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बिजली खरीद में जितना खर्च हो रहा, उतनी राजस्व की वसूली नहीं- राकेश कुमार राय

Ranchi: देश में ऊर्जा की खपत बढ़ रही है. इसमें दिन प्रतिदिन वृद्धि दर्ज की जा रही है. ऐसे में जरूरी है कि ऊर्जा संरक्षण की ओर कदम बढ़ाया जायें. ऊर्जा संरक्षण में एक-एक व्यक्ति का योगदान होना चाहिये. जिससे पारंपरिक बिजली स्रोतों का भी सरंक्षण हो. ये बातें नेशनल ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिसिऐंसी के सचिव राकेश कुमार राय ने कहीं. वे शनिवार को जरेडा की ओर से आयोजित स्टेकहोर्ल्डस वर्कशॉप को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत अब कार्बन न्यूट्रल की ओर अग्रसर है. इसका लक्ष्य जल्द पूरा होगा. ऐसे में जरूरी है कि उर्जा दक्षता के साथ संरक्षण पर बल दिया जायें. इसके लिये एनर्जी एफिसिऐंसी प्रोग्राम शुरू किया गया है. जिसमें छह जोन देश भर में है. झारखंड भी इसका हिस्सा है.

व्यय कम करने का बेहतर विकल्प सरंक्षण

जरेडा निदेशक केके वर्मा ने कहा कि वर्तमान में ऊर्जा सरंक्षण पर अधिक बल दिया जा रहा है. राज्य में बिजली खरीद लगभग 400 करोड़ रूपये है. जबकि बिजली बिल के नाम पर राजस्व वसूली काफी कम है. निगम बिजली खरीद वितरण तो कर देती है. लेकिन राजस्व वसूली में कई सामाजिक कारकों का सामाना करना पड़ता है. ऐसे में जरूरी है कि ऊर्जा संरक्षण को घरेलू से लेकर औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ावा दिया जायें. उन्होंने बताया कि राज्य में उर्जा क्षेत्र में पिछले महीने एक अच्छी पहल हुई है. राज्य सरकार ने ईसीडीसी कोड को सहमति दे दी है. एजेंसी पीडब्लयूसी के आइडिया पर राज्य इंपावर कमेटी ने सहमति दी है. ऐेसे में काम और भी सरल हो जायेगा. इस दौरान पीडब्लयूसी के निदेशक कुलभूषण कुमार ने बताया कि छह जोनों में ऊर्जा दक्षता और संरक्षण पर अलग-अलग चरणों में काम किया जायेगा. जिससे काम और वृहत होता जायेगा.

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