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अनुबंधकर्मियों को परमानेंट करने के लिए चार बार राजस्व विभाग ने सभी डीसी को भेजी चिट्ठी, नहीं आया जवाब

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  • – तय समय पर नहीं भेजने पर नहीं हो सकेगा नियमितिकरण पर विचार
  • – झारखंड सरकार दस साल पूरा कर चुके अनुबंधकर्मियों को अब तक स्थायी नहीं कर सकी है.

Pravin/Gaurav

Ranchi: झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में काम कर चुके वैसे अनुबंधकर्मी जिन्होंने 18 जून 2019 तक 10 साल की सेवा पूरी कर ली है,  उन्हें स्थायी किया जाना है. कोर्ट के आदेश के मुताबिक,  चार महीने के अंदर ही संबंधित अनुबंधकर्मियों को स्थायी कर दिया जाना था.

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विभागीय कार्रवाई भी शुरू हुई और सभी जिलों से रिपोर्ट मांगे गये. लेकिन मांगने पर भी रिपोर्ट नहीं मिला. जिसके बाद सभी जिलों को राजस्व विभाग की ओर से चार बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है. चार रिमाइंडर के बाद भी किसी भी जिला ने अनुबंधकर्मियों की सूची नहीं सौंपी है.

विभाग की ओर से सभी जिलों को सबसे पहले 23 जुलाई, दूसरा 16 सितंबर, तीसरा रिमाइंडर 25 अक्टूबर और चौथा रिमाइंडर 16 दिसंबर को भेजा गया. लेकिन इसके बाद भी किसी भी जिला ने रिपोर्ट नहीं भेजा है.

हालांकि राजस्व विभाग, जो इस नियुक्ति प्रक्रिया का नोडल विभाग है. इसके द्वारा जारी निर्देश में यह स्पष्ट है कि जो भी जिला तय समय तक सूची नहीं सौंपेगा, उन जिलों के अनुबंधकर्मियों के स्थायीकरण पर विचार नहीं किया जा सकेगा.

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सृजित पद के विरुद्ध काम रहे कर्मियों को ही मिलेगा लाभ, संविदाकर्मी होंगे इससे बाहर

सरकार के सेवा नियमितिकरण के तहत सृजित पद के विरुद्ध काम कर रहे कर्मियों की सेवा ही नियमित की जाएगी. वहीं संविदाकर्मियों को इसका लाभ नहीं मिल सकेगा. विशेषज्ञों की मानें तो अनुबंधकर्मियों को स्थायी करने से उनको मिलने वाले वेतन में चार गुणा वृद्धि हो जाएगी.

क्या है प्रक्रिया

वैसे लोगों की ही सेवा नियमित होगी, जिन्होंने दस साल सृजित पद के विरुद्ध काम किये हैं. सभी जिलों में एक कमिटी है, जिसे रिपोर्ट तैयार करना है. जिसके बाद रिपोर्ट कमिशनर को भेजा जाएगा और फिर रिपोर्ट विभाग को सौंपा जाएगा. फिर पूरी जांच होगी और अंतिम जांच के बाद ही अंतिम निर्णय होगा.

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हाइकोर्ट में दायर हुई थी याचिका 

इस मामले पर परिवहन विभाग के अस्थायी कर्मचारी नरेंद्र कुमार तिवारी समेत अन्य ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की. हाइकोर्ट ने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि सरकार ने सेवा नियमितीकरण की जो व्यवस्था बनायी है. वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये निर्णय के आलोक में सही है. इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट चले गये.

इसके बाद नरेंद्र कुमार तिवारी समेत नौ अन्य कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी और पंचायती राज के दो अस्थायी कर्मचारियों की सिविल अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि झारखंड के बने दस साल नहीं हुए थे, तो वो फैसला कैसे लागू होगा.

इसके बाद झारखंड सरकार द्वारा 13 फरवरी 2015 में लागू की गयी सेवा नियमितीकरण सिविल एप्लीकेशन नंबर 7423-7429/2018 नियमावली 2015 को भी निरस्त कर दिया. और जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की डबल बेंच ने फैसला देते हुए कहा था कि सभी को चार माह में स्थायी करें. इस मामले में कोर्ट के आदेश के बाद कैबिनेट की भी स्वीकृति दी गयी थी.

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