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ई-कॉमर्स कंपनियों के कारण रिटेल बाजार में 3 साल में 35 प्रतिशत तक गिरावट: कंज्यूमर एसोसिएशन

  • एसोसिएशन ने वाणिज्य मंत्रालय को पत्र लिखकर ई-कॉमर्स पर नियंत्रण लगाने की मांग की
    ई-कॉमर्स की नयी पॉलिसी से उम्मीद थी, लेकिन ये किसी काम की नहीं

Ranchi: ई कॉमर्स बाजार तेजी से फैल रहा है, जिससे रिटेल व्यापारियों के सामने कठिनाई आने लगी है. ऑनलाइन बाजार कारोबार के कारण ऑफलाइन कारोबार घट गया है. ये बातें झारखंड कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के सचिव संजय अखौरी ने कहीं.

एसोसिएशन की ओर से उन्होंने मंगलवार को वित्त एवं वाणिज्य मंत्रालय भारत सरकार को पत्र लिखा है. उन्होंने लिखा है कि ऑनलाइन बाजार होने से अन्य क्षेत्रों में रोजगार घट रहे हैं. यह चैंकानेवाले आंकड़े हैं कि ऑफलाइन ट्रेडर्स का कारोबार तीन साल में 35 फीसदी तक घटा है.

एसोसिएशन के सचिव संजय अखौरी ने कहा कि केंद्र सरकार के ई-कॉमर्स क्षेत्र में एफडीआइ के नये नियमों के कारण हमें उम्मीद थी अब एक्सक्लूसिव सेल आदि घटेगी, जिससे उनके ऑफलाइन कारोबार को मदद मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

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खुदरा व्यापार देता है 90 प्रतिशत रोजगार

पत्र में जिक्र है कि खुदरा व्यापार कोविड लॉकडाउन के वक्त से ही संकट का सामना कर रहा है. रोजगार की दृष्टि से खुदरा व्यापार देश में 90 प्रतिशत रोजगार के अवसर देता है. बैंक डिफॉल्ट में खुदरा की भागीदारी शून्य समान है. फिर भी खुदरा व्यापार पूर्ण रूप से उपेक्षित है.

लॉकडाउन के बाद उम्मीद थी कि बाजार धीरे-धीरे पटरी पर आयेगा. लेकिन ऑनलाइन बाजार का इसमें नकारात्मक प्रभाव पड़ा. मार्जिन इतना कम हो गया है कि कारोबार करना कठिन हो गया है. विदेशी फंडिंग से ई-कॉमर्स कंपनियां भारी डिस्काउंट देती हैं. इससे ब्रांड विशेष पर भी विपरीत असर हो रहा है.

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लाये गये ई-कॉमर्स की नयी पॉलिसी से हमें उम्मीद थी कि अब ई कॉमर्स कंपनियां एक्सक्लूसिव ऑफर, लॉस फंडिंग, डीप डिस्काउंटिंग नहीं लगेगी. लेकिन इस त्यौहारी सीजन में भी ई-कॉमर्स कंपनियों को ऐसा करते देखा गया है. ऐसे में इन कंपनियों पर रोक लगनी चाहिए.

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