न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

डॉ वीके प्रजापति की नियुक्ति की जांच के लिए रिम्स गंभीर नहीं, ज्वाइनिंग पर कई बार खड़े हो चुके हैं सवाल

21 सितंबर को बनी थी जांच कमिटी, 10 दिनों में देना था रिपोर्ट

97

Ranchi: रिम्स के डेंटल विभाग में डॉ वीके प्रजापति दो साल से प्रोफेसर के रुप में पढ़ा रहे थे. लेकिन, अब उनकी ज्वाइनिंग और  रजिस्ट्रेशन को लेकर प्रश्न चिन्ह खडे हो गये हैं. उनकी ज्‍वाइनिंग पर सवाल खड़ा करने वाला और कोई नहीं बल्कि इंडियन डेंटल एसोसिएशन एवं झारखंड डेंटल एसोसिएशन है. एसोसिएशन द्वारा 27 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर डॉ प्रजापति के मनोनयन की जांच कराने का आग्रह किया गया था. उसके बाद विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए कमिटी गठित की गई थी. कमिटी का गठन 21 सितंबर को ही किया गया था. साथ ही दस दिनों के अंदर रिपोर्ट देने को कहा गया था. इसे 18 दिन गुजर गए, लेकिन अबतक कोई जांच नहीं हुई है. टीम में रिम्स के अपर निदेशक (प्रशासक) अमित कुमार, संयुक्त सचिव राजेश पाठक एवं उपनिदेशक गिरजा शंकर प्रसाद को शामिल किया गया था.

इसे भी पढ़ें: वित्‍तीय संकट में आयुष्‍मान भारत योजना, 15 दिनों में खत्‍म हो गये 2000 करोड़ रुपये

स्वास्थ्य मंत्री ने साल 2017 में ही दिये थे जांच के आदेश

डॉ प्रजापति के मनोनयन एवं निबंधन पर 2016 से लगातार प्रश्न उठते रहे हैं. आईडीए और जेडीए द्वारा इसकी जांच कराने को लेकर प्रतिवेदन पहले में भी दिया जा चुका है. साल 2017 में स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने भी डॉ वीके प्रजापति के मनोनयन एवं निबंधन आदि की जांच के आदेश दिए गए थे. लेकिन, नतीजा कुछ नहीं निकला, अब एक बार फिर जांच के आदेश जारी किये गये हैं.

जांच कमिटी के लिए जारी आदेश पत्र

इसे भी पढ़ें: बेहाल हुआ आरयू का परीक्षा विभाग, परीक्षा नियंत्रक बदलने के बाद भी कम नहीं हुई छात्रों की समस्या

कमिटी के सदस्य को पता भी नहीं

इस विषय पर कमिटी के सदस्य रिम्स के उप निदेशक (प्रशासन) गिरजा शंकर प्रसाद से जब जानने की कोशिश की गयी तो उन्होंने कहा कि इस विषय में कोई जानकारी ही नहीं है. मुझ तक ऐसा कोई आदेश नहीं पहुंचा है.

palamu_12

दो साल से काबिज है पद पर

किसी भी डेंटिस्ट चिकित्सकों का निबंधन डेंटल कांउसिल ऑफ इंडिया (डीसीआई) में कराना अनिवार्य होता है. 2016 में झारखंड डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया का गठन होने के बाद अब झारखंड डेंटल कांउसिल में भी निबंधन कराना अनिवार्य है. वहीं डॉ वीके प्रजापति के रजिस्ट्रेशन को ही अवैध बताया गया है, इसकी पुष्टि झारखंड डेंटल कांउसिल के रजिस्ट्रार ने की है. इसके बावजूद वे बीते दो साल से पद पर कार्यरत हैं. उनके खिलाफ जांच टीम भी गठित की गयी है. डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया से एनओसी लिए बिना ही झारखंड में डॉ  वीके प्रजापति का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया. जबकि, बिहार सरकार से एनओसी मिलने के बाद झारखंड में रजिस्ट्रेशन के लिए डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया से भी एनओसी लेना जरूरी है. स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए डीसीआइ में डॉ प्रजापति के रजिस्ट्रेशन पर सवाल उठाया है. यही वजह है कि डॉ वीके प्रजापति का केंद्र से अब तक कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है.

एनओसी लेने का मामला है: प्राचार्य

डेंटल विभाग के प्राचार्य डॉ पंकज गोयल ने बताया कि डॉ प्रजापति का निबंधन और एनओसी से जुड़ा मामला है. इसकी जांच चल रही है, लेकिन फिर से कोई कमिटी गठित की गई है इसकी जानकारी नहीं है. उन्होंने बताया कि डॉ प्रजापति बिहार से बगैर एनओसी लिए झारखंड ट्रासंफर कर लिया था, इससे उनका निबंधन अवैध हो गया था.

मुझे इस पर कुछ नहीं कहना: डॉ प्रतापति

न्यूज विंग संवाददाता ने डेंटिस्ट डॉ वीके प्रजापति से जब उनका पक्ष जानने का प्रयास किया तो उन्होंने इस संबंध में कुछ कहने से मना कर दिया. डॉ प्रजापति ने कहा कि इस मामले पर मुझे कोई बात नहीं करनी.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

%d bloggers like this: