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रिम्स के डाक्टरों ने किया शोध : कोरोना में स्टेरॉयड डेक्सामेथासोन की 12MG डोज 6MG से ज्यादा प्रभावशाली

पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छपे मेडिकल जर्नल में रिम्स का आया नाम

Anita Gupta, Ranchi

RANCHI : कोरोना के गंभीर मरीजों के सटीक इलाज के लिए रिम्स के क्रिटिकल केयर विभाग के चिकित्सकों का यूरोपियन देशों के चिकित्सकों के साथ चल रहा कोविड स्टेरॉयड -2 का शोध सफल रहा. लगातार 10 महीनों तक चले इस शोध के परिणाम का प्रकाशन 21 अक्तूबर 2021 को जर्नल ऑफ अमेरिका मेडिकल एसोसिएशन (jama) में हुआ.

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बता दें कि यह पहली बार है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे मेडिकल रिसर्च के जर्नल में रिम्स नाम आया है. रिसर्च में डेनमार्क के 11, स्वीडन के 2, स्वीजरलैंड के एक और भारत के 12 अस्पताल के चिकित्सकों ने हिस्सा लिया था. जिसमें रिम्स भी शामिल था. ऐसे में जर्नल ऑफ अमेरिका मेडिकल एसोसिएशन (jama) के अंतर्गत रिम्स का नाम आना बहुत बड़ी उपलब्धि है.

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शोध में बताया गया है कि स्टेरॉयड डेक्सामेथासोन की 6 एमजी डोज लेने वाले की तुलना में 12 एमजी डोज लेने वाले 5.7 प्रतिशत अधिक मरीज स्वस्थ हुए है.

कोविड स्टेरॉयड -2 के शोध के दौरान पांचों देश के चिकित्सक स्टेरॉयड डेक्सामेथासोन की डोज 6 एमजी और 12 एमजी पर ट्रायल कर रहे थे कि वेंटिलेटर पर गंभीर रूप से पड़े मरीज को ठीक करने के लिए कौन सी डोज ज्यादा प्रभावशाली है. ऐसे में उन्होंने लगातार 90 दिनों तक 490 मरीजों को 12 एमजी और 478 मरीजों को 6 एमजी की डोज दी. मरीजों को 10 दिन की डोज दी गयी.

इस दौरान उन्होंने पाया कि डेक्सामेथासोन के 12 एमजी की डोज, 6 एमजी की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली है. 12 एमजी के डोज से 68 प्रतिशत मरीज स्वस्थ हुए जबकि 6 एमजी की डोज लेने वाले मरीजों के स्वस्थ होने का प्रतिशत 62.3 ही रहा. ऐसे में 6 एमजी डोज लेने वाले मरीजों की मृत्यु 12 एमजी के डोज लेने वालों से 5.7 प्रतिशत अधिक हुई.

कोरोना के मरीजों के लिए स्टेरॉयड डेक्सामेथासोन की डोज 12 एमजी का प्रयोग, 6 एमजी से ज्यादा प्रभावशाली- डॉ मोहम्मद सैफ

रिसर्च के दौरान कोविड के मरीजों के लिए स्टेरॉयड डेक्सामेथासोन की डोज 12 एमजी का प्रयोग, 6 एमजी की तुलना में ज्यादा असरदार पाया गया है. जो कि कोविड के थर्ड वेब के दौरान संक्रमित मरीजों के लिए काफी कारगर सिद्ध होगा. लेकिन हमें इस बात का भी ख्याल रखना है कि किसी भी मरीज को एक दिन 12 एमजी से अधिक डोज ना दें. क्योंकि 12 एमजी से अधिक डोज देने पर इसके कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते है.

ऐसा कोविड के सेकंड वेब के दौरान हो चुका है. कई संक्रमितो ने एक दिन में डेक्सामेथासोन के 12 एमजी से ज्यादा डोज लिया. डोज लेने के बाद में ठीक तो हो गए, लेकिन ठीक होने के कुछ दिन बाद ब्लैक फंगस का शिकार हो गए. ऐसे में 12 एमजी से ज्यादा डोज प्रयोग हानिकारक हो सकता है. -डॉ मोहम्मद सैफ,क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट इंचार्ज

किन मरीजों पर किया गया रिसर्च

कोरोना के वैसे गंभीर संक्रमित मरीजों पर यह रिसर्च किया गया, जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे. उन्हे वेंटिलेटर पर 10 लीटर/ मिनट की दर से ऑक्सीजन सप्लाई की जा रही थी. संक्रमण के कारण वे निमोनिया की चपेट में आ गए थे. उनके लंग्स में भी संक्रमण फैल गया था. ऐसे मरीजों पर डेक्सामेथासोन के दोनों डोजो का रिसर्च किया गया.

डॉ प्रदीप भट्टाचार्य के नेतृत्व में टीम कर रही थी रिसर्च

रिम्स के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट व ट्रामा सेंटर के एचओडी डॉ प्रदीप भट्टाचार्य के नेतृत्व में यह टीम रिसर्च कर रही थी. इस टीम में डॉ मोहम्मद सैफ, डॉ सृष्टि किंडो, डॉ कृतिका राज, डॉ आस्था पोद्दार, डॉ आदित्य, अफताब अंसारी और मुश्ताक आलम शामिल थे.

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