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रिम्स : संकायाध्यक्ष ने निदेशक को बताया, भ्रामक है रैगिंग से जुड़ी खबर

Ranchi: राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में रैगिंग मामले को लेकर छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष ने रिम्स निदेशक को एक पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने गुरुवार को अस्पताल में कथित तौर पर हुए रैगिंग मामले को पूरी तरह से  भ्रामक बताया है.

उन्होंने बताया है कि मामला सामने आने के बाद डीन स्टूडेंट वेलफेयर ने अस्पताल परिसर में हुए रैगिंग की सत्यता को जानने का काम किया था. इस दौरान कई अधीक्षकों ने विभिन्न हॉस्टलों की जांच की थी. जांच करने वाले अधीक्षकों में राजीव रंजन, जितेंद्र कुमार, अशोक कुमार शर्मा, उमाशंकर केसरी, लखन मांझी, स्वाति शर्मा और रेखा शर्मा शामिल थे. इस दौरान उन्होंने 8:30 से 10:00 बजे तक प्रथम वर्ष के छात्रों से वस्तु स्थिति की जानकारी ली. लेकिन रैगिंग से जुड़े सभी मामले भ्रामक पाए गए. पुनः 12:00 से 12: 30 के बीच आकस्मिक निरीक्षण किया गया, लेकिन इस दौरान भी रैगिंग से जुड़े किसी भी मामले की शिकायत सामने नहीं आई.

निर्देशक को लिखे पत्र में कहा गया है कि छात्र छात्राओं को हॉस्टल आवंटन के पश्चात बीते 28 फरवरी से हर दिन अधीक्षकों द्वारा सभी हॉस्टलों का निरंतर निरीक्षण किया जाता है. इस दौरान सभी छात्रों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर उनके साथ किसी तरह की भी रैगिंग की जाती है तो तत्काल इसकी सूचना दें. प्रथम वर्ष के सभी छात्रों के पास सभी अधीक्षकों का व्हाट्सएप मोबाइल नंबर उपलब्ध है. इन्हें कहा गया है कि उनके साथ अगर रैगिंग होता है तो वे केवल SOS लिखकर व्हाट्सएप करें, उनके पास मदद तत्काल पहुंच जाएगी.

बता दें कि प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में शुक्रवार को यह खबर प्रमुखता से छापी गई है कि राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) में प्रतिबंध के बावजूद एमबीबीएस के नये छात्रों के साथ रैगिंग हो रही है. इंट्रोडक्शन (परिचय) के नाम पर सीनियर छात्र (2018 व 2019 बैच) नये छात्रों को प्रताड़ित कर रहे हैं. बुधवार रात को ठीक ऐसा ही एक वाकया हुआ. सीनियर छात्रों ने नये छात्रों को कॉमन रूम में तीन घंटे तक खड़ा कराये रखा. उनसे मास्क हटाने को कहा गया. इसके बाद उनके मुंह पर सिगरेट की धुआं फेंका गया. एक-दूसरे के साथ अभद्र कार्य करने को कहा गया. प्रताड़ना का यह दौर रात 12:30 बजे तक चला.

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