न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

रिम्‍स: महीनों भर्ती होने के बाद बिना इलाज कराये लौटना चाहते हैं मरीज

प्रबंधन का रवैया ढीला, न्यूरो व आर्थो वार्ड का हाल सबसे बुरा

100

Ranchi: मरीज अस्पताल में इलाज कराने आते हैं. लेकिन, रिम्स प्रबधंन का रवैया ऐसा है कि कई मरीज बिना इलाज के ही वापस जाना चाह रहे हैं. रिम्स में भर्ती मरीजों को इलाज कराने में काफी कठिनाई हो रही है. महीनों अस्पताल में भर्ती रहने के बाद भी मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है. मजबूरन मरीजों को बगैर इलाज कराये घर वापस लौटना पड़ रहा है. कई मरीज तो ऑपरेशन के इंतजार में अस्पताल छोड़ने को विवश है. मरीजों का कहना है कि अस्पताल में बीमारी की इलाज कराने आये थे, लेकिन बीमारी लेकर लौट रहे हैं. कहीं और इलाज करायेंगे. यहां सबसे बुरा हाल न्यूरो, ऑर्थो और मेडिसीन वार्ड का है.

इसे भी पढ़ें :बकोरिया कांड की जांच करेगी सीबीआइ, सीआइडी की जांच सही दिशा में नहीं : हाइकोर्ट

छह माह से भर्ती है संतोष

न्यूरों में भर्ती संतोष कुमार ने बताया कि वे धनबाद के रहने वाले हैं और छह माह से भी अधिक समय से अस्पताल में भर्ती हैं. अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण उनका इलाज नहीं हो पा रहा है. इतने दिनों तक रिम्स में रहने में भी परेशानी हो रही है. कुछ दिनों तक रैन बसेरा में गुजर बसर किया. लेकिन, बार-बार जांच और इलाज कराने अस्पताल आना पड़ता, इसलिए अस्पताल में रहना मुनासिफ समझा. दरअसल संतोष कुमार को एक हादसे के दौरान पांव में और कमर में चोट लगी थी. जांच कराने के बाद न्यूरो में भर्ती किया गया था. पांव में ऑपरेशन होना था. लेकिन, डॉक्‍टर ने बताया कि जख्म है. इसे सुखने के बाद ही ऑपरेशन हो पायेगा. उन्होंने बताया कि अबतक 50 हजार रुपए से भी ज्यादा जांच और दवाईयों में खर्च हो चुका है. संतोष के भाई का कहना है कि अब और धैर्य नहीं रहा हम वापस जाना चाहते हैं.

इसे भी पढ़ें :बकोरिया कांड : न्यूज विंग ने न्याय के लिए चलाया था अभियान, पढ़िये सभी खबरें एक साथ

इलाज की आस में फर्श पर ही पड़े रहते हैं मरीज

रिम्स की स्थिति ऐसी है कि इलाज कराने आये मरीज महीनों फर्श पर ही पड़े रह जाते हैं. वार्ड में बेड नहीं मिलने के कारण उनका इलाज फर्श पर ही शुरु हो जाता है. इसके बाद मरीजों का घर यही फर्श बन जाता है. इनके साथ रहने वाले अटेंडेंट एवं मिलने के लिए आने वाले परिजन भी फर्श पर ही बैठ कर अपने मरी६ज का हाल-चाल लेते हैं. यदि मरीज का इलाज का समय पर होगा तो फर्श पर इलाज करने की नौबत बहुत कम आयेगी.

डाक्टरों की कमी बन रही है समस्या

रिम्स में डॉक्टर और नर्स की भारी कमी है. मरीजों के समय पर इलाज न होने की सबसे बड़ी वजह यह भी है. ऑर्थो वार्ड के विभागाध्यक्ष डॉ एलबी मांझी ने बताया कि ऑर्थो विभाग में कम से कम 25 डॉक्टर होने चाहिये. लेकिन, मात्र 3 डॉक्टर ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं. एसिसेंट प्रोफेसर तो एक भी नहीं है, जबकि सिर्फ एक प्रोफेसर पर पूरी जिम्मेवारी है. सीनियर डॉक्टर के नहीं रहने से इलाज में बाधा आती है. वहीं इस मामले में प्रबधंन का कहना है कि रिक्त पदों पर बहाली के लिए रोस्टर तैयार कर लिया गया है. लेकिन बहाली की प्रकिया रुकी हुई है. जबकि नर्सों की बहाली प्रकिया शुरु हो चुकी है.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: