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सरकारी कर्मियों पर लगे आरोपों की जांच रिटायर अफसर भी कर सकेंगे, दंड अवधि तक प्रमोशन नहीं

झारखंड सरकारी सेवक वर्गीकरण,नियंत्रण एवं अपील संशोधन नियमावली 2022 लागू

Special Correspondent

Ranchi: झारखंड सरकारी सेवक वर्गीकरण,नियंत्रण एवं अपील (संशोधन) नियमावली 2022 को लागू कर दिया गया है. 2016 की नियमावली को बदल दिया गया है. कार्मिक विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दिया है. इसके तहत अब किसी सरकारी सेवक के कदाचार का आरोप लगता है तो प्राधिकार स्वयं जांच करा सकता है. इसके अलावा नयी नियमावली में सेवानिवृत सरकारी पदाधिकारी के जरिये भीं जांच कराने को जोड़ा गया है. नयी नियमावली के तहत किसी सरकारी अधिकारी व कर्मचारी को दंड होता है तो उस अवधि तक प्रमोशन पर विचार नहीं किया जायेगा. वहीं, कोई सरकारी सेवक जिनकी सेवा समाप्त कर दी गयी हो वे संबंधित प्राधिकार के समक्ष अपील कर सकेंगे. वहीं,सिविल पद के समूह क के सरकारी सेवक सरकारी आदेश के खिलाफ राज्यपाल के समक्ष अपील कर सकेंगे. समूह ख,ग व घ का पदधारी अपने नियुक्ति प्राधिकार से ठीक उपर के प्राधिकार के समक्ष अपील दायर कर सकेंगे. जैसे नियुक्ति प्राधिकार निदेशक,विभागध्यक्ष हो तो सचिव के पास अपील व नियुक्ति प्राधिकार सचिव हो तो विभागीय मंत्री के पास अपील करेंगे.

वहीं जिन मामलों में सीएम के स्तर से दंड दिया गया हो वहां मंत्रिपरिषद के समक्ष अपील कर सकेंगे. जहां कैबिनेट ने दंड दिया हो तो वहां पुन: मंत्रिपरिषद के समक्ष ही अपील की जा सकेगी. 2016 की नियमावली में सरकार के आदेश के विरूद्ध कोई अपील नहीं की जा सकती है,सिर्फ ज्ञापन के रूप में पुनर्विचार अर्जी दाखिल की जा सकेगी के प्रावधान को नयी नियमावली में विलोपित कर दिया गया है. नयी नियमावली में कर्मियों व पदाधिकारियों को असंचयात्मक व संचायात्मक प्रभाव दिए जाने वाले दंड को भी नये सिरे से परिभाषित किया गया है.

असंचयात्मक प्रभाव से यह दंड होगा

असंचायात्मक प्रभाव से वेतन वृद्धियों पर रोक आदेश निर्गत होने की तिथि से प्रभावी होगी, अर्थात आदेश निर्गत होने की तिथि के बाद देय वेतन वृद्धियां रोक दी जायेगी. यह आवश्यक होगा कि अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा आदेश में रोकी गयी वार्षिक वेतन वृद्धियों की संख्या तथा वर्ग को स्पष्ट रूप से अंकित करना होगा. वेतन वृद्धि की रोक अगली तिथी जनवरी या जुलाई माह से जो लागू हो उस तिथि से रोकी जायेगी. इस आदेश से एक साल तक प्रथम वेतन वृद्धि तथा एक साल तक दूसरी वेतन वृद्धि रोक दी जायेगी. लेकिन,असंचयात्मक प्रभाव से दंड है तो रोकी गयी वेतन वृद्धियों के बार तीसरी वेतन वृद्धि की देख तारिख से रोकी गयी दोनों वेतन वृद्धियों को जोड़ते हुए तीसरी वार्षिक वेतन वृद्धि सहित वेतन का भुगतान किया जायेगा. किंतु रोकी गयी अवधि का वित्तीय लाभ नहीं दिया जायेगा. जितने वर्षो के लिए वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी गयी है उस अवधि में प्रमोशन पर विचार नहीं होगा. दंड अवधि के समाप्त होने के बाद ही प्रोन्नति पर विचार किया जायेगा.

संचयात्मक प्रभाव से दंड

संचयात्मक प्रभाव से वेतन वृद्धियों पर रोक आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी होगा. यह रोक जनवरी व जुलाई माह से लागू होगा. दो वार्षिक वेतन वृद्धियां संचायात्मक प्रभाव से रोकी जाती है तो इसका अर्थ होगा कि आदेश के एक वर्ष के तक द्धित्तीय वेतन वृद्धि रोक दी जायेगी. ऐसे वर्षो की संख्या जितने की वेतन वृद्धियां रोकी गयी है, पर संचयात्मक प्रभाव हो.

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