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रिम्स के डॉक्टर, अधिकारी नहीं बनाते हैं अटेंडेंस, वर्षों से है बायोमेट्रिक मशीन खराब

1538 है रजिस्टर्ड, हाजरी बनती है सिर्फ 540. रिम्स में लगे 48 बायोमैट्रिक मशीनों में अधिकांश खराब.

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Chandan Choudhary
Ranchi : राजेंद्र प्रसाद आर्युविज्ञान संस्थान के डॉक्टरों को अपनी उपस्थिति बनाना पसंद नहीं है. डॉक्टरों के साथ-साथ यहां के अधिकारी, पदाधिकारी, कर्मचारियों को भी उपस्थिति दर्ज कराने में कोई दिलचस्पी नहीं रखते. तभी तो संस्थान में लगे लगभग 40 से भी ज्यादा बायोमेट्रिक अटेंडेंस मशीन कई वर्षों से खराब पड़े हैं लेकिन इसे बनवाने के प्रति किसी की भी सजगता दिखाई नहीं देती है. बायोमेट्रिक अटेंडेंस मशीन को बनवाने के स्थान पर एक वैकल्पिक साधन ढूंढ निकाला है.

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एक कमरे में एक मशीन और कम्प्यूटर लगवा दिया गया है, जहां बारी-बारी डॉक्टर, अधिकारी, पदाधिकारी व कर्मचारी सभी को अपना उपस्थिति दर्ज कराना है. लेकिन ऐसे कम ही डॉक्टर और अधिकारी है जो इस कमरे में आकर अपना उपस्थिति बनाते है. कई कर्मचारियों को तो यह नागवार ही गुजरता है. 03 नवंबर 2018 को जब उपस्थिति का पता लगाने का प्रयास किया गया तो चौंकाने वाले आंकडों का पता चला है. रिम्स के आंकडों के अनुसार कुल 1538 रजिस्टर्ड डॉ, अधिकारी, पदाधिकारी, नर्स, कम्पयूटर ऑपरेटर व अन्य कर्मचारी है. इसमे सिर्फ 539 की ही उपस्थिति पाई गई.

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डायरेक्टर चेंबर तक के मशीन खराब पडे

रिम्स में काम करने वाले सभी अधिकारी -पदाधिकारी के लिए अलग-अलग स्थानों बायो मैट्रिक मशीन लगवाया गया था. लेकिन अधिकांश स्थानों के मशीन खराब पडे है. इमरजेंसी में लगे बायोमैट्रिक मशीन हो या फिर डायरेक्टर चेेंबर के बाहर का, सभी स्थानों पर कमोबेश एक सी हालत है.

कई चिकित्सकों ने नहीं बनाया था अटेंडेंस

शनिवार को जांच करने पर पाया गया कि रिम्स के कई डॉक्टरों ने अपना अटेंडेंस बनाया ही नहीं था. लगभग 1000 लोगों ने अपना उपस्थिति बनाना जरुरी नहीं समझा. इनमे डॉक्टर के साथ-साथ अन्य सभी विभागों के सदस्य शामिल है. रिम्स जैसे राज्य के सबसे बडे हॉस्पिटल में उपस्थिति की यह रिपोर्ट बाकई चौकाने वाली है.

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सभी विभागों के बाहर लगा है मशीन : डिप्टी सुपरीटेंडेंट

इस संबध में बायोमेट्रिक की जिम्मेवारी संभाल रहे डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ संजय कुमार ने बताया कि लगभग 48 बायोमैट्रिक मशीन अलग-अलग स्थानों पर लगाये गए है. जिनमें ज्यादातर काम करने योग्य है. इसके अलावा जिस मशीन के बारे में पता चलता है कि उसमें खराबी है तो तुरंत ठीक कर लिया जाता है. डॉ संजय ने बताया कि सभी डिपार्टमेंट के अलावा कॉमन स्थान में भी मशीन लगवाया गया है.

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