिया गया है कि ट्यूटर का कार्यकाल अधिकतम तीन सालों का ही होता है.

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दो महिला डॉक्टर पढ़ती भी हैं और पढ़ाती भी हैं

डॉ नमिता लूगुन और डॉ कैमेलिया चंद्रा दोनों एनाटॉमी विभाग की शिक्षक और स्टूडेंट दोनों हैं. डॉ नमिता लुगून 31 जुलाई 2010 से और डॉ कैमेलिया चंद्रा 31 जुलाई 2011 से एनाटॉमी विभाग में ट्यूटर के पद पर कार्यरत हैं. वहीं डॉ कैमेलिया चंद्रा 31 मई 2017 से और डॉ नमिता लुगून 31 मई 2018 से इसी विभाग के अंतर्गत पीजी विभाग की छात्रा भी हैं. दोनों एक साथ होना नियमों की अवहेलना करता है और साथ ही विभाग के अलावा रिम्स प्रबंधन पर सवालिया निशान भी खड़ा करता है.

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ट्यूटर के पद के लिए पीजी डॉक्टर ही थे योग्य, पर नियमों की अनेदखी कर हो गयी नियुक्ति

ट्यूटर के पद के लिए जो विज्ञापन निकाला गया था, उसमें योग्यता मापदंड पीजी डॉक्टर था. विज्ञापन में स्पष्ट था कि अभ्यर्थी मेडिकल डिग्री में पोस्ट ग्रेजुएट होना चाहिए. किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से एमडी, एमएस या डीएनबी होना आवश्यक था. पर जब डॉ नमिता लुगून और डॉ कैमेलिया चंद्रा ने 2018 और 2017 के सत्र में अपना नामांकन कराया है, तो उस स्थिति में किस आधार पर वो पिछले 8-9 साल से ट्यूटर के पद पर कार्यरत हैं.

ये डॉक्टर्स हैं ट्यूटर के पद पर कार्यरत

  • डॉ राजीव रंजन 31 जुलाई 2009 से
  • डॉ नमिता लूगुन 31 जुलाई 2010 से
  • डॉ कैमेलिया चंद्रा 31 जुलाई 2011 से
  • डॉ अन्नू बॉबी 20 नवंबर 2018
  • डॉ रिमा कंचन खलखो 10 नवंबर 2018
  • डॉ अलका रश्मि नाग 10 नवंबर 2018 से

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