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Rims News: अपनी डिस्पेंसरी में दवाई नहीं, जन औषधि भी कंगाल, अगले हफ्ते बंद हो जाएगी जेनरिक की दुकान

Ranchi: झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में मरीजों की परेशानी जल्द ही बढ़ने वाली है. वहीं एकबार फिर से दवा के लिए मरीजों को प्राइवेट मेडिकल्स की दौड़ लगानी होगी. चूंकि रिम्स की अपनी डिस्पेंसरी में दवाएं ही नहीं है. वहीं रिम्स का जन औषधि भी कंगाल हो गया है. जहां पर गिनती की दवाएं हीं बचीं हैं. अब स्थिति यह है कि अगले हफ्ते कैंपस में चल रही जेनरिक दवाई दुकान भी बंद हो जाएगी. इसके बावजूद रिम्स प्रबंधन मरीजों को दवा उपलब्ध कराने का इंतजाम नहीं कर रहा है. जिसका खामियाजा इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ेगा.

जन औषधि में दवा की सप्लाई नहीं

हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को फिर से चालू करने को लेकर टेंडर किया गया है. ऐसे में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक मरीजों को जन औषधि केंद्र से दवा उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया था. वहीं इसके लिए प्रबंधन ने जन औषधि केंद्र के सप्लायर को दवा का आर्डर भी कर दिया था. पर आजतक दवा की सप्लाई ही नहीं हुई. जबकि डायरेक्टर ने 31 जुलाई को ही कहा था कि अगले हफ्ते से मरीजों को दवाएं जन औषधि केंद्र में मिलने लगेगी. वहीं टेंडर फाइनल होने के बाद दुकान संचालक को हैंडओवर कर दिया जाएगा.

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डिस्पेंसरी में गिनती की दवा

हॉस्पिटल में सेंट्रल इमरजेंसी के सामने ही रिम्स की डिस्पेंसरी है. जहां से मरीजों को फ्री में दवाएं उपलब्ध कराई जाती है. लेकिन इस डिस्पेंसरी में भी मात्र दो दर्जन दवाएं ही उपलब्ध है. उसमें भी बुखार, पेट दर्द और एंटीबायोटिक दवाएं है. बाकी की दवा के लिए मरीजों को सीधे बाहर भेज दिया जाता है. जबकि पहले रिम्स के अलग-अलग विभागों में डिस्पेंसरी थी. जहां पर मरीजों को दरूरी दवाएं आसानी से मिल जाती थी. लेकिन आज ये डिस्पेंसरी बंद हो गए है.

ओपीडी में मरीजों की जेब पर डाका

ओपीडी में इलाज के लिए झारखंड के अलावा अन्य राज्यों से भी मरीज आते है. अलग-अलग डिपार्टमेंट में दिखाने के लिए आने वाले 2000 मरीजों को डॉक्टर दवाएं लिखते है. अब इन मरीजों को न तो जन औषधि से ही दवाएं मिल पा रही है और न ही डिस्पेंसरी से. वहीं अगले हफ्ते जेनरिक दवा की दुकान भी बंद हो जाएगी. जिससे कि ब्रांडेड दवाएं खरीदने में लोगों की जेब पर डाका पड़ेगा.

हाईकोर्ट ने भी गुरुवार को सुनवाई करते हुए रिम्स प्रबंधन ने नाराजगी जाहिर की थी. साथ ही पूछा था कि अबतक मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. ऐसे में मरीजों को सस्ती दवाएं कैसे मिलेगी. कोर्ट ने कहा कि आदेश देने के बाद भी रिम्स कैंपस में जेनरिक दवा केंद्र नहीं खोलने की वजह से गरीब मरीज कहां से सस्ती दवा की खरीदारी करेंगे. रिम्स के एडवोकेट ने कहा कि तत्काल सदर हॉस्पिटल में सप्लाई करने वाले को रिम्स की जनऔषधि केंद्र में दवा देने के लिए अप्रूवल दिया जा रहा है. दवा केंद्र कब तक चालू होगा. इसकी जानकारी देने के लिए उन्हें कुछ समय चाहिए.

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इस मामले में सर्जन सह पीआरओ डॉ डीके सिन्हा का कहना है कि दवाओं का आर्डर दिया जा चुका है. दवाएं आई कि नहीं इसके बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है. डिप्टी सुपरिटेंडेंट इसके बारे में बता सकते है. वहीं जब डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ संजय से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया.

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