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रिम्स : आयुष्मान कार्डधारी ने डॉ. सीबी सहाय से लगायी इलाज की गुहार, तो डॉक्टर ने थमाया दलाल का नंबर, दलाल ने कहा- पहले 50 हजार जमा करो

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Ranchi : सरकार द्वारा गरीब मरीजों के लिए शुरू की गयी आयुष्मान भारत योजना में भी दलाली शुरू हो चुकी है. दलालों की नजर अब हर गरीब मरीज पर टिकी रहती है. चिकित्सक जैसे ही मरीज को इलाज में लंबे खर्चे की बात कहते हैं, उसके बाद ही दलाल अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए मरीज को अपने जाल में फंसाने का काम शुरू कर देता है. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में दलाल की सक्रियता चरम पर है. ब्लड बैंक से लेकर इलाज तक में दलालों की नजर गड़ी रहती है. यह सब रिम्स के डॉक्टरों की सांठ-गांठ के बिना संभव भी नहीं है. चिकित्सक स्वयं मरीज के अटेंडेंट को दलाल का नंबर उपलब्ध कराते हैं और उससे बात करने की सलाह देते हैं. यह कहना गलत नहीं होगा कि चिकित्सकों की पनाह में ही रिम्स में दलाल पल रहे हैं.

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बेरमो के गोल्डेन कार्डधारी मरीज से दलाल ने मांगे 50 हजार रुपये

बेरमो के अशोक चौहान छज्जा से गिर गये थे, जिसके कारण उनकी गर्दन में गंभीर चोट लगी, जिसके बाद उनका पूरा शरीर शिथिल पड़ गया. परिजन उनका इलाज कराने के लिए उन्हें रांची ले आये. अशोक चौहान 18 सितंबर से रिम्स में डॉ. सीबी सहाय के वार्ड में भर्ती हैं. अशोक और उनका परिवार बेहद गरीब हैं. किसी तरह से गुजारा चलता है. 23 सितंबर को सरकार द्वारा आयुष्मान भारत (प्रधानमंत्री जन आरोग्य) योजना की शुरुआत की गयी. योजना के अंगर्गत गरीबों का नि:शुल्क उपचार करने की बात कही गयी. मरीज की पत्नी लालपरी देवी ने बताया कि उन्होंने इस योजना के तहत अपना गोल्डेन कार्ड भी बनवा रखा है, इसके बावजूद उनसे पैसा मांगा जा रहा है. उन्होंने बताया कि डॉ सीबी सहाय ने उनके पति के इलाज में प्रयुक्त होनेवाले सामान पर 50 हजार रुपये खर्च होने की बात कही. उन्होंने एक व्यक्ति का फोन नंबर दिया और बात करने के लिए कहा. दिये गये फोन नंबर पर बात करने पर 50 हजार रुपये देने को कहा गया.

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आयुष्मान भारत योजना की जानकारी नहीं है

डॉ सीबी सहाय द्वारा दिये गये फोन नंबर पर मरीज की पत्नी लालपरी देवी ने बात की. उन्होंने जब बताया कि उनके पास आयुष्मान भारत का गोल्डेन कार्ड है, तो दलाल ने कहा कि कोई आयुष्मान भारत योजना की जानकारी नहीं है, पैसा तो देना होगा. दलाल ने कहा कि मेरा बॉस नहीं मान रहा है, वह जो बोलेगा वही करेंगे. इसके बाद उस व्यक्ति ने अपने बॉस का नंबर लालपरी देवी को दिया और बात करने के लिए कहा. वहीं, जब यह पूरा मामला निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव तक पहुंचा, तो उन्होंने मरीज के पजिरन को चार पन्ने का आवेदन फॉर्म पकड़ाते हुए कहा कि इस आवेदन को भरकर जमा कीजिये, तब कुछ हो सकता है.

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ब्लड के नाम पर भी हो चुकी है वसूली

लालपरी देवी ने बताया कि इससे पहले ब्लड उपलब्ध कराने के लिए भी एक व्यक्ति ने चार हजार रुपये की मांग की थी.

तुरंत जांच कराती हूं : निधि खरे

मामले की जानकारी जब न्यूज विंग ने स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे को दी, तो उन्होंने कहा कि आपके माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई है, तुरंत मामले की जांच कराती हूं.

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