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बुझे मन से ही सही, लेकिन बीजेपी के बेटिकट नेताओं ने दिखायी वफादारी, कांग्रेसी नेताओं ने बनायी दूरी

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Ranchi: लोकसभा चुनाव को लेकर झारखंड में महागठबंधन नेताओं और एनडीए उम्मीदवारों के बीच जनसंपर्क अभियान जोरों पर है. दलों के प्रत्याशी वोट की उम्मीद लिये लगातार अपने क्षेत्र में जनता के संपर्क हैं. लेकिन इस अभियान से अलग बीजेपी और कांग्रेस में ऐसे कई नेता हैं, जो बेटिकट होने पर पार्टी आलाकमान से नाराज रहे.   दोनों ही दलों में नाराज ऐसे नेता पार्टी के प्रत्याशियों को हराने में एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. इनमें बीजेपी से रविंद्र राय, रविंद्र पांडे, रामटहल चौधरी जैसे सीटिंग एमपी शामिल थे, तो वहीं कांग्रेस में फुरकान अंसारी, इरफान अंसारी, अरूण उरांव, रामेश्वर उरांव, ददई दुबे, राजेंद्र सिंह जैसे नेता. हालांकि नाराजगी के बावजूद बेटिकट हुए बीजेपी नेताओं में से कईयों ने पार्टी प्रत्याशी के प्रति वफादारी दिखाते हुए एनडीए के चुनावी मंच को साझा किया, तो वहीं कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी उम्मीदवारों से दूरी बनाये रखी. दबे अंदाज में ही सही लेकिन उन्होंने एहसास करा दिया कि उन्हें टिकट नहीं मिलने का परिणाम पार्टी को झेलना पड़ सकता है.

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लोहरदगा में दिखी नाराजगी, चतरा में निर्दलीय ने लगाया ग्रहण

चौथे चरण (29 अप्रैल) के तहत राज्य की तीन संसदीय क्षेत्रों (चतरा, लोहरदगा और पलामू) में वोटिंग हो चुकी है. इसमें लोहरदगा सीट पर बेटिकट रामेश्वर उरांव और अरूण उरांव जैसे नेताओं ने प्रत्याशी सुखदेव भगत के नामांकन से दूरी बनाये रखी. चुनावी जनसंपर्क अभियान वे कई भी प्रत्याशी के साथ नहीं दिखे. नामांकन के मौके पर केवल रांची से कांग्रेस प्रत्याशी सुबोधकांत सहाय और जेवीएम नेता बंधु तिर्की ही मौजूद थे. वहीं चतरा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी की जीत की राह में लातेहार जिला परिषद उपाध्यक्ष सह बीजेपी के कद्दावर बागी नेता राजेंद्र साहू सबसे बड़े रोड़ा साबित हुए. निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन कर उन्होंने अपने ही प्रत्याशी के जीत पर ग्रहण तक लगा दिया.

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संथाल में खुल कर दिख रही इरफान और फुरकान की नाराजगी

संथाल परगना क्षेत्र में पड़नेवाले गोड्डा संसदीय सीट पर कांग्रेसी नेता फुरकान अंसारी ने मजबूत दावा ठोंका था. वे और उनके विधायक पुत्र इरफान अंसारी ने इस दावे के पीछे 2014 के मोदी लहर में भी बड़े वोट लाने का हवाला दे रहे थे. लेकिन कांग्रेस ने महागठबंधन धर्म का पालन करते हुए यह सीट जेवीएम को दे दी. इससे नाराज फुरकान और इरफान अंसारी ने पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ जम कर आग उगला. जेवीएम प्रत्याशी प्रदीप यादव की जगह दुमका से जेएमएम प्रत्याशी शिबू सोरेन के नामांकन में उपस्थित होकर इरफान ने अपनी नाराजगी भी जता दी. वहीं धनबाद सीट पर भी कांग्रेस के दो दिग्गज नेता ददई दुबे और राजेंद्र सिंह भी टिकट का आस लगाये थे. लेकिन इनके आस पर बाहर से आयतित किये उम्मीदवार कीर्ति आजाद को टिकट दे दिया गया. उनकी नाराजगी इतनी बढ़ गयी कि ददई गुट के समर्थकों ने कीर्ति और डॉ अजय कुमार को काले झंडे तक दिखा दिये. दोनों नेता न तो प्रत्याशी के नामांकन में उपस्थित रहे न ही जनसंपर्क अभियान में.

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बीजेपी के बेटिकट नेताओं ने दिया पार्टी का साथ

महागठबंधन से अलग बीजेपी के कई सीटिंग एमपी (रविंद्र पांडे, रविंद्र राय, रामटहल चौधरी) ने टिकट काटे जाने पर शुरू में पार्टी आलाकमान के प्रति नाराजगी जतायी. कई बार अटकलें रहीं कि इन नेताओं ने टिकट की आस में अन्य पार्टियों से संपर्क साधा है. हालांकि बाद में इन्होंने पार्टी के प्रति वफदारी भी दिखायी. गिरिडीह में एनडीए प्रत्याशी चंद्रप्रकाश चौधरी के पक्ष में वे मंच साझा करते दिखे. हालांकि इसके अलग रांची एमपी रामटहल चौधरी   खुल कर नाराजगी जताते हुए निर्दलीय चुनाव भी लड़ रहे हैं.

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