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पाकिस्तान का दावा – जैश के खिलाफ प्रतिबंधों पर अमल की जिम्मेवारी निभा रहा

Islamabad: पाकिस्तान ने रविवार को कहा कि पुलवामा आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद पर 2002 में पाबंदी लगाई गयी थी और इस्लामाबाद इन प्रतिबंधों पर कानून के मुताबिक अपने दायित्व निभा रहा है. गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में बीते गुरूवार को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघती हमले में इस अर्धसैनिक बल के कम से कम 40 जवान शहीद हो गए. पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी. हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी कूटनीतिक आक्रामकता दिखाते हुए भारत ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान अपनी राजकीय नीति के तौर पर आतंकवाद का इस्तेमाल करता रहा है.

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आरोपों का दिया जवाब 

भारत ने यह कहने पर पाकिस्तान को आड़े हाथ लिया कि पुलवामा हमले में उसकी कोई भूमिका नहीं है. भारत ने कहा कि इस्लामाबाद यह दावा नहीं कर सकता कि उसे अपनी भूमि पर आतंकवादी संगठनों की मौजूदगी के बारे में पता नहीं था, क्योंकि ऐसे संगठनों से पाकिस्तान के संबंध सभी ने देखे हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘‘जैश-ए-मोहम्मद ने हमले के लिए जिम्मेदारी ली है. यह संगठन और इसका नेतृत्व पाकिस्तान में है.’’ कुमार ने कहा कि पाकिस्तानी मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों के साथ मंच भी साझा किया था.

बिना किसी जांच के लगाये जा रहे हैं आरोप 

इस बीच, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने भारत के इस आरोप को खारिज किया कि पुलवामा हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ है. उन्होंने कहा, ‘‘जैश-ए-मोहम्मद वर्ष 2002 से ही पाकिस्तान में एक प्रतिबंधित संगठन है और पाकिस्तान इन प्रतिबंधों पर अमल को लेकर अपने दायित्व निभा रहा है.’’  फैसल ने कहा कि पाकिस्तान भारत के आरोपों को इसलिए खारिज कर रहा है क्योंकि यह हमले के कुछ ही समय के भीतर और बगैर किसी जांच के लगाए जा रहे हैं.

जल्दबाजी में और पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर लगाए जा रहे आरोप

उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में और पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर लगाए जा रहे यह आरोप अतीत में हुई ऐसी घटनाओं के बाद भारत की तरफ से लगाए जाने वाले आरोपों की तरह ही हैं. ‘‘जैश द्वारा हमले की जिम्मेदारी लेने’’ और ‘‘कथित हमलावर के वीडियो’’ को लेकर भारत की ओर से दिए गए बयान पर फैसल ने सवाल उठाते हुए कहा कि भारत ने इस मामले में चुनिंदा और सिर्फ अपने हित से जुड़े मानकों पर अमल किया.

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सोशल मीडिया टिप्पणी को ‘‘सुनहरे दर्जे’’ का मान लिया

फैसल ने कहा कि एक तरफ भारत ने असत्यापित सोशल मीडिया टिप्पणी को ‘‘सुनहरे दर्जे’’ का मान लिया, लेकिन पाकिस्तान में हिंसा को अंजाम देने के अपने ही नागरिक कुलभूषण जाधव के ‘‘इकबालिया बयानों’’ को वह मानने के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत को हमले का कारण बनी उसकी सुरक्षा एवं खुफिया चूकों के बारे में आत्ममंथन और उससे जुड़े सवालों के जवाब देने की जरूरत है. भारत के आदिल अहमद डार की गिरफ्तारी और 2017 से ही उसकी हिरासत की खबरों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए.

इसे भी पढ़ेंः पुलवामा आतंकवादी हमला किसी एक व्यक्ति का काम नहीं: रॉ के पूर्व प्रमुख

 

 

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