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रिम्‍स में हड़ताल : मरीजों को गोद में उठाकर परिजन पहुंचा रहे इमरजेंसी वार्ड

सुरक्षाकर्मियों के हड़ताल में जाने से मरीजों के परिजन हो रहे परेशान

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Ranchi : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में तैनात 378 सुरक्षाकर्मियों को हटाने के निर्देश मिलते ही सुरक्षाकर्मी अनिश्चितकालिन हड़ताल में चले गये हैं. वे सभी रिम्स निदेशक के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं. सुरक्षाकर्मियों और ट्रॉली मैन के हड़ताल में चले जाने से रिम्स की व्यवस्था बेपटरी नजर आयी. कई मरीज वार्ड में पड़े मरीजों के शव को उठाने के लिए इंतजार करना पड़ा. किसी को अपने मरीजों को गोद में उठाकर मरीजों को इमरजेंसी तक पहुंचाया. वार्ड से लेकर एमरजेंसी तक मरीजों के परिजन खुद मरीजों को ट्रॉली में धकेलते नजर आये. ऐसा लगा मानों सुरक्षाकर्मियों के हड़ताल में चले जाने से रिम्स के बेपटरी हुए हाल को मरीजों के परिजन खुद धकेल रहे हों.

सुरक्षाकर्मियों की मांग है कि उन्हें काम पर रखा जाये

रिम्स में तैनात सुरक्षाकर्मी ही ट्रॉलीमैन का काम करते हैं. हड़ताल में गये सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि सुरक्षाकर्मी और ट्रॉलीमैन रिम्स में कई सालों से अपनी सेवा दे रहे हैं, बावजूद रिम्स प्रबंधन उनकी अनदेखी कर रहा है. ऐसे में उनके परिवार पर आर्थिक संकट का मंडराने लगा है. रोजगार के संकट के साथ-साथ उनके परिवार के भरण पोषण की चिंता सताने लगी है. सुरक्षाकर्मियों की मांग है कि उन्हें काम पर रखा जाये.

हड़ताल को समर्थन करने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय भी पहुंचे

पिछले दिनों रिम्स के शाषी परिषद की बैठक में फैसला लिया गया है कि एक मार्च से रिम्स की सुरक्षा व्यवस्था पूर्व सैनिक बलों को दिया जायेगा, साथ ही निजी सुरक्षाकर्मियों और ट्रॉली मैन की सेवा समाप्त कर दी जायेगी. हड़ताल में गये सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि शाषी परिषद के बैठक में जो फैसला लिया गया है वो उनके हित में नहीं है. सुरक्षाकर्मियों के हड़ताल को समर्थन करने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय भी पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि रिम्स से बेरोजगार हो रहे हैं, सुरक्षाकर्मियों का हल निकाले रिम्स निदेशक. वार्ड 9 की पार्षद प्रीति‍ कुमारी का कहना है कि इनके मांग पर सरकार को जरूर विचार करना चाहिए.

हड़ताल पर जाने से नहीं होगा लाभ, काम पर लौटें सुरक्षाकर्मी : रिम्स निदेशक

रिम्स डायरेक्टर ने आश्वासन देते हुए कहा कि हड़ताल पर जाने से किसी भी समस्या का समाधान नहीं होगा. कोई लाभ नहीं होगा. ट्रॉलीमैन और सुरक्षाकर्मियों के प्रतिनिधियों से बात कर समाधान निकाला जायेगा. साथ ही बताया कि शाषी परिषद की बैठक में एजेंसी को हटाने का निर्णय लिया गया था, पर इनकी परेशानी को आगे होने वाले शाषी परिषद की बैठक में रखा जायेगा.

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