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RBI की मिनट्स ऑफ मीटिंग से खुलासाः बैंक ने नोटबंदी पर सरकारी दावे को ठुकराया था

पीएम के नोटबंदी के ऐलान से चंद घंटे पहले हुई थी आरबीआई की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 561वीं बैठक.

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New Delhi: नोटबंदी को सफल बताने में बीजेपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. वही नोटबंदी के दो साल के बाद, इस फैसले को लेकर आनन-फानन में हुई मीटिंग की डिटेल सामने आयी है. मिली जानकारी के मुताबिक, नोटबंदी का ऐलान करने से चंद घंटे पहले हुई बैठक में आरबीआई ने नोटबंदी को खारिज कर दिया था.

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बैंक ने उस सरकारी दावे को खारिज किया था, जिसमें कहा गया था कि नोटबंदी से काले धन और नकली करेंसी पर रोक लग जाएगी. साथ ही यह आशंका भी जता दी थी कि, इस फैसले से जीडीपी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. हालांकि, आरबीआई ने नोटबंदी को हरी झंडी दी थी.

क्या हुआ था बैठक में

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 561वीं बैठक नोटबंदी के दिन यानी 8 नवंबर, 2016 को शाम 5.30 बजे आनन-फानन में नई दिल्ली में बुलाई गई थी. इस बैठक के मिनट्स ऑफ मीटिंग से इस बात का खुलासा होता है कि आरबीआई ने नोटबंदी को सराहनीय कदम बताया था. लेकिन इसके नकारात्मक प्रभाव से भी केंद्र सरकार को सतर्क भी किया था. इस बात की भी जानकारी मिली है कि आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने इस मिनट्स ऑफ मीटिंग पर नोटबंदी लागू होने के एक महीने से ज्यादा समय बाद यानी 15 दिसंबर, 2016 को साइन किए थे.

केंद्रीय बैंक ने दर्ज की थी 6 आपत्तियां

नोटबंदी पर आरबीआई के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने छह आपत्तियां दर्ज कराई थीं. आरबीआई के डायरेक्टर्स को वित्त मंत्रालय की तरफ से नोटबंदी से एक दिन पहले यानी 7 नवंबर, 2016 को इस बावत प्रस्ताव मिला था, जिस पर बोर्ड निदेशकों ने आपत्ति जताई थी. निदेशकों ने अपनी दलील में कहा था कि उच्च मूल्य वाले (1000 और 500) करंसी नोट को प्रचलन से बाहर करने से न तो कालेधन पर रोक लग पाएगी और न ही नकली नोटों की रोकथाम हो सकेगी.

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मिनट्स ऑफ मीटिंग में वित्त मंत्रालय द्वारा दिए गए जस्टिफिकेशन की लिस्ट दी गई है. काले धन पर मंत्रालय ने व्हाइट पेपर में दर्ज बातें आरबीआई के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सामने रखे, जिसे बोर्ड ने मिनट्स में यूं दर्ज किया है- “अधिकांश काले धन नकद के रूप में नहीं बल्कि वास्तविक क्षेत्र की संपत्ति जैसे सोने या रीयल-एस्टेट के रूप में होता है और इस कदम पर उन संपत्तियों पर कोई भौतिक प्रभाव नहीं पड़ता है.”

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वित्त मंत्रालय ने बोर्ड को सूचित किया था कि 1,000 और 500 रुपये में इस तरह के नकली नोटों की कुल मात्रा 400 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. बोर्ड के निदेशकों का कहना था कि जाली नोट देश के लिए समस्या जरुर है, लेकिन देश में परिचालन में कुल मुद्रा के प्रतिशत के रूप में 400 करोड़ रुपये बहुत बड़ी राशि नहीं है.

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इसके अलावे आरबीआई की बोर्ड ने अपनी आपत्ति में कहा कि सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास और बाजार में प्रचलित उच्च मूल्य के करंसी नोट की मात्रा पर विचार तो किया. लेकिन मुद्रास्फीति की दर पर कोई विचार नहीं किया. सरकार के इस तर्क और दावे पर बोर्ड ने अपनी मिनट्स ऑफ मीटिंग में लिखा है, “सरकार ने अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर का वास्तविक दर पर उल्लेख किया है, जबकि परिसंचरण में मुद्रा में वृद्धि मामूली है. मुद्रास्फीति के लिए समायोजित अंतर इतना कठिन नहीं हो सकता है. इसलिए, यह तर्क पर्याप्त रूप से सिफारिश का समर्थन नहीं करता है.”

दो साल पहले हुई नोटबंदी

गौरतलब है कि दो साल पहले 8 नवंबर, 2016 की रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी. और 500 और 1000 के नोट को बंद कर दिया था. टीवी पर लाइव टेलीकास्ट के जरिये देशवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा था कि नोटबंदी लागू करने से काले धन और नकली नोटों पर रोक लगाई जा सकेगी.

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