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रिम्सः डिस्पेंसरी बंद, फार्मासिस्ट बन गए क्लर्क, मरीजों को कैसे मिलेगी दवाई

Ranchi: झारखंड के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स में राज्य के अलावा दूसरे राज्यों से भी इलाज के लिए मरीज आते हैं. मरीजों को इलाज के साथ सभी दवाएं उपलब्ध कराने के दावे भी किए जाते हैं. इसके लिए डिस्पेंसरी भी खोले गए थे, जहां ओपीडी के मरीजों को मुफ्त में दवाएं उपलब्ध कराई जाएगी. इतने बड़े हॉस्पिटल में मरीजों को दवा उपलब्ध कराने वाली डिस्पेंसरी पर ताला लग गया और मरीजों को दवा देने वाले फार्मासिस्ट बेकार हो गए. अब प्रबंधन इनसे अलग-अलग विभागों में क्लर्क का काम करा रहा है. जिससे कि हॉस्पिटल में इलाज को आने वाले मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही है. वहीं इसके लिए प्राइवेट मेडिकल में भारी कीमत भी चुकानी पड़ रही है. बताते चलें कि प्रबंधन अगर मैनपावर का इस्तेमाल कर हॉस्पिटल की सभी डिस्पेंसरी को चालू कर दें तो मरीजों को दवा खरीदने के लिए बाहर का रूख नहीं करना पड़ेगा.

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हॉस्पिटल में है 10 फार्मासिस्ट

कहीं भी दवा दुकान या वितरण केंद्र के संचालन के लिए फार्मासिस्ट की जरूरत होती है. एक समय रिम्स में भी अलग-अलग डिस्पेंसरी में 10 फार्मासिस्ट को दवा वितरण केंद्र में तैनात किया गया था. जहां पर मरीजों को मुफ्त में दवाएं दी जाती थी. केंद्र के बंद होने के बाद फार्मासिस्ट को अपना मूल काम छोड़कर क्लर्क की ड्यूटी में लगा दिया गया. जिससे यह भी साफ है कि प्रबंधन नहीं चाहता कि डिस्पेंसरी को चालू कर मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई जाए.

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एक डिस्पेंसरी के भरोसे 2500 मरीज

1500 बेड के इस हॉस्पिटल में बेड की क्षमता से ज्यादा मरीज एडमिट है. वहीं ओपीडी में भी हर दिन 2000 मरीजों का आना होता है. इमरजेंसी में भी 350-400 मरीज हर दिन इलाज के लिए आ जाते है. अब ओपीडी के मरीजों के लिए एक डिस्पेंसरी रिम्स में चल रही है. उसमें भी गिनती की 20 दवाएं रखी गई है जो मरीजों को मुफ्त में दी जाती है. ऐसे में ओपीडी के मरीजों को लिखी जाने वाली दवाएं कहां से मिलेगी.

260 दवाएं किसी काम की नहीं

हॉस्पिटल कैंपस में जन औषधि केंद्र का टेंडर होने तक टेंपररी संचालन किया जा रहा है. वहीं 260 तरह की दवाएं भी रखी गई है, लेकिन ये दवाएं मरीजों के किसी काम की नहीं है. चूंकि डॉक्टरों की लिखी ज्यादातर दवाएं केंद्र में नहीं है. जिससे कि मरीजों को वहां से निराश होकर लौटना पड़ रहा है. वहीं जन औषधि केंद्र में तैनात फार्मासिस्ट अमित कुमार का कहना है कि हमारे पास जो दवाएं है उससे हम सबकी डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे हैं.

किसकी कहां लगी है ड्यूटी

श्वेता लकड़ा – क्लर्क, सर्जरी डिपार्टमेंट

अरविंद कुमार – एडवाइजर (अशोक कुमार)

कृष्ण कुमार बेसरा – क्लर्क, मेडिकल आफिसर

शंकर कुमार – क्लर्क, सर्जरी डिपार्टमेंट

प्रमोद कुमार केसरी –  फार्मोकोलॉजी

दीपक सिंह – क्लर्क, स्टोर

विजय आजाद –  रिम्स डिस्पेंसरी

रूपा – गायनी डिपार्टमेंट

राकेश प्रसाद – गायनी डिपार्टमेंट

अमित कुमार – जन औषधि केंद्र

 

इस मामले में सर्जन सह पीआरओ रिम्स डॉ डीके सिन्हा ने कहा कि 10 फार्मासिस्ट हमारे हॉस्पिटल में है. वे लोग कहां काम कर रहे है इसकी जानकारी फार्मोकोलॉजी डिपार्टमेंट के लोग ही दे सकते है.

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