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रिम्‍स के डॉक्‍टरों ने लावारिस मरीज को दिखाया बाहर का रास्‍ता, कुछ देर बाद मरीज ने तोड़ दिया दम

स्वास्थ्य मंत्री की फटकार के बाद रात में रिम्स प्रबंधन ने शव को रखवाया मॉर्चरी में

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Ranchi: एक ओर लावारिस लाशों के लिए कई संस्‍थाएं काम कर रही हैं और उनका अंतिम संस्‍कार करा रही हैं, वहीं दूसरी ओर लावारिस मरीजों को देखनेवाला कोई नहीं है. वे कहीं इलाज के लिए भी जाते हैं, तो उन्‍हें ठोकर ही मिलती है, चाहे वह अस्‍पताल रिम्‍स ही क्‍यों न हो. ऐसा ही अमानवीय नजारा रविवार को रिम्‍स में देखने को मिला. यहां एक लावारिस मरीज को डाक्टरों ने बाहर का रास्ता दिखा दिया. बीमारी से परेशान इस लावारिस मरीज को हॉस्पिटल के बाहर तड़पने के लिए छोड़ दिया गया. न्‍यूज विंग के पास इस मरीज का एक वीडियो है, जिसमें वह जिंदा तो दिख रहा है, लेकिन असहाय मृतप्राय दिख रहा है. पैरों में पट्टियां बंधी हुई थीं. मरीज के शरीर पर मक्खियां भिनभिना रही थीं. वह इस हालत में भी नहीं था कि कुछ बोल सके और अपने बारे में कुछ बता सके. हालांकि, रविवार की ही देर शाम इस लावारिस मरीज ने रिम्स के बाहर (रिम्स परिसर में) दम तोड़ दिया. उसके मरने के बाद भी उसका शव वहीं रिम्स के बाहर ही पड़ा रहा.

स्वास्थ्य मंत्री ने लगायी फटकार, तब शव रखा गया मॉर्चरी में

जब उस लावारिस मरीज की लाश रिम्स के बाहर ही पड़ी होने की सूचना स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी को रविवार की रात को मिली, तो उन्होंने तुरंत फोन कर रिम्स के डॉक्टरों  को फटकार लगायी. सूत्रों के मुताबिक, मंत्री ने रिम्स के डॉक्टरों को उस लावारिस मरीज की लाश को फौरन रिम्स के मॉर्चरी में में रखने का आदेश दिया. तब कहीं जाकर रिम्स प्रबंधन हरकत में आया और उस लावारिस मरीज की लाश को अपनी कस्टडी में लेकर उसे रिम्स के मॉर्चरी में रखवा दिया.

मरीजों के साथ डॉक्‍टर करते हैं बदसलूकी

दरअसल गंभीर रूप से बीमार यह व्यक्ति रिम्‍स में अपने इलाज की आस में आया था. लेकिन, हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने उसे बाहर कर दिया. मरीज बीमार हालत में ही हॉस्पिटल के बाहर तड़पता रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली. इस तरह की कार्यशैली से रिम्स अक्सर मानवता को शर्मसार करता रहा है. कभी जूनियर डॉक्टर इलाज की बजाय मरीज के परिजनों पर टूट पड़ते हैं, गाली-गलौज और मारपीट करते हैं, तो कभी अपना कर्तव्‍य भूलकर मरीज का इलाज किये बगैर ही उसे बाहर कर देते हैं. जीवित के साथ-साथ मरे हुए व्यक्तियों से भी रिम्स में संवेदनहीनता की जाती है. मृत शरीर जब रिम्स में लाया जाता है, तो उसे यूं ही कौओं का निवाला बनने के लिए छोड़ दिया जाता है.

रिम्‍स में इलाज से कतरा रहे मरीज

मरे ही व्‍यक्तियों के लिए कई संस्‍थाएं हैं, कोई उन्‍हें फ्री में एंबुलेंस मुहैया कराती है, तो कोई अंतिम संस्‍कार कराने का जिम्‍मा लेती है, लेकिन कोई मरीज लावारिस हालत में यहां किसी तरह पहुंचता है, तो रिम्‍स में उसे संवेदनहीनता का शिकार होना पड़ता है. यह सब देखने के बाद कितने लोग ऐसे हैं, जो राज्य के इस सबसे बड़े हॉस्पिटल में इलाज कराने से कतराते हैं. लोगों में यह धारणा बनती जा रही है कि रिम्स में जाने पर इलाज तो सही ढंग से हो नहीं पायेगा, उल्टे यहां इलाज कराने के बाद उनकी मौत निश्चित है. रिम्स, जिसका सालाना बजट करोड़ों में रहता है, उसके डॉक्सटरों और कर्मचारियों को सरकार हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराती है, लेकिन यहां के डॉक्टर अपने कर्तव्‍य का पालन सही ढंग से नहीं करते.

डालसा करती है लावारिस मरीजों की सहायता

लावारिस मरीजों के लिए सहायता करने का दावा करनेवाली संस्‍था डालसा की प्रतिनिधि अनिता सिंह का कहना है कि लावारिस मरीजों की हमें जैसे ही सूचना मिलती है, हम फौरन उनकी सहायता करते हैं और इलाज के लिए सरकारी अस्‍पतालों में इंतजाम कराते हैं. रविवार को रिम्‍स में किसी भी तरह के लावारिस मरीज की जानकारी हमें नहीं मिली.

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