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झारखंड में नक्सली संगठनों में पड़ी दरार, बढ़े आपसी टकराव के आसार

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Ranchi : झारखंड में नक्सली संगठन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. अभी अंदर से जो रिपोर्ट आ रही है, उसके अनुसार नक्सल संगठन में दरार की सूचना मिल रही है. पिछले 15 दिनों की बात करें तो इस तरह के दो मामले सामने आये हैं. जहां गिरिडीह में पांच लाख के इनामी नुनूचंद महतो ने संगठन से बगावत करने पर नक्सलियों ने उसको अगवा कर लिया था. वहीं दूसरी ओर खूंटी में भाकपा माओवादी ने पोस्टरबाजी करके नक्सली बोयदा पाहन और विमल पूर्ति को भगोड़ा करार दिया था.

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पैसे और संगठन की एक महिला से रिश्ते को लेकर नुनुचंद  ने संगठन से बगावत किया

पारसनाथ क्षेत्र के पूर्वी छोर का एरिया कमांडर नक्सली नुनूचंद महतो पांच लाख का इनामी है. नुनूचंद महतो को भाकपा माओवादी के शीर्ष नेतृत्व ने संगठन से 5-6 महीने पहले ही बाहर कर दिया था. जिससे बौखलाये नुनूचंद ने अलग आपराधिक गिरोह बनाया और क्षेत्र में लगातार धन उगाही कर रहा था.

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यही वजह है कि नक्सली संगठन भाकपा माओवादी को उसकी यह हरकत नागवार गुजर रही थी. नक्सली संगठन का मारक दस्ता नुनूचंद महतो की तलाश में था. बताया जा रहा है की नक्सलियों ने नुनुचंद को अगवा कर लिया था. फिर सशर्त जिन्दा छोड़ दिया. लेवी के पैसे और संगठन की एक महिला से रिश्ते को लेकर नुनुचंद महतो ने संगठन से बगावत कर ली थी. इसके बाद उसे संगठन से निकाल दिया गया था.

कुख्यात नक्सली बोयदा पाहन और विमल पूर्ति को भगोड़ा करार दिया

प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी ने बीते 10 सितंबर को खूंटी के मुरहू, सोयको और मारंगहदा थाना क्षेत्रों में पोस्टरबाजी किया था. जिसमें कुख्यात नक्सली बोयदा पाहन और विमल पूर्ति को भगोड़ा करार दिया था.

लांदुप, सेरेंगडीह और संसागबेड़ा इलाके में पोस्टरबाजी कर नक्सलियों ने बोयदा और विमल को संगठन से भागा हुआ नक्सली बताया था. माओवादियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि इन भगोड़े नक्सलियों को रहने की जगह न दें. भाकपा माओवादी की दक्षिणी जोनल कमेटी के नाम से क्षेत्र में पोस्टरबाजी की गयी थी.

10 लाख का इनामी नक्सली कमांडर चंद्र भूषण यादव दस्ता छोड़कर फरार हो गया था

 लातेहार जिले के महुआडांड़ थाना क्षेत्र के गोठगांव का रहनेवाला 10 लाख का इनामी नक्सली कमांडर चंद्र भूषण यादव उर्फ भूषण यादव नक्सली दस्ता छोड़ कर फरार हो गया. बताया जा रहा था कि नक्सली दस्ता छोड़ कर भागने के समय उसने लाखों रुपये अपने साथ रख लिए थे.

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इसके बाद नक्सली संगठन ने भूषण यादव को भगोड़ा करार दिया था. इसके कुछ ही दिन बाद 19 सितंबर 2019 को भूषण यादव ने गुमला पुलिस समक्ष सरेंडर कर दिया था.बता दें कि चंद्र भूषण यादव छत्तीसगढ़, लातेहार, गुमला और लोहरदगा में हुए नक्सली हमलों का आरोपी रह चुका है. पुलिस को उसकी लंबे समय से तलाश थी.

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