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स्लम एरिया के बच्चों का बचपन संवारेंगे रिटायर्ड आइएएस राजीव कुमार

सेवाकाल से ही स्लम एरिया के बच्चों की दुर्दशा से होते रहे हैं व्यथित

Ranchi :  सेवाकाल के दौरान विभिन्न विभागों में उपलब्धियों का कीर्तिमान स्थापित करने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी राजीव कुमार अब स्लम एरिया के बच्चों का बचपन संवारेंगे. सेवाकाल के दौरान स्लम एरिया के बच्चों की दुर्दशा से व्यथित राजीव कुमार इनके लिये कुछ करना चाहते थे. अब सेवानिवृत्ति के बाद इस चाहत को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है.

 

इसके तहत सर्वप्रथम वह रांची शहरी क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न मोहल्ले स्थित स्लम एरिया के बच्चों से संपर्क कर उनकी दशा और दिशा सुधारने, उन्हें शिक्षित करने और नशा मुक्त समाज का निर्माण करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करेंगे. राजीव कुमार बताते हैं कि सेवाकाल के दौरान विभिन्न जगहों पर स्लम बस्तियों में अल्पवयस्क बच्चों को नशे का आदी होते देख उन्हें आंतरिक पीड़ा होती थी.

 

गरीब, असहाय और बेसहारा बच्चों का बर्बाद होता बचपन देखकर वह काफी द्रवित हो जाया करते थे. अब शेष जीवन पीड़ित मानवता के सेवार्थ समर्पित कर देंगे. इसी नए संकल्प और समाजसेवा के जज्बे और जुनून के तहत राजीव कुमार ने सर्वप्रथम स्लम एरिया के बच्चों का भविष्य बनाने की दिशा में अपने मन में एक रूपरेखा तैयार कर ली है. जल्द ही इसे मूर्त रूप देने में वह जुट जाएंगे.

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गौरतलब है कि राजीव कुमार 28 फरवरी को ग्रामीण विकास विभाग के विशेष सचिव और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं. राजीव कुमार मत्स्य निदेशक, पशुपालन निदेशक, कृषि निदेशक व बागवानी निदेशक सहित लातेहार में उपायुक्त के पद पर सेवारत रहे हैं. मृदुभाषी व व्यवहारकुशल राजीव कुमार एक कर्मठ व ईमानदार अधिकारी के रूप में जाने जाते रहे हैं.

 

सेवाकाल के दौरान अपने प्रशासनिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए उन्होंने कई ऐसी कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सफलता पाई, जिससे राज्य की जनता लाभान्वित हो रही है. यही नहीं, राज्य के मत्स्य निदेशालय में बतौर निदेशक कार्यरत रहे राजीव कुमार ने झारखंड में मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया. नतीजतन मछली के उत्पादन में झारखंड तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है. उनकी पहल पर शुरू की गई मत्स्य विभाग की कई योजनाएं राज्य में मत्स्यपालकों की दशा और दिशा बदलने में काफी सहायक साबित हुई है. मत्स्यपालन के लिए केज कल्चर की शुरुआत उनकी एक महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है. जिसने झारखंड में मत्स्यपालन के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला दी.

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कृषि, पशुपालन व बागवानी के क्षेत्र में भी उनके मार्गदर्शन में कई ऐसे उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं, जो मील का पत्थर के रूप में स्थापित है. सेवाकाल के दौरान श्री कुमार ने मत्स्यपालकों, पशुपालकों व किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने की दिशा में सकारात्मक पहल की. सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ लाभुकों तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकताओं में शुमार था. फलस्वरूप राज्य के कृषकों, पशुपालकों, मत्स्यपालकों की आर्थिक स्थिति में आशातीत सुधार संभव हो सका.

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